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रीवा: सेना में रह कर देश की सेवा तो आर्मी का हर जवान करता है. लेकिन रीवा में एक ऐसे रिटायर्ड फौजी भी हैं. जिनका सेना के प्रति समर्पण और देश सेवा का जज्बा रिटायरमेंट के बाद भी बरकरार है. आर्मी मैन दिवाकर दुबे समय निकाल कर स्थानीय नौजवानों को आर्मी के लिए निशुल्क ट्रेनिंग देते हैं. रीवा के इस रिटायर्ड फौजी ने अपनी नौकरी का पूरा कार्यकाल तो देश के लिए समर्पित किया ही है. लेकिन रिटायरमेंट के बाद का जीवन भी सेना और नौजवानों के भविष्य के लिए समर्पित कर रहे हैं यह कहानी रीवा के एक भूतपूर्व सेना के जवान की है यह शुरुआत हम दुष्यंत की इन पंक्तियों के साथ करने जा रहे हैं."हो कहीं भी आग लेक़िन आग जलनी चाहिए" रीवा शहर से तकरीबन 10 किलोमीटर दूर टिकुरी गांव में रिटायर्ड फौजी आर्मी ट्रेनिंग कैंप चलाते है. इस ट्रेनिंग कैंप के माध्यम से दिवाकर दुबे नौजवानों को आर्मी की ट्रेनिंग देते हैं. इसमें फिजिकल ट्रेनिंग के साथ-साथ तमाम उन बातों का ध्यान रखा जाता है. जिससे नौजवानों का चयन भारतीय सेना में हो सके. इस कैंप की खास बात यह है कि यह कैंप पूरी तरह से निशुल्क है. आसपास के दस गांवों के युवा ट्रेनिंग के लिए इस कैंप में आते हैं.
युवाओं का कहना है कि पहले गांव के अधिकतर युवा नशे की चपेट में रहते थे. युवाओं को अपने भविष्य को लेकर भी चिंता थी. हमें एक निशुल्क सीखने का मौका मिला है हम युवाओं को मैसेज देना चाहते हैं कि रास्ता चुनने का अधिकार उनके हाथ में है चुनना उनको है कि जाना किधर है। पंजाब केसरी से बात करते हुए दिवाकर द्विवेदी ने बताया कि उन्होंने 16 वर्ष तक सेना ने सेवाएं दी रिटायरमेंट लेने के बाद उनके मन में आया कि आजकल के युवा नशे की ओर ज्यादा प्रभावित हो रहा है और नशे की चपेट में लगातार आ रहे हैं तो सेना के जवान ने गांव-गांव जाकर युवा को फिजिकली फिट होने की सलाह देने लगे और ऐसे तैसे आज सेना के जवान के पास सैकड़ों से भी ज्यादा युवा है जो आर्मी में भर्ती होने की इच्छा जाहिर कर रहे हैं ऐसा नहीं है कि अभी तक युवा आर्मी भर्ती ना हो गए हो 4 वर्षों में 26 युवा कुल सेना में भर्ती हो चुके हैं वही दिवाकर दुबे ने बताया कि इस वर्ष 100 से ज्यादा युवा सेना में भर्ती होंगे. |
रीवा: सेना में रह कर देश की सेवा तो आर्मी का हर जवान करता है. लेकिन रीवा में एक ऐसे रिटायर्ड फौजी भी हैं. जिनका सेना के प्रति समर्पण और देश सेवा का जज्बा रिटायरमेंट के बाद भी बरकरार है. आर्मी मैन दिवाकर दुबे समय निकाल कर स्थानीय नौजवानों को आर्मी के लिए निशुल्क ट्रेनिंग देते हैं. रीवा के इस रिटायर्ड फौजी ने अपनी नौकरी का पूरा कार्यकाल तो देश के लिए समर्पित किया ही है. लेकिन रिटायरमेंट के बाद का जीवन भी सेना और नौजवानों के भविष्य के लिए समर्पित कर रहे हैं यह कहानी रीवा के एक भूतपूर्व सेना के जवान की है यह शुरुआत हम दुष्यंत की इन पंक्तियों के साथ करने जा रहे हैं."हो कहीं भी आग लेक़िन आग जलनी चाहिए" रीवा शहर से तकरीबन 10 किलोमीटर दूर टिकुरी गांव में रिटायर्ड फौजी आर्मी ट्रेनिंग कैंप चलाते है. इस ट्रेनिंग कैंप के माध्यम से दिवाकर दुबे नौजवानों को आर्मी की ट्रेनिंग देते हैं. इसमें फिजिकल ट्रेनिंग के साथ-साथ तमाम उन बातों का ध्यान रखा जाता है. जिससे नौजवानों का चयन भारतीय सेना में हो सके. इस कैंप की खास बात यह है कि यह कैंप पूरी तरह से निशुल्क है. आसपास के दस गांवों के युवा ट्रेनिंग के लिए इस कैंप में आते हैं.
दरअसल रीवा के रहने वाले भूतपूर्व सैनिक दिवाकर द्विवेदी पिछले चार वर्षों से रीवा नौजवानों को सेना में भर्ती होने के लिए निःशुल्क प्रशिक्षण दे रहे हैं. तथा युवाओं को भर्ती के लिए तैयार कर रहा है. उनसे प्रशिक्षण प्राप्त कर अब तक कुल सैकड़ो युवा सेना में भर्ती भी हुए हैं. बता दें कि दिवाकर द्विवेदी चार वर्ष पहले सेना (Indian Army) से सेवानिवृत हुए थे. लेक़िन द्विवेदी की देश सेवा अभी भी जारी है. भूतपूर्व सेना का यह जवान युवाओं में भविष्य की नींव तराश कर देश सेवा के लिए ट्रेनिंग दे रहा है. इन दिनों दिवाकर द्विवेदी गांव गांव जाकर युवाओं को अग्निवीर के लिए तैयार कर रहे हैं. इसके लिए वह सुबह और शाम के समय तीन-तीन घंटे युवाओं को शारीरिक प्रशिक्षण दे रहे हैं.. साथ ही युवाओं को नशे से दूर रहने और सेना में भर्ती के लिए युवाओं को प्रेरित कर रहे हैं.. कोविड के दौरान 200 युवाओं को द्विवेदी ने सेना में भर्ती होने का प्रशिक्षण दिया था.. जिसका नतीजा यह रहा कि 200 में से 26 युवा सेना में भर्ती हुए हैं.. भारतीय सेना में शामिल होने का सपना पाले युवा ट्रेनिंग लेकर देश भावना से गदगद हैं... विंध्य के युवाओं में आजादी से पूर्व से ही फौज में जाने का जज्बा रहा है। लेकिन, इस बार अग्निवीर भर्ती को लेकर युवाओं में जबरदस्त जोश देखने को मिल रहा है...भूतपूर्व सैनिक दिवाकर द्विवेदी मानते हैं कि सैनिक कभी रिटायर्ड नही होता वह जहां भी होता है देश की सेवा व समाज की सेवा में काम करता रहा है..।
युवाओं का कहना है कि पहले गांव के अधिकतर युवा नशे की चपेट में रहते थे. युवाओं को अपने भविष्य को लेकर भी चिंता थी. हमें एक निशुल्क सीखने का मौका मिला है हम युवाओं को मैसेज देना चाहते हैं कि रास्ता चुनने का अधिकार उनके हाथ में है चुनना उनको है कि जाना किधर है।
पंजाब केसरी से बात करते हुए दिवाकर द्विवेदी ने बताया कि उन्होंने 16 वर्ष तक सेना ने सेवाएं दी रिटायरमेंट लेने के बाद उनके मन में आया कि आजकल के युवा नशे की ओर ज्यादा प्रभावित हो रहा है और नशे की चपेट में लगातार आ रहे हैं तो सेना के जवान ने गांव-गांव जाकर युवा को फिजिकली फिट होने की सलाह देने लगे और ऐसे तैसे आज सेना के जवान के पास सैकड़ों से भी ज्यादा युवा है जो आर्मी में भर्ती होने की इच्छा जाहिर कर रहे हैं ऐसा नहीं है कि अभी तक युवा आर्मी भर्ती ना हो गए हो 4 वर्षों में 26 युवा कुल सेना में भर्ती हो चुके हैं वही दिवाकर दुबे ने बताया कि इस वर्ष 100 से ज्यादा युवा सेना में भर्ती होंगे.