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भोपाल। मध्यप्रदेश बोर्ड (MP Board) ने कक्षा 5वीं और 8वीं की वार्षिक परीक्षाओं के पैटर्न में अहम बदलाव किए हैं। नई शिक्षा नीति (NEP) के तहत अब परीक्षाएं छात्रों के लिए अधिक सरल और विषयानुकूल बनाई जा रही हैं। खास बात यह है कि दीर्घ उत्तरीय (लॉन्ग आंसर) प्रश्नों की संख्या कम कर दी गई है और लघु व अति लघु उत्तरीय प्रश्नों की संख्या बढ़ा दी गई है। इससे छात्रों को उत्तर देने में अधिक सहूलियत मिलेगी।
परीक्षा परिणाम का मूल्यांकन अब तीन भागों में किया जाएगा – अर्द्धवार्षिक परीक्षा (20 अंक), वार्षिक लिखित परीक्षा (60 अंक) और प्रोजेक्ट वर्क (20 अंक)। परीक्षा में कुल 26 प्रश्न होंगे, जिनमें विभिन्न प्रकार के प्रश्न शामिल होंगे:
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ) – 5 प्रश्न (1 अंक प्रत्येक)
रिक्त स्थानों की पूर्ति – 5 प्रश्न (1 अंक प्रत्येक)
अति लघु उत्तरीय प्रश्न – 6 प्रश्न (2 अंक प्रत्येक)
लघु उत्तरीय प्रश्न – 6 प्रश्न (3 अंक प्रत्येक)
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न – 4 प्रश्न (5 अंक प्रत्येक)
राज्य शिक्षा केंद्र के मूल्यांकन अधिकारी ब्रजेश सक्सेना ने बताया कि इस बदलाव का उद्देश्य छात्रों पर दीर्घ प्रश्नों का दबाव कम करना है, ताकि यदि छात्र लंबे उत्तर न भी दे सकें, तो भी उनके अधिक अंक नहीं कटें।
नई शिक्षा नीति के अंतर्गत कक्षा 5वीं और 8वीं में पढ़ाई जाने वाली विषयवस्तु में भी बदलाव किए गए हैं। अब छात्रों को खेती, मौसम, स्वास्थ्य जैसे व्यावहारिक विषयों से भी जोड़ा जा रहा है।
खेती से जुड़ी जानकारी: खेत में बिताया गया दिन, कृषि उपकरणों का उपयोग, प्रकृति के प्रति मानव का कर्तव्य।
हिंदी पाठ्यक्रम: दशहरा, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, प्राकृतिक आपदाएं, मेलों पर आधारित प्रश्न।
स्थानीय राजनीति और नागरिक शिक्षा को भी जोड़ा गया
कक्षा 8वीं के छात्रों को अब स्थानीय राजनीति से भी जोड़ा जा रहा है। प्रोजेक्ट वर्क में छात्रों को वार्ड स्तर की समस्याएं, महापौर और पार्षद के चुनाव की प्रक्रिया, पंचायत प्रतिनिधियों के कार्य, आदि विषयों पर जानकारी जुटाकर समाचार लेखन जैसा प्रोजेक्ट तैयार करना होगा। इस प्रोजेक्ट को 20 अंक दिए जाएंगे।
छात्रों को यह कार्य करते समय अपने परिजनों और आस-पड़ोस के लोगों से चर्चा करनी होगी। इससे उनमें सामाजिक समझ और व्यावहारिक ज्ञान का भी विकास होगा।
ब्रजेश सक्सेना के अनुसार, 5वीं और 8वीं की वार्षिक परीक्षाएं फरवरी या मार्च 2025 में आयोजित की जा सकती हैं। नई व्यवस्था के तहत छात्रों की तैयारी को और मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।एमपी बोर्ड द्वारा किया गया यह बदलाव छात्रों की समझ आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने वाला है। इससे न केवल परीक्षा का तनाव घटेगा, बल्कि छात्रों को व्यावहारिक जीवन से जुड़ने का भी अवसर मिलेगा।