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अपर लोक अभियोजक समरथ पाटीदार ने बताया कि श्वेता शाह की मां सुनंदा शाह महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता थीं। उनकी 13 जून 2014 को सेवा में रहते मौत हो गई थी। इसके बाद श्वेता ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए कलेक्टर को आवेदन दिया। संयुक्त कलेक्टर और तत्कालीन प्रभारी मंत्री पारसचंद्र जैन ने भी सिफारिश की थी।
अंकसूची में बड़ा फर्जीवाड़ा निकला
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय ने श्वेता की हायर सेकेंडरी परीक्षा 2002 की अंकसूची का सत्यापन इंदौर मंडल से कराया। जांच में पाया गया कि रिकॉर्ड और प्रस्तुत अंकसूची अलग-अलग हैं। विज्ञान संकाय की अंकसूची लगाई गई, जबकि वास्तविक अंकसूची वाणिज्य संकाय की थी।
विभाग को गुमराह करने पर मामला दर्ज
श्वेता शाह पर विभाग को गुमराह कर नौकरी पाने का आरोप साबित हुआ। थाना स्टेशन रोड रतलाम में धारा 420, 467, 468 और 409 के तहत केस दर्ज किया गया। सुनवाई के बाद कोर्ट ने दोषी मानते हुए 10 साल की सजा और जुर्माना लगाया।