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भोपाल। मध्य प्रदेश में बीजेपी की सरकार बेशक पिछले 22 साल से है. लेकिन बीते दो साल से सरकार का चेहरा बदल गया है. मोहन यादव लगातार अपने फैसलों के साथ इस बदलाव को दर्ज भी करा रहे हैं. 2023 के विधानसभा चुनाव से पहले लागू की गई लाड़ली बहना योजना इसकी ताजा मिसाल होगी. इसके पहले बीते दो साल में मोहन यादव शिवराज सरकार के 05 फैसले पलट चुके हैं.नामकरण का बड़ा सियासी संदेश भी लाड़ली बहना योजना लाड़ली लक्ष्मी के बाद शिवराज सरकार में लागू की गई सबसे महत्वाकांक्षी योजनाओं में से थी. इन्हीं योजनाओं के बूते रिश्तों की राजनीति के माहिर खिलाड़ी शिवराज की ब्रांडिग भाई और मामा से हुई थी. अब लाड़ली बहना योजना का नाम सुभद्रा योजना किए जाने से सिर्फ नाम में बदलाव नही होगा. इसके नए नामकरण का बड़ा सियासी संदेश भी है और मोहन के साथ नया कनेक्ट भी।मध्य प्रदेश में मोहन सरकार की वो योजना जिस पर सरकार सबसे बडा बजट रखे हुए है. योजना के लागू होने के बाद उसकी राशि में भी बदलाव हुआ है. लेकिन बड़ी बात ये कि सरकार उसका नाम भी बदलने जा रही है. एक ही पार्टी की सरकार में अमूमन नाम बदले जाने के मामले कम सामने आते हैं. लेकिन मोहन सरकार ने मध्यप्रदेश ही नहीं, बाकी बीजेपी शासित राज्यों में लागू इस योजना का नाम इसके लागू होने के करीब ढाई साल बाद आखिरकार बदल दिया.लाड़ली बहनों को इस बार से मिलने जा रही 1500 की किश्त के साथ वे लाड़ली नहीं सुभद्रा कहलाएंगी और सुभद्रा योजना की लाभार्थी बन जाएंगी।लाड़ली नाम में आत्मीयता तो सुभद्रा में सम्मान
वरिष्ठ पत्रकार प्रकाश भटनागर कहते हैं "नाम में क्या रखा है. ऐसी बात नहीं. जिस तरह से मोहन यादव काम कर रहे हैं, वैचारिक अनुष्ठान के साथ उनकी सरकार आगे बढ़ रही है, उसमें आप देखेंगे कि एक ही योजना के ये बदले गए नाम कितना अंतर पैदा कर देते हैं. बात दो अलग-अलग मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल या उनके दिए नाम की नहीं है."आप फर्क देखिए लाड़ली एक आत्मीयता का संबोधन बेशक हो सकता है. लेकिन जब आप बहन को सुभद्रा कहते हैं. कृष्ण की बहन सुभद्रा तो उसका मान कितना बढ़ जाता है. फिर बीजेपी की सरकार में मुख्यमंत्री मोहन की सुभद्रा इसमें आत्मीयता भी है और सम्मान भी." |
भोपाल। मध्य प्रदेश में बीजेपी की सरकार बेशक पिछले 22 साल से है. लेकिन बीते दो साल से सरकार का चेहरा बदल गया है. मोहन यादव लगातार अपने फैसलों के साथ इस बदलाव को दर्ज भी करा रहे हैं. 2023 के विधानसभा चुनाव से पहले लागू की गई लाड़ली बहना योजना इसकी ताजा मिसाल होगी. इसके पहले बीते दो साल में मोहन यादव शिवराज सरकार के 05 फैसले पलट चुके हैं.नामकरण का बड़ा सियासी संदेश भी लाड़ली बहना योजना लाड़ली लक्ष्मी के बाद शिवराज सरकार में लागू की गई सबसे महत्वाकांक्षी योजनाओं में से थी. इन्हीं योजनाओं के बूते रिश्तों की राजनीति के माहिर खिलाड़ी शिवराज की ब्रांडिग भाई और मामा से हुई थी. अब लाड़ली बहना योजना का नाम सुभद्रा योजना किए जाने से सिर्फ नाम में बदलाव नही होगा. इसके नए नामकरण का बड़ा सियासी संदेश भी है और मोहन के साथ नया कनेक्ट भी।मध्य प्रदेश में मोहन सरकार की वो योजना जिस पर सरकार सबसे बडा बजट रखे हुए है. योजना के लागू होने के बाद उसकी राशि में भी बदलाव हुआ है. लेकिन बड़ी बात ये कि सरकार उसका नाम भी बदलने जा रही है. एक ही पार्टी की सरकार में अमूमन नाम बदले जाने के मामले कम सामने आते हैं. लेकिन मोहन सरकार ने मध्यप्रदेश ही नहीं, बाकी बीजेपी शासित राज्यों में लागू इस योजना का नाम इसके लागू होने के करीब ढाई साल बाद आखिरकार बदल दिया.लाड़ली बहनों को इस बार से मिलने जा रही 1500 की किश्त के साथ वे लाड़ली नहीं सुभद्रा कहलाएंगी और सुभद्रा योजना की लाभार्थी बन जाएंगी।लाड़ली नाम में आत्मीयता तो सुभद्रा में सम्मान
वरिष्ठ पत्रकार प्रकाश भटनागर कहते हैं "नाम में क्या रखा है. ऐसी बात नहीं. जिस तरह से मोहन यादव काम कर रहे हैं, वैचारिक अनुष्ठान के साथ उनकी सरकार आगे बढ़ रही है, उसमें आप देखेंगे कि एक ही योजना के ये बदले गए नाम कितना अंतर पैदा कर देते हैं. बात दो अलग-अलग मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल या उनके दिए नाम की नहीं है."आप फर्क देखिए लाड़ली एक आत्मीयता का संबोधन बेशक हो सकता है. लेकिन जब आप बहन को सुभद्रा कहते हैं. कृष्ण की बहन सुभद्रा तो उसका मान कितना बढ़ जाता है. फिर बीजेपी की सरकार में मुख्यमंत्री मोहन की सुभद्रा इसमें आत्मीयता भी है और सम्मान भी."