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नीमच में सोमवार को राजनीति का माहौल उस समय गरमा गया जब जिला मुख्यालय पर कांग्रेस ने प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के नेतृत्व में शक्ति प्रदर्शन किया। कांग्रेस द्वारा आयोजित वोट अधिकार सत्याग्रह सभा और वोट चोर गद्दी छोड़ पैदल मार्च में हजारों कार्यकर्ताओं की मौजूदगी ने पूरे शहर का माहौल बदल दिया। सभा के दौरान पटवारी ने भाजपा सरकार पर चुनाव में धांधली और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए, वहीं दूसरी ओर भाजपा कार्यकर्ताओं ने काले झंडे दिखाकर, नारेबाजी करते हुए और पुतला दहन कर विरोध जताया। यही नहीं, इस दौरान पटवारी के काफिले पर स्याही फेंकने की घटना ने पूरे घटनाक्रम को और ज्यादा गरमा दिया।
सुबह से ही शहर की गलियों में कांग्रेस कार्यकर्ताओं का जमावड़ा शुरू हो गया था। गांधी भवन पर कार्यकर्ताओं, महिलाओं और युवाओं की बड़ी संख्या जुटी। यहां से रैली का आगाज हुआ। सभा को संबोधित करते हुए जीतू पटवारी ने कहा कि मध्यप्रदेश समेत देशभर में भाजपा सरकार चोरी के वोट से चल रही है। लोकसभा चुनाव में 25 से अधिक सीटें चोरी के वोटों से जीती गईं और मध्यप्रदेश, हरियाणा तथा महाराष्ट्र की सरकारें भी अनैतिक तरीकों से बनाई गई हैं। पटवारी ने कहा कि वोट भरोसा होता है, यह जनता और प्रतिनिधियों को जोड़ता है, लेकिन भाजपा ने इस भरोसे को तोड़ा है। उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव पर आरोप लगाया कि उन्होंने प्रदेश को शराब का कॉरिडोर बना दिया है। स्थानीय मुद्दों पर बोलते हुए उन्होंने नगर पालिका में जमीनों के घोटाले और ढिल्लन भूखंड प्रकरण में हुए 500 करोड़ से ज्यादा के भ्रष्टाचार को उजागर किया।फोर जीरो से जैसे ही पटवारी का काफिला फोर जीरो चौराहे से गुजरा, भाजपा महिला मोर्चा की कार्यकर्ताओं ने काले झंडे दिखाए और जोरदार नारेबाजी की। इसी दौरान पटवारी का पुतला जलाया गया और जूते-चप्पलें बरसाई गईं। भीड़ में से एक महिला कार्यकर्ता ने पटवारी के वाहन पर स्याही फेंकी, हालांकि स्याही पटवारी तक नहीं पहुंची और पास में सुरक्षा में तैनात टीआई सौरभ शर्मा की वर्दी पर जा गिरी। यह घटना कुछ देर तक तनावपूर्ण रही, मगर पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित कर लिया। भाजपा विधायक दिलीप सिंह परिहार ने इस विरोध को जन आक्रोश बताते हुए कहा कि पटवारी ने महिलाओं के सम्मान को ठेस पहुंचाई है, उन्हें तुरंत माफी मांगनी चाहिए।वहीं, कांग्रेसजनों ने गांधी भवन से वोट चोर गद्दी छोड़ रैली निकाली। नारों और झंडों के साथ यह रैली गोल चौराहा और गोमाबाई रोड होते हुए कलेक्टर कार्यालय की ओर बढ़ी। लेकिन संजीवनी पुलिया पर पहले से तैनात पुलिस बल ने रैली को रोक दिया। भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच बैरिकेडिंग की गई थी और फायर ब्रिगेड तक को मौके पर खड़ा किया गया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने घेराव का प्रयास किया, लेकिन पुलिस की समझाइश के बाद रैली पुलिया पर ही थम गई। इसके बाद कांग्रेस नेताओं ने राज्यपाल के नाम एसडीएम संजीव साहू को ज्ञापन सौंपा। इसमें चुनावी गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच कराने, किसानों को अतिवृष्टि से राहत दिलाने, बेरोजगारी और महंगाई पर कदम उठाने की मांग की गई।जिला कांग्रेस अध्यक्ष तरुण बाहेती ने इस मौके पर कहा कि भाजपा ने सत्ता हथियाने के लिए अनैतिक तरीकों का इस्तेमाल किया है। किसानों की फसलें बर्बाद हो गई हैं, बीमा कंपनियों ने किसानों को धोखा दिया है, लेकिन सरकार किसानों की सुध नहीं ले रही। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का यह आंदोलन अब रुकने वाला नहीं है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं को रोकने की कोशिश की गई, लेकिन जनता का समर्थन हमारे साथ है और आंदोलन सफल हुआ।सभा और मार्च में पूर्व मंत्री नरेंद्र नाहटा, पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष अनिल चौरसिया, हर्षविजय गेहलोत, अरविंद चौपड़ा, अजीत कांठेड़, सत्यनारायण पाटीदार सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। मंच से वक्ताओं ने मतदाता सूची में हो रही गड़बड़ियों और लोकतांत्रिक प्रक्रिया से हो रहे खिलवाड़ का विरोध किया। उन्होंने साफ कहा कि यह आंदोलन तब तक चलेगा जब तक जनता को न्याय और लोकतांत्रिक अधिकार नहीं मिलते।कांग्रेस जिलाध्यक्ष बनने के बाद तरुण बाहेती के नेतृत्व में यह पहला बड़ा कार्यक्रम था। इस कार्यक्रम में कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ और एकजुटता देखने को मिली। लोगों की जुबान पर चर्चा रही कि बाहेती के नेतृत्व में कांग्रेस का पहला कार्यक्रम जोरदार और सफल रहा। इसी कार्यक्रम में पूर्व जिलाध्यक्ष अनिल चौरसिया ने आधिकारिक रूप से बाहेती को दुपट्टा पहनाकर पदभार सौंपा और कहा कि उन्होंने कांग्रेस में नई पीढ़ी को नेतृत्व सौंप दिया है।कुल मिलाकर नीमच की यह रैली केवल कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन नहीं रही, बल्कि भाजपा के खिलाफ माहौल गरमाने का माध्यम भी साबित हुई। स्याही फेंकने की घटना और भाजपा के तीखे विरोध ने कांग्रेस की रैली को और चर्चित बना दिया। वहीं, कांग्रेस कार्यकर्ताओं की एकजुटता और भीड़ ने यह संकेत दिया कि जिले की राजनीति में कांग्रेस फिर से मजबूती की ओर बढ़ रही है |
नीमच में सोमवार को राजनीति का माहौल उस समय गरमा गया जब जिला मुख्यालय पर कांग्रेस ने प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के नेतृत्व में शक्ति प्रदर्शन किया। कांग्रेस द्वारा आयोजित वोट अधिकार सत्याग्रह सभा और वोट चोर गद्दी छोड़ पैदल मार्च में हजारों कार्यकर्ताओं की मौजूदगी ने पूरे शहर का माहौल बदल दिया। सभा के दौरान पटवारी ने भाजपा सरकार पर चुनाव में धांधली और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए, वहीं दूसरी ओर भाजपा कार्यकर्ताओं ने काले झंडे दिखाकर, नारेबाजी करते हुए और पुतला दहन कर विरोध जताया। यही नहीं, इस दौरान पटवारी के काफिले पर स्याही फेंकने की घटना ने पूरे घटनाक्रम को और ज्यादा गरमा दिया।
सुबह से ही शहर की गलियों में कांग्रेस कार्यकर्ताओं का जमावड़ा शुरू हो गया था। गांधी भवन पर कार्यकर्ताओं, महिलाओं और युवाओं की बड़ी संख्या जुटी। यहां से रैली का आगाज हुआ। सभा को संबोधित करते हुए जीतू पटवारी ने कहा कि मध्यप्रदेश समेत देशभर में भाजपा सरकार चोरी के वोट से चल रही है। लोकसभा चुनाव में 25 से अधिक सीटें चोरी के वोटों से जीती गईं और मध्यप्रदेश, हरियाणा तथा महाराष्ट्र की सरकारें भी अनैतिक तरीकों से बनाई गई हैं। पटवारी ने कहा कि वोट भरोसा होता है, यह जनता और प्रतिनिधियों को जोड़ता है, लेकिन भाजपा ने इस भरोसे को तोड़ा है। उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव पर आरोप लगाया कि उन्होंने प्रदेश को शराब का कॉरिडोर बना दिया है। स्थानीय मुद्दों पर बोलते हुए उन्होंने नगर पालिका में जमीनों के घोटाले और ढिल्लन भूखंड प्रकरण में हुए 500 करोड़ से ज्यादा के भ्रष्टाचार को उजागर किया।फोर जीरो से जैसे ही पटवारी का काफिला फोर जीरो चौराहे से गुजरा, भाजपा महिला मोर्चा की कार्यकर्ताओं ने काले झंडे दिखाए और जोरदार नारेबाजी की। इसी दौरान पटवारी का पुतला जलाया गया और जूते-चप्पलें बरसाई गईं। भीड़ में से एक महिला कार्यकर्ता ने पटवारी के वाहन पर स्याही फेंकी, हालांकि स्याही पटवारी तक नहीं पहुंची और पास में सुरक्षा में तैनात टीआई सौरभ शर्मा की वर्दी पर जा गिरी। यह घटना कुछ देर तक तनावपूर्ण रही, मगर पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित कर लिया। भाजपा विधायक दिलीप सिंह परिहार ने इस विरोध को जन आक्रोश बताते हुए कहा कि पटवारी ने महिलाओं के सम्मान को ठेस पहुंचाई है, उन्हें तुरंत माफी मांगनी चाहिए।वहीं, कांग्रेसजनों ने गांधी भवन से वोट चोर गद्दी छोड़ रैली निकाली। नारों और झंडों के साथ यह रैली गोल चौराहा और गोमाबाई रोड होते हुए कलेक्टर कार्यालय की ओर बढ़ी। लेकिन संजीवनी पुलिया पर पहले से तैनात पुलिस बल ने रैली को रोक दिया। भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच बैरिकेडिंग की गई थी और फायर ब्रिगेड तक को मौके पर खड़ा किया गया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने घेराव का प्रयास किया, लेकिन पुलिस की समझाइश के बाद रैली पुलिया पर ही थम गई। इसके बाद कांग्रेस नेताओं ने राज्यपाल के नाम एसडीएम संजीव साहू को ज्ञापन सौंपा। इसमें चुनावी गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच कराने, किसानों को अतिवृष्टि से राहत दिलाने, बेरोजगारी और महंगाई पर कदम उठाने की मांग की गई।जिला कांग्रेस अध्यक्ष तरुण बाहेती ने इस मौके पर कहा कि भाजपा ने सत्ता हथियाने के लिए अनैतिक तरीकों का इस्तेमाल किया है। किसानों की फसलें बर्बाद हो गई हैं, बीमा कंपनियों ने किसानों को धोखा दिया है, लेकिन सरकार किसानों की सुध नहीं ले रही। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का यह आंदोलन अब रुकने वाला नहीं है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं को रोकने की कोशिश की गई, लेकिन जनता का समर्थन हमारे साथ है और आंदोलन सफल हुआ।सभा और मार्च में पूर्व मंत्री नरेंद्र नाहटा, पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष अनिल चौरसिया, हर्षविजय गेहलोत, अरविंद चौपड़ा, अजीत कांठेड़, सत्यनारायण पाटीदार सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। मंच से वक्ताओं ने मतदाता सूची में हो रही गड़बड़ियों और लोकतांत्रिक प्रक्रिया से हो रहे खिलवाड़ का विरोध किया। उन्होंने साफ कहा कि यह आंदोलन तब तक चलेगा जब तक जनता को न्याय और लोकतांत्रिक अधिकार नहीं मिलते।कांग्रेस जिलाध्यक्ष बनने के बाद तरुण बाहेती के नेतृत्व में यह पहला बड़ा कार्यक्रम था। इस कार्यक्रम में कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ और एकजुटता देखने को मिली। लोगों की जुबान पर चर्चा रही कि बाहेती के नेतृत्व में कांग्रेस का पहला कार्यक्रम जोरदार और सफल रहा। इसी कार्यक्रम में पूर्व जिलाध्यक्ष अनिल चौरसिया ने आधिकारिक रूप से बाहेती को दुपट्टा पहनाकर पदभार सौंपा और कहा कि उन्होंने कांग्रेस में नई पीढ़ी को नेतृत्व सौंप दिया है।कुल मिलाकर नीमच की यह रैली केवल कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन नहीं रही, बल्कि भाजपा के खिलाफ माहौल गरमाने का माध्यम भी साबित हुई। स्याही फेंकने की घटना और भाजपा के तीखे विरोध ने कांग्रेस की रैली को और चर्चित बना दिया। वहीं, कांग्रेस कार्यकर्ताओं की एकजुटता और भीड़ ने यह संकेत दिया कि जिले की राजनीति में कांग्रेस फिर से मजबूती की ओर बढ़ रही है