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(चर्चा ए आम) चंद्रमोहन भगत फिर कांग्रेस हाई कमान ने अपने संगठन पर ही कुल्हाड़ी दे मारी ....! (चर्चा ए आम) चंद्रमोहन भगत प्रदेश के 71 जिला अध्यक्षों की घोषणा हो चुकी है राहुल खड़गे का कांग्रेस संगठन सृजन अभियान उल्टा होकर इतना मजबूर कर दे रहा है कि निष्ठावान कार्यकर्ता विसर्जन को मन से स्वीकार अलग होते जा रहे हैं। जो कार्यकर्ता अपने नए अध्यक्षों की घोषणा के बाद अपने मन का गुबार सार्वजनिक कर रहे थे। उन्हें और चीढ़ाते हुए प्रदेश संगठन ने सोशल मीडिया से पोस्ट हटाने के लिए 24 घंटे का समय देकर सच प्रकट करने वालों को डराने की हरकत कर डाली है। सच को दबाने वाली यह हरकत वैसी ही है जैसी मोदी सरकार राहुल टीम के प्रमाण सहित लगाए सच्चे आरोपी को दबाती आ रही है। इसे सामान्य व्यवहार में सार्वजनिक गलती से अपने ही संगठन का नुकसान करने के बाद भी सीना जोरी करना कहा जाता है। प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ संगठन के हिदायती निर्देश के नतीजे भविष्य में किसी आंतरिक हश्र की तरह घटते नजर आएंगे। राहुल खड़गे टीम को हरियाणा महाराष्ट्र में ऐसे हश्र का अनुभव होने के बाद भी वही प्रयोग मध्य प्रदेश में कांग्रेस में हो रहा है। वरिष्ठ संगठन इसे नजरअंदाज करने के साथ अनुशासन की आड़ में छिपने के बलात प्रयास कर रहा है। जबकि राष्ट्रीय क्षत्रप नेताओं तक को नियुक्तियों में हुई गड़बड़ीकी जानकारी है। जितने कार्यकर्ताओं ने सोशल मीडिया पर अपना विरोध प्रकट किया था वह सब भी किसी न किसी छत्रप नेता के करीबी हैं। अतः जिला अध्यक्षों की घोषणा के साथ जो हो रहा है उसका सभी को अनुमान था। खैर प्रदेश संगठन महामंत्री संजय कामले के निर्देश प्रसारित हुए हैं कि जो कुछ कहे पार्टी फोरम पर कहें जो कह सकेंगे कहेंगे भी। पर यह सवाल तो जिंदा रहेगा कि संगठन को जो नुकसान पहुंचा है उसकी भरपाई किस से कैसे होगी ! यह भी की जो गैर जिम्मेदार नियुक्तियां हुई है वह निरस्त कर योग्य कार्यकर्ताओं को अवसर दिया जाएगा ? या मात्र ठंडे छींटे मारकर, सांत्वना का भाषण पिला कर भविष्य में उपकृत करने का पत्ता फेंका जाएगा ! कांग्रेस संगठन में नुकसान करने वालों को वरिष्ठ संगठन भी उपकृत करने को तत्पर रहता है। जैसे अशोक तवर युवक कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे थे। कांग्रेस छोड़ गए थे हरियाणा चुनाव के पहले वापसी करी और प्रत्याशी भी बनाए गए थे। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने एक साक्षात्कार में यह स्वीकार कीया कि कई बार संगठन विरोधी गतिविधियां करने वालों की शिकायत अनुशासन समिति व वरिष्ठ पदाधिकारी को मिलती है पर कार्रवाई नहीं हो पाती है। उल्टे ऐसे व्यक्ति प्रदेश संगठन में कई बार पद स्थान पा जाते हैं । कम से कम इतनी कार्यवाही तो होना ही चाहिए कि ऐसे व्यक्तियों को पद ना मिले। जाहिर है पहले भी ऐसे ही स्लीपर सेलों को पद मिलते रहे वर्तमान में भी मिले हैं। निष्ठावान कर्मठ कार्यकर्ताओं को सख्त हिदायत मिली है। प्रताड़ित होते रहे पर आवाज ना उठाएं स्लीपर सेलों को मजबूत होने दें ताकि कांग्रेस का राजनीतिक दृश्य से आसानी से विसर्जन होने दिया जाए ।
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(चर्चा ए आम) चंद्रमोहन भगत
फिर कांग्रेस हाई कमान ने अपने संगठन पर ही कुल्हाड़ी दे मारी ....! (चर्चा ए आम)
चंद्रमोहन भगत
प्रदेश के 71 जिला अध्यक्षों की घोषणा हो चुकी है राहुल खड़गे का कांग्रेस संगठन सृजन अभियान उल्टा होकर इतना मजबूर कर दे रहा है कि निष्ठावान कार्यकर्ता विसर्जन को मन से स्वीकार अलग होते जा रहे हैं। जो कार्यकर्ता अपने नए अध्यक्षों की घोषणा के बाद अपने मन का गुबार सार्वजनिक कर रहे थे। उन्हें और चीढ़ाते हुए प्रदेश संगठन ने सोशल मीडिया से पोस्ट हटाने के लिए 24 घंटे का समय देकर सच प्रकट करने वालों को डराने की हरकत कर डाली है। सच को दबाने वाली यह हरकत वैसी ही है जैसी मोदी सरकार राहुल टीम के प्रमाण सहित लगाए सच्चे आरोपी को दबाती आ रही है। इसे सामान्य व्यवहार में सार्वजनिक गलती से अपने ही संगठन का नुकसान करने के बाद भी सीना जोरी करना कहा जाता है। प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ संगठन के हिदायती निर्देश के नतीजे भविष्य में किसी आंतरिक हश्र की तरह घटते नजर आएंगे। राहुल खड़गे टीम को हरियाणा महाराष्ट्र में ऐसे हश्र का अनुभव होने के बाद भी वही प्रयोग मध्य प्रदेश में कांग्रेस में हो रहा है। वरिष्ठ संगठन इसे नजरअंदाज करने के साथ अनुशासन की आड़ में छिपने के बलात प्रयास कर रहा है। जबकि राष्ट्रीय क्षत्रप नेताओं तक को नियुक्तियों में हुई गड़बड़ीकी जानकारी है। जितने कार्यकर्ताओं ने सोशल मीडिया पर अपना विरोध प्रकट किया था वह सब भी किसी न किसी छत्रप नेता के करीबी हैं। अतः जिला अध्यक्षों की घोषणा के साथ जो हो रहा है उसका सभी को अनुमान था।
खैर प्रदेश संगठन महामंत्री संजय कामले के निर्देश प्रसारित हुए हैं कि जो कुछ कहे पार्टी फोरम पर कहें जो कह सकेंगे कहेंगे भी। पर यह सवाल तो जिंदा रहेगा कि संगठन को जो नुकसान पहुंचा है उसकी भरपाई किस से कैसे होगी ! यह भी की जो गैर जिम्मेदार नियुक्तियां हुई है वह निरस्त कर योग्य कार्यकर्ताओं को अवसर दिया जाएगा ? या मात्र ठंडे छींटे मारकर, सांत्वना का भाषण पिला कर भविष्य में उपकृत करने का पत्ता फेंका जाएगा !
कांग्रेस संगठन में नुकसान करने वालों को वरिष्ठ संगठन भी उपकृत करने को तत्पर रहता है। जैसे अशोक तवर युवक कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे थे। कांग्रेस छोड़ गए थे हरियाणा चुनाव के पहले वापसी करी और प्रत्याशी भी बनाए गए थे। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने एक साक्षात्कार में यह स्वीकार कीया कि कई बार संगठन विरोधी गतिविधियां करने वालों की शिकायत अनुशासन समिति व वरिष्ठ पदाधिकारी को मिलती है पर कार्रवाई नहीं हो पाती है। उल्टे ऐसे व्यक्ति प्रदेश संगठन में कई बार पद स्थान पा जाते हैं । कम से कम इतनी कार्यवाही तो होना ही चाहिए कि ऐसे व्यक्तियों को पद ना मिले।
जाहिर है पहले भी ऐसे ही स्लीपर सेलों को पद मिलते रहे वर्तमान में भी मिले हैं। निष्ठावान कर्मठ कार्यकर्ताओं को सख्त हिदायत मिली है। प्रताड़ित होते रहे पर आवाज ना उठाएं स्लीपर सेलों को मजबूत होने दें ताकि कांग्रेस का राजनीतिक दृश्य से आसानी से विसर्जन होने दिया जाए ।