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भगवान पार्श्वनाथ का मोक्ष कल्याणक उत्सव मनाया,रथ यात्रा निकालकर चढ़ाया निर्वाण का लड्डू नीमच। सुबह 9 बजे भगवान पार्श्वनाथ के मोक्ष कल्याणक महोत्सव के उपलक्ष्य में निवार्ण के लाडू की भव्य रथ यात्रा निकाली गई। रथ यात्रा मिडिल स्कूल मैदान जैन भवन से प्रारंभ होकर नगर के प्रमुख मार्ग से होती हुई पुस्तक बाजार स्थित भीडभंजन पार्श्वनाथ मंदिर पर पहुंची। जहां मंदिर में भगवान के दर्शन कर गुरु वंदना की गई। रथ यात्रा में सबसे आगे बैंड बाजे पर भगवान पारसनाथ के भजन कीर्तन की श्वर लहरिया बिखर रही थी। उसके साथ ही समाजजन सफेद परिधानों में चल रहे थे। उसके साथ ही बग्गी में निवार्ण का लाड्डू विराजित किया गया था जिसमें कोठारी परिवार के अख्खे सिंह कोठारी सहित परिवारजन विराजित थे ।इसके साथ ही महिलाएं पार्श्वनाथ की लावण्या गाती हुई चल रही थी। सभी समाज जन उत्साह के साथ नृत्य की मस्ती में झूम रहे थे। नगर के पुस्तक बाजार स्थित भीडभंजन पार्श्वनाथ मंदिर पर 23 वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ के मोक्ष कल्याणक के अवसर पर विद्वान विधानाचार्य की उपस्थिति में पार्श्वनाथ विधान की पूजन कराई गई इस अवसर पर आचार्य ने भगवान पारसनाथ के उपसर्ग और प्रकाश डाला। मोक्ष के लड्डू के लाभार्थी कोठारी परिवार रहे। इस अवसर पर जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर के निमित्त लड्डू कोठारी परिवार द्वारा चढ़ाए गए। इस अवसर पर श्रद्धालु भक्तों द्वारा दीपक प्रज्वलित किया गया ।पूजा अर्चना की गई आरती के बाद प्रसाद वितरण किया गया।मंदिर में श्रद्धालु भक्तों द्वारा सामूहिक गुरु वंदना की गई। भगवान पार्श्वनाथ की जय घोष लगाई गई ।वैदिक मंत्र उच्चारण के साथ निवार्ण का लाडू चढ़ाया गया हमारे जीवन में दया का भाव रहे इसकी प्रार्थना की गई। मंदिर में श्री संघ ट्रस्ट अध्यक्ष अनिल नागौरी, सचिव मनीष कोठारी सहित बड़ी संख्या में समाज जन उपस्थित थे।इस अवसर पर आचार्य प्रशमेश प्रभ सुरीश्वर जी महाराज ने श्री जैन श्वेतांबर भीड भंजन मंदिर मंडल ट्रस्ट पुस्तक बाजार नीमच के तत्वाधान में जैन भवन मेंआयोजित चातुर्मास अमृत प्रवचन श्रृंखला की धर्म सभा में कहा कि परमात्मा को फल चढ़कर फल का त्याग करते हैं और संसार को त्यागने के लिए संयम मार्ग अपनाने की प्रेरणा लेते हैं। अक्षत गहुली से स्वास्तिक बनाना संसार का प्रतीक है और हमें इसको त्यागने के लिए ज्ञान दर्शन चरित्र को जीवन में आत्मसात करना चाहिए आराधना कर साधन सिद्ध करनी चाहिए और सिद्ध शिला पर जाने का लक्ष्य पूरा करने का प्रयास करना चाहिए तभी हमारे जीवन का कल्याण हो सकता है। भगवान पार्श्वनाथ का मोक्ष कल्याणक हमें ज्ञान दर्शन चरित्र को जीवन में आत्मसात करने की प्रेरणा देता है। मनुष्य हो या पशु या कोई भी जीव जंतु सभी की नाभि केंद्र में स्थापित रहती है जब भी मनुष्य का पेट में कोई रोग होता है तो नाभि पर ही चुनाव या सरसों का तेल लगाया जाता है इसलिए हमें नाभि कमल की पूजा करना चाहिए तभी हमारा कल्याण हो सकता है जो तत्व के उपदेश है भगवान पारसनाथ के 9 अंगों की पूजा हाथ जोड़कर करना चाहिए तभी हमारे जीवन में सुख शांति की स्थापना हो सकती है। गुरु या भगवान के मंदिर में खाली हाथ नहीं जाना चाहिए। नैवेद्य गन्ने व फल का भोग लगाया गया था इसलिए ईश्वाकु वंश कहलाए। संसार में खाते हैं संसार में छोड़ देना है तभी हमारे जीवन का कल्याण हो सकता है। मन में त्याग की भावना धीरे-धीरे विकसित होना चाहिए। हमारे संसार के कपड़े पहनने के 40 डिजाइन है। हमारे पास लेकिन भगवान की पूजा करने के लिए हमारे पास एक जोड़ी भी सही ढंग की नहीं होती है हमें चिंतन करना चाहिए कि हम किधर जा रहे हैं हमें किधर जाना चाहिए। आचार्य भगवंत श्री विजय प्रशमेश प्रभ सूरीश्वरजी मसा एवं मुनिराज श्री नीति प्रभ विजयजी मसा आदि ठाणा 2 एवं साध्वी जी श्री श्रुतवर्धना श्रीजी मसा एवं साध्वी जी श्री विरति प्रिया श्रीजी मसा आदि ठाणा 9 का का चातुर्मास में सानिध्य प्राप्त हो रहा है ।आचार्य श्री के प्रवचन जैन भवन में सुबह 9 बजे होंगे , । |
भगवान पार्श्वनाथ का मोक्ष कल्याणक उत्सव मनाया,रथ यात्रा निकालकर चढ़ाया निर्वाण का लड्डू
नीमच। सुबह 9 बजे भगवान पार्श्वनाथ के मोक्ष कल्याणक महोत्सव के उपलक्ष्य में निवार्ण के लाडू की भव्य रथ यात्रा निकाली गई। रथ यात्रा मिडिल स्कूल मैदान जैन भवन से प्रारंभ होकर नगर के प्रमुख मार्ग से होती हुई पुस्तक बाजार स्थित भीडभंजन पार्श्वनाथ मंदिर पर पहुंची। जहां मंदिर में भगवान के दर्शन कर गुरु वंदना की गई। रथ यात्रा में सबसे आगे बैंड बाजे पर भगवान पारसनाथ के भजन कीर्तन की श्वर लहरिया बिखर रही थी। उसके साथ ही समाजजन सफेद परिधानों में चल रहे थे। उसके साथ ही बग्गी में निवार्ण का लाड्डू विराजित किया गया था जिसमें कोठारी परिवार के अख्खे सिंह कोठारी सहित परिवारजन विराजित थे ।इसके साथ ही महिलाएं पार्श्वनाथ की लावण्या गाती हुई चल रही थी। सभी समाज जन उत्साह के साथ नृत्य की मस्ती में झूम रहे थे। नगर के पुस्तक बाजार स्थित भीडभंजन पार्श्वनाथ मंदिर पर 23 वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ के मोक्ष कल्याणक के अवसर पर विद्वान विधानाचार्य की उपस्थिति में पार्श्वनाथ विधान की पूजन कराई गई इस अवसर पर आचार्य ने भगवान पारसनाथ के उपसर्ग और प्रकाश डाला। मोक्ष के लड्डू के लाभार्थी कोठारी परिवार रहे। इस अवसर पर जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर के निमित्त लड्डू कोठारी परिवार द्वारा चढ़ाए गए। इस अवसर पर श्रद्धालु भक्तों द्वारा दीपक प्रज्वलित किया गया ।पूजा अर्चना की गई आरती के बाद प्रसाद वितरण किया गया।मंदिर में श्रद्धालु भक्तों द्वारा सामूहिक गुरु वंदना की गई। भगवान पार्श्वनाथ की जय घोष लगाई गई ।वैदिक मंत्र उच्चारण के साथ निवार्ण का लाडू चढ़ाया गया हमारे जीवन में दया का भाव रहे इसकी प्रार्थना की गई। मंदिर में श्री संघ ट्रस्ट अध्यक्ष अनिल नागौरी, सचिव मनीष कोठारी सहित बड़ी संख्या में समाज जन उपस्थित थे।इस अवसर पर आचार्य प्रशमेश प्रभ सुरीश्वर जी महाराज ने श्री जैन श्वेतांबर भीड भंजन मंदिर मंडल ट्रस्ट पुस्तक बाजार नीमच के तत्वाधान में जैन भवन मेंआयोजित चातुर्मास अमृत प्रवचन श्रृंखला की धर्म सभा में कहा कि परमात्मा को फल चढ़कर फल का त्याग करते हैं और संसार को त्यागने के लिए संयम मार्ग अपनाने की प्रेरणा लेते हैं। अक्षत गहुली से स्वास्तिक बनाना संसार का प्रतीक है और हमें इसको त्यागने के लिए ज्ञान दर्शन चरित्र को जीवन में आत्मसात करना चाहिए आराधना कर साधन सिद्ध करनी चाहिए और सिद्ध शिला पर जाने का लक्ष्य पूरा करने का प्रयास करना चाहिए तभी हमारे जीवन का कल्याण हो सकता है। भगवान पार्श्वनाथ का मोक्ष कल्याणक हमें ज्ञान दर्शन चरित्र को जीवन में आत्मसात करने की प्रेरणा देता है।
मनुष्य हो या पशु या कोई भी जीव जंतु सभी की नाभि केंद्र में स्थापित रहती है जब भी मनुष्य का पेट में कोई रोग होता है तो नाभि पर ही चुनाव या सरसों का तेल लगाया जाता है इसलिए हमें नाभि कमल की पूजा करना चाहिए तभी हमारा कल्याण हो सकता है जो तत्व के उपदेश है भगवान पारसनाथ के 9 अंगों की पूजा हाथ जोड़कर करना चाहिए तभी हमारे जीवन में सुख शांति की स्थापना हो सकती है। गुरु या भगवान के मंदिर में खाली हाथ नहीं जाना चाहिए। नैवेद्य गन्ने व फल का भोग लगाया गया था इसलिए ईश्वाकु वंश कहलाए। संसार में खाते हैं संसार में छोड़ देना है तभी हमारे जीवन का कल्याण हो सकता है। मन में त्याग की भावना धीरे-धीरे विकसित होना चाहिए। हमारे संसार के कपड़े पहनने के 40 डिजाइन है। हमारे पास लेकिन भगवान की पूजा करने के लिए हमारे पास एक जोड़ी भी सही ढंग की नहीं होती है हमें चिंतन करना चाहिए कि हम किधर जा रहे हैं हमें किधर जाना चाहिए। आचार्य भगवंत श्री विजय प्रशमेश प्रभ सूरीश्वरजी मसा एवं मुनिराज श्री नीति प्रभ विजयजी मसा आदि ठाणा 2 एवं साध्वी जी श्री श्रुतवर्धना श्रीजी मसा एवं साध्वी जी श्री विरति प्रिया श्रीजी मसा आदि ठाणा 9 का का चातुर्मास में सानिध्य प्राप्त हो रहा है ।आचार्य श्री के प्रवचन जैन भवन में सुबह 9 बजे होंगे , ।