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साध्वी सौम्या दर्शना जी आदि ठाना 4 की महावीर जिनालय विकास नगर में चातुर्मास धर्म श्रृंखला प्रवाहित विकास नगर, नीमच स्थित महावीर जिनालय आराधना भवन पर 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ के मोक्ष कल्याणक के अवसर पर विद्वान पंडितों की उपस्थिति में पार्श्वनाथ विधान की पूजन कराई गई। इस दौरान विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया इस अवसर पर साध्वी सौम्या दर्शना श्री जी महाराज साहब ने भगवान पार्श्वनाथ के उपसर्ग पर प्रकाश डाला। मोक्ष कल्याणक के लड्डू समाज जनों ने थाली में सजा कर चढ़ाएं। इस अवसर पर जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर के निमित 23.लाड्डु श्रावकों द्वारा चढ़ाए गए । निवार्ण लड्डू का जुलूस विकास नगर महावीर जिनालय से पूजा अर्चना के बाद सुबह 6:30 बजे प्रारंभ हुआ जुलूस नगर के प्रमुख मार्ग से होता हुआ पुस्तक बाजार स्थित भीडभंजन पार्श्वनाथ मंदिर पर पहुंचा जहां निवार्ण का लड्डू भक्तों द्वारा चढ़ाया गया। इस अवसर पर साध्वी सौम्या दर्शना श्री जी महाराज साहब ने श्री जैन श्वेतांबर महावीर जिनालय ट्रस्ट एवं चातुर्मास समिति विकास नगर के तत्वाधान में साध्वी सौम्या दर्शना श्री जी महाराज साहब आदि ठाणा 4के चातुर्मास में आयोजित धर्म सभा में उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि भगवान पार्श्वनाथ का मोक्ष कल्याणक हमें यह शिक्षा देता है कि शरीर प्रभावशाली नहीं है आत्मा शक्तिशाली है। शरीर के माध्यम से ही आत्मा की अनुभुति करना चाहिए ।सामायिक प्रवचन प्रतिक्रमण में नियमित रूप से सहभागिता बढ़ाना चाहिए। तत्व ज्ञान सुनने के बाद उसका क्रियान्वन जीवन में करना चाहिए नहीं तो हम पुनरावर्तन कर रहे हैं जबकि वास्तव में हमें हमारे जीवन में परिवर्तन होना चाहिए । तभी जीवन में आत्मा का कल्याण हो सकता है। साध्वी अक्षय दर्शना श्री जी महाराज साहब ने कहा कि प्रत्येक धार्मिक गतिविधि के प्रति हमारे मन में जिज्ञासा होनी चाहिए कि इसका लॉजिक क्या है। भगवान पार्श्वनाथ के निवार्ण का कल्याण के लड्डू को मोदक का यह लड्डू क्यों कहते हैं मोदक शब्द मृद धातु से निकला है मृद का अर्थ प्रसन्नता होता है। हमें जीवन के आठ कर्मों से मुक्त होना सिद्ध बुद्ध बनकर हमें अपनी आत्मा का कल्याण करना चाहिए ।यही शिक्षा हमें पार्श्वनाथ मोक्ष कल्याणक से मिलती है। आज भाई-भाई में विवाद होता है लेकिन प्राचीन काल में ऋषि मुनियों में कभी कोई विवाद नहीं होता था जिस प्रकार सोना तप कर कुंदन बनता है उसी प्रकार आत्मा तप कर मोक्ष की ओर आगे बढ़ती है। चातुर्मास धर्म सभा में महावीर जिनालय ट्रस्ट अध्यक्ष राकेश जैन आंचलिया ,चातुर्मास समिति संयोजक राजमल छाजेड़, एवं सचिव राजेंद्र बंबोरिया सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित थे। |
साध्वी सौम्या दर्शना जी आदि ठाना 4 की महावीर जिनालय विकास नगर में चातुर्मास धर्म श्रृंखला प्रवाहित
विकास नगर, नीमच स्थित महावीर जिनालय आराधना भवन पर 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ के मोक्ष कल्याणक के अवसर पर विद्वान पंडितों की उपस्थिति में पार्श्वनाथ विधान की पूजन कराई गई। इस दौरान विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया इस अवसर पर साध्वी सौम्या दर्शना श्री जी महाराज साहब ने भगवान पार्श्वनाथ के उपसर्ग पर प्रकाश डाला। मोक्ष कल्याणक के लड्डू समाज जनों ने थाली में सजा कर चढ़ाएं। इस अवसर पर जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर के निमित 23.लाड्डु श्रावकों द्वारा चढ़ाए गए । निवार्ण लड्डू का जुलूस विकास नगर महावीर जिनालय से पूजा अर्चना के बाद सुबह 6:30 बजे प्रारंभ हुआ जुलूस नगर के प्रमुख मार्ग से होता हुआ पुस्तक बाजार स्थित भीडभंजन पार्श्वनाथ मंदिर पर पहुंचा जहां निवार्ण का लड्डू भक्तों द्वारा चढ़ाया गया।
इस अवसर पर साध्वी सौम्या दर्शना श्री जी महाराज साहब ने श्री जैन श्वेतांबर महावीर जिनालय ट्रस्ट एवं चातुर्मास समिति विकास नगर के तत्वाधान में साध्वी सौम्या दर्शना श्री जी महाराज साहब आदि ठाणा 4के चातुर्मास में आयोजित धर्म सभा में उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि भगवान पार्श्वनाथ का मोक्ष कल्याणक हमें यह शिक्षा देता है कि शरीर प्रभावशाली नहीं है आत्मा शक्तिशाली है। शरीर के माध्यम से ही आत्मा की अनुभुति करना चाहिए ।सामायिक प्रवचन प्रतिक्रमण में नियमित रूप से सहभागिता बढ़ाना चाहिए। तत्व ज्ञान सुनने के बाद उसका क्रियान्वन जीवन में करना चाहिए नहीं तो हम पुनरावर्तन कर रहे हैं जबकि वास्तव में हमें हमारे जीवन में परिवर्तन होना चाहिए । तभी जीवन में आत्मा का कल्याण हो सकता है।
साध्वी अक्षय दर्शना श्री जी महाराज साहब ने कहा कि प्रत्येक धार्मिक गतिविधि के प्रति हमारे मन में जिज्ञासा होनी चाहिए कि इसका लॉजिक क्या है। भगवान पार्श्वनाथ के निवार्ण का कल्याण के लड्डू को मोदक का यह लड्डू क्यों कहते हैं मोदक शब्द मृद धातु से निकला है मृद का अर्थ प्रसन्नता होता है। हमें जीवन के आठ कर्मों से मुक्त होना सिद्ध बुद्ध बनकर हमें अपनी आत्मा का कल्याण करना चाहिए ।यही शिक्षा हमें पार्श्वनाथ मोक्ष कल्याणक से मिलती है। आज भाई-भाई में विवाद होता है लेकिन प्राचीन काल में ऋषि मुनियों में कभी कोई विवाद नहीं होता था जिस प्रकार सोना तप कर कुंदन बनता है उसी प्रकार आत्मा तप कर मोक्ष की ओर आगे बढ़ती है। चातुर्मास धर्म सभा में महावीर जिनालय ट्रस्ट अध्यक्ष राकेश जैन आंचलिया ,चातुर्मास समिति संयोजक राजमल छाजेड़, एवं सचिव राजेंद्र बंबोरिया सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित थे।