|
|
क्रोध करने से सामने वाले का कम अपना नुकसान ज्यादा होता है। क्रोध आग में घी का काम करता है इसलिए हमेशा क्रोध करने से बचना चाहिए और सभी से विनम्रता पूर्वक धेर्य के साथ बात करना चाहिए। क्रोध के त्याग बिना शांति का मार्ग प्रशस्त नहीं हो सकता है। परमात्मा की वाणी और उपदेश अपराधी के हृदय को भी परिवर्तन कर सकते हैं।क्रोध के त्याग बिना आत्म शांति का मार्ग नहीं मिलता हैं। यह बात आचार्य प्रशमेश प्रभ सुरीश्वर जी महाराज ने कही। वे श्री जैन श्वेतांबर भीड भंजन मंदिर मंडल ट्रस्ट पुस्तक बाजार नीमच के तत्वाधान में जैन भवन मेंआयोजित चातुर्मास अमृत प्रवचन श्रृंखला की धर्म सभा में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि क्रोध के कारण व्यक्ति सही गलत का आकलन नहीं कर पाता है और अपना तथा दूसरों का नुकसान कर देता है। परमात्मा की वाणी हमें दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान करती है। यदि हम दुख के समय दूसरों की सहायता करते हैं हमारे जीवन में कभी दुख नहीं आने देता है और आ भी जाए तो परमात्मा हमारी सहायता करते हैं।आचार्य भगवंत श्री विजय प्रशमेश प्रभ सूरीश्वरजी मसा एवं मुनिराज श्री नीति प्रभ विजयजी मसा आदि ठाणा 2 एवं साध्वी जी श्री श्रुतवर्धना श्रीजी मसा एवं साध्वी जी श्री विरति प्रिया श्रीजी मसा आदि ठाणा 9 का का चातुर्मास में सानिध्य प्राप्त हो रहा है ।आचार्य श्री के प्रवचन जैन भवन में सुबह 9 बजे होंगे |
क्रोध करने से सामने वाले का कम अपना नुकसान ज्यादा होता है। क्रोध आग में घी का काम करता है इसलिए हमेशा क्रोध करने से बचना चाहिए और सभी से विनम्रता पूर्वक धेर्य के साथ बात करना चाहिए। क्रोध के त्याग बिना शांति का मार्ग प्रशस्त नहीं हो सकता है। परमात्मा की वाणी और उपदेश अपराधी के हृदय को भी परिवर्तन कर सकते हैं।क्रोध के त्याग बिना आत्म शांति का मार्ग नहीं मिलता हैं।
यह बात आचार्य प्रशमेश प्रभ सुरीश्वर जी महाराज ने कही। वे श्री जैन श्वेतांबर भीड भंजन मंदिर मंडल ट्रस्ट पुस्तक बाजार नीमच के तत्वाधान में जैन भवन मेंआयोजित चातुर्मास अमृत प्रवचन श्रृंखला की धर्म सभा में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि क्रोध के कारण व्यक्ति सही गलत का आकलन नहीं कर पाता है और अपना तथा दूसरों का नुकसान कर देता है। परमात्मा की वाणी हमें दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान करती है। यदि हम दुख के समय दूसरों की सहायता करते हैं हमारे जीवन में कभी दुख नहीं आने देता है और आ भी जाए तो परमात्मा हमारी सहायता करते हैं।आचार्य भगवंत श्री विजय प्रशमेश प्रभ सूरीश्वरजी मसा एवं मुनिराज श्री नीति प्रभ विजयजी मसा आदि ठाणा 2 एवं साध्वी जी श्री श्रुतवर्धना श्रीजी मसा एवं साध्वी जी श्री विरति प्रिया श्रीजी मसा आदि ठाणा 9 का का चातुर्मास में सानिध्य प्राप्त हो रहा है ।आचार्य श्री के प्रवचन जैन भवन में सुबह 9 बजे होंगे