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भगवान विष्णु के अवता |
(मुकेश राठौर रामपुरा)
प्रति वर्ष अनुसार इस वर्ष भी हिंदू कैलेंडर के अनुसार भादवा माह की शुक्ल पक्ष की द्वितीय को भगवान विष्णु के लोक अवतार जन-जन की आस्था के प्रतीक लोक देवता बाबा रामदेव का जन्मोत्सव रामपुरा अंचल में बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया गया इसको लेकर प्रातः काल से ही मंदिर में दर्शन के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ना प्रारंभ हो गई प्रातः 5:00 बजे से ही जैसे ही मंदिर के द्वार खुले सर्वप्रथम स्नान पूजा उसके बाद बाबा को माखन मिश्री का भोग लगाकर महा आरती की गई तत्पश्चात गर्भ ग्रह को भक्तों के लिए खोला गया जहां दिनभर भक्तजन अपने इष्ट देव बाबा रामदेव को आस्था के पुष्प चढ़ाते नजर आए बाबा के दर्शनों का सिलसिला जो प्रातः काल से प्रारंभ हुआ वह देर रात तक चलता रहा इस दौरान मंदिर समिति के साथ ही पुलिस प्रशासन की सेवाएं भी प्रशंसनीय रही रामपुरा तहसील मुख्यालय के लाला तलाई पर स्थित बाबा रामदेव मंदिर पर दिन भर आस्था से ओतप्रोत पूजन अर्चना का दौर चलता रहा इस अवसर पर मंदिर समिति द्वारा भक्त जनों के लिए एक दिवसीय भंडारे का आयोजन किया गया रामपुरा तहसील मुख्यालय समीप विभिन्न गांव में रामदेवरा पैदल यात्रा को लेकर चलित भंडारे भी आज समापन के अवसर पर चल समारोह के माध्यम से लाला तलाई स्थित रामदेव मंदिर पर पहुंचे इस दौरान चल समारोह में विभिन्न गांव से ग्रामीण जन भक्तजन बाबा के भजनों पर थिरकते हुए बाबा के दर्शन के लिए पहुंचे
भगवान विष्णु के अवता
र लोक देवता बाबा रामदेव जी का अवतरण विक्रम संवत 1409 ईस्वी मे रुणिचा के शासक अजमाल जी के घर हुआ था इनकी माता का नाम मीणादेबाई था इनके बड़े भाई का नाम वीरमदेव था तोमर वंश राजपूत वंश में अवतार लेने वाले बाबा रामदेव जी के पिता अजमाल जी निसंतान थे एवं भगवान विष्णु के परम भक्त थे इनका विवाह नेतल रानी के साथ हुआ था बाबा रामदेव जी सिद्ध संत सुरवीर चमत्कारी कर्तव्य परायण जनता के रक्षक एवं परम गो सेवक के रूप में प्रसिद्ध हुए रामदेव जी ने जातीय व्यवस्था का विरोध करते हुए सामाजिक समरसता का संदेश दिया रामदेव जी ने जीव मात्र के प्रति दया गुरु महिमा पुरुषार्थ एवं मानव के गौरव को महत्व दिया वह समाज सुधारक थे समाज में अछूत कहे जाने वाले वर्ग के साथ बैठकर भोजन करना दलित डाला बाई का बहन के रूप में पोषण करना धार्मिक आडंबर का विरोध करना तथा हिंदू मुस्लिम एकता पर बल देना आपकी इसी विशेषता के कारण मालवा मेवाड़ सहित समस्त भारत में बाबा रामदेव जी को रामसापीर के नाम से भी जाना जाता है दीन दुखियों की सेवा करते हुए जन-जन की आस्था के प्रतीक बाबा रामदेव जी विक्रम संवत 1442 में रुणिचा गांव मैं जिंदा समाधि ली तभी से रुणिचा गांव रामदेवरा के नाम से पूरे भारत में विख्यात हुआ भादवा माह में लाखों-करोड़ों भक्तगण श्रद्धा अनुसार बाबा रामदेव जी के दरबार पहुंचकर अपने मनवांछित फल पाते हैं