|
|
मन्दसौर। अ.भा. साहित्य परिष्ज्ञद मंदसौर इकाई की नूतन वर्ष अभिनंदन काव्य गोष्ठी दशपुर रंगमच के अभय मेहता के मुख्य आतिथ्य, श्री अजय डांगी राजेन्द्र तिवारी, नदंकिशोर राठौर, डॉ. उर्मिला तोमर, चंदा डांगी, नरेन्द्र भावसार, विजय अग्निहोत्री, मनी शामगढ़ वाला, श्यामसुंदर विश्वकर्मा के सानिध्य में सम्पन्न हुई।इस अवसर पर नंदकिशोर राठौर ने कहा कि चेत्र शुक्ल प्रति प्रतिपदा हिन्दू नववर्ष के रूप में मनाया जाता है। जिसके आगमन पर प्रकृति भी अपना श्रृंगार करती है। पेड़ों में नवपल्लव का आगमन पलाश का खिलना, आम्र मंजरी का विकसित होकर कोयल की कूक का आव्हान करना नववर्ष का स्वागत लगता है। ऐसे में कवि हृदय में उपजे मनोभाव कविता का रूप लेते है।इस अवसर पर कवियों ने अपनी नववर्ष की रचनाओं का पाठ किया जिसमें गीतकार नंदकिशोर राठौर नादान ने ‘‘नववर्ष शुभ आगमन, हृदय उठे हिलोर, वंदन करती है धरा, उदित हुई नवभोर’ सुनाई। उर्मिला तोमर ने नववर्ष का स्वागत करती कविता ‘‘धरा ने ओड़ ली धानी चुनर, गगन में भोर जागी है’’, नरेन्द्र भावसार ने ‘‘सुनो-सुनो सुने जनता’’ के माध्यम से नेताओं पर व्यंग कसा साथ ही ‘‘जमीन के लिये जमीं में मिल गये जाने कितने’’ सुनाकर वर्तमान में चल रहे युद्ध की विभिषाका एवं दुष्परिणामों पर इशारा किया। मनी शामगढ़ वाला ने कविता ‘‘पायल बोली पांव से‘‘ सुंदर दोहो के माध्यम से नववर्ष का स्वागत किया।अभय मेहता ने श्रंृगार कविता ‘‘घूमकर सात फेरे, आज हो गये तुम पराये’’ सुनाई। अजय डांगी ने विश्व युद्ध पर कविता ‘‘वो जमाना मोहब्बत था, अब है न मान है न इमान है‘‘ सुनाई। चंदा डांगी ने गांव की परिस्थितियों को चित्रित करते हुए कविता ‘‘गांव में नहीं थी कमाई, पर मिलते रहते थे भाई-भाई’’ सुनाई। विजय अग्निहोत्री ने ‘‘गुड़ी पड़वा याने विजय पताका’’ की कविता सुनाई। राजेन्द्र तिवारी ने नववर्ष का स्वागत करते हुए ‘‘स्वागतम् संवत्सर’’ गीत सुनाया।कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती वंदना से हुआ। कार्यक्रम का संचालन नंदकिशोर राठौर ने किया एवं आभार नरेन्द्र भावसार ने माना। |
मन्दसौर। अ.भा. साहित्य परिष्ज्ञद मंदसौर इकाई की नूतन वर्ष अभिनंदन काव्य गोष्ठी दशपुर रंगमच के अभय मेहता के मुख्य आतिथ्य, श्री अजय डांगी राजेन्द्र तिवारी, नदंकिशोर राठौर, डॉ. उर्मिला तोमर, चंदा डांगी, नरेन्द्र भावसार, विजय अग्निहोत्री, मनी शामगढ़ वाला, श्यामसुंदर विश्वकर्मा के सानिध्य में सम्पन्न हुई।इस अवसर पर नंदकिशोर राठौर ने कहा कि चेत्र शुक्ल प्रति प्रतिपदा हिन्दू नववर्ष के रूप में मनाया जाता है। जिसके आगमन पर प्रकृति भी अपना श्रृंगार करती है। पेड़ों में नवपल्लव का आगमन पलाश का खिलना, आम्र मंजरी का विकसित होकर कोयल की कूक का आव्हान करना नववर्ष का स्वागत लगता है। ऐसे में कवि हृदय में उपजे मनोभाव कविता का रूप लेते है।इस अवसर पर कवियों ने अपनी नववर्ष की रचनाओं का पाठ किया जिसमें गीतकार नंदकिशोर राठौर नादान ने ‘‘नववर्ष शुभ आगमन, हृदय उठे हिलोर, वंदन करती है धरा, उदित हुई नवभोर’ सुनाई। उर्मिला तोमर ने नववर्ष का स्वागत करती कविता ‘‘धरा ने ओड़ ली धानी चुनर, गगन में भोर जागी है’’, नरेन्द्र भावसार ने ‘‘सुनो-सुनो सुने जनता’’ के माध्यम से नेताओं पर व्यंग कसा साथ ही ‘‘जमीन के लिये जमीं में मिल गये जाने कितने’’ सुनाकर वर्तमान में चल रहे युद्ध की विभिषाका एवं दुष्परिणामों पर इशारा किया। मनी शामगढ़ वाला ने कविता ‘‘पायल बोली पांव से‘‘ सुंदर दोहो के माध्यम से नववर्ष का स्वागत किया।अभय मेहता ने श्रंृगार कविता ‘‘घूमकर सात फेरे, आज हो गये तुम पराये’’ सुनाई। अजय डांगी ने विश्व युद्ध पर कविता ‘‘वो जमाना मोहब्बत था, अब है न मान है न इमान है‘‘ सुनाई। चंदा डांगी ने गांव की परिस्थितियों को चित्रित करते हुए कविता ‘‘गांव में नहीं थी कमाई, पर मिलते रहते थे भाई-भाई’’ सुनाई। विजय अग्निहोत्री ने ‘‘गुड़ी पड़वा याने विजय पताका’’ की कविता सुनाई। राजेन्द्र तिवारी ने नववर्ष का स्वागत करते हुए ‘‘स्वागतम् संवत्सर’’ गीत सुनाया।कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती वंदना से हुआ। कार्यक्रम का संचालन नंदकिशोर राठौर ने किया एवं आभार नरेन्द्र भावसार ने माना।
नंदकिशोर राठौर