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  • शहर : मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव का विशेष लेख

    NAI VIDHA   - नीमच
    शहर
    शहर   - नीमच[18-03-2026]
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  • *नव संवत्सर पर एमपी का नया संकल्प...किसान, पानी और प्रगति*
    (डॉ. मोहन यादव-विभूति फीचर्स)
                चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से प्रारंभ होने वाला नवसंवत्सर हमारी सांस्कृतिक चेतना, वैज्ञानिक दृष्टि और प्राकृतिक जीवन पद्धति का प्रतीक है। इस वर्ष विक्रम संवत् 2083 का शुभारंभ हुआ है। यह मध्यप्रदेश के लिए गर्व और गौरव का विषय है कि भारतीय कालगणना की गौरवशाली परंपरा उज्जयिनी से प्रारंभ हुई है     सम्राट विक्रमादित्य के राज्याभिषेक से आरंभ हुआ विक्रम संवत् भारतीय संस्कृति की चेतना और राष्ट्र की अस्मिता का प्रतीक है। सम्राट विक्रमादित्य न्यायप्रियता, पराक्रम, धैर्य, ज्ञानशीलता और सुशासन के आदर्श हैं। विदेशी आक्रांताओं को पराजित कर उन्होंने राष्ट्र की रक्षा और भारतीय संस्कृति के गौरव को प्रतिष्ठित किया। उनके शासनकाल में सुशासन की आदर्श परंपराएं स्थापित हुईं। उन्होंने न्याय और नीति के जो आदर्श स्थापित किए, वे आज भी शासन और प्रशासन के लिए प्रेरणास्रोत हैं।विक्रमादित्य के सुशासन की परंपरा का उल्लेख ‘सिंहासन बत्तीसी’ की कथाओं में मिलता है। यह उस आदर्श शासन-व्यवस्था का प्रमाण है जिसमें योग्य मंत्रियों, विद्वानों और नीति-निपुण व्यक्तियों के सहयोग से राज्य संचालित किया जाता था। सम्राट विक्रमादित्य ने जिस तरह ज्ञान, संस्कृति और प्रशासनिक व्यवस्था को विकसित किया, वह भारतीय राज्य परंपरा की श्रेष्ठता का प्रतीक है।  ट विक्रमादित्य के व्यक्तित्व और भारतीय ज्ञान परंपरा के विभिन्न आयामों को जन-जन तक पहुँचाने के उद्देश्य से प्रदेश में ‘विक्रमोत्सव-2026’ का आयोजन किया जा रहा है। 12 फरवरी 2026 से 30 जून 2026 तक चलने वाला यह 139 दिवसीय उत्सव दीर्घ आयोजन का कीर्तिमान स्थापित करेगा। इसमें विभिन्न सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और बौद्धिक कार्यक्रमों के माध्यम से सम्राट विक्रमादित्य के जीवन, उनके आदर्श और उपलब्धियों को समाज तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है     उज्जयिनी प्राचीन काल से ही भारत की सांस्कृतिक और वैज्ञानिक चेतना का केन्द्र रही है। बाबा महाकाल की पावन नगरी का संबंध कालगणना, खगोल विज्ञान और आध्यात्मिक साधना से रहा है। हमारे पूर्वजों ने हजारों वर्ष पहले ग्रहों की गति और नक्षत्रों की स्थिति का गहन अध्ययन कर जो कालगणना पद्धति विकसित की, वह आज भी विश्व के लिए आश्चर्य का विषय है। उज्जैन की वेधशाला और वैदिक कालगणना हमारी ज्ञान परंपरा का प्रमाण है     हमारे लिए यह प्रसन्नता का विषय है कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में विश्व की पहली विक्रमादित्य वैदिक घड़ी का पुनर्स्थापन किया गया। यह घड़ी भारतीय समय गणना की परंपरा को आधुनिक युग में पुनर्जीवित करने का महत्वपूर्ण प्रयास है। भारतीय नववर्ष प्रकृति के नवोदय का पर्व है। इस समय प्रकृति नवजीवन से समृद्ध होती है,पृथ्वी पर नवचेतना और नवसृजन का संचार होता है। देश भर में मनाए जाने वाले नवसंवत्सर के विभिन्न नाम हैं। कहीं इसे गुड़ी पड़वा, कहीं उगादि, कहीं चैती चांद और कहीं नवरोज के रूप में मनाया जाता है। इसी दिन से चैत्र नवरात्र का भी शुभारंभ होता है। नवरात्र के नौ दिन साधना, आत्मशुद्धि और शक्ति उपासना का अवसर है। भारतीय जीवन पद्धति में पर्व और परंपराएं व्यक्ति और समाज के समग्र विकास का मार्ग प्रशस्त करती हैं।मध्यप्रदेश में नवसंवत्सर का आयोजन विकास और जनकल्याण के नए संकल्पों के साथ किया जा रहा है। नवसृजन के प्राकृतिक उत्सव अवसर पर मुझे यह बताते हुए प्रसन्नता है कि मध्यप्रदेश में यह वर्ष कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। कृषि हमारे प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और किसान अर्थव्यवस्था की आधारशिला है, इसलिए किसानों की आय बढ़ाने, कृषि को लाभकारी बनाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती के लिए अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिये गये हैं। इस वर्ष हमने पहली कृषि कैबिनेट बैठक बड़वानी जिले के भीलट बाबा देवस्थल नागलवाड़ी में की है। इसमें कृषि विकास और कल्याण के लिए 27 हजार 500 करोड़ रुपये की योजनाओं को स्वीकृत किया गया।     कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों को प्रोत्साहित करने, सिंचाई सुविधाओं के विस्तार, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने और कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन के लिए प्रदेश में योजनाएं लागू की गई हैं। हमारा लक्ष्य है कि किसान उत्पादन बढ़ाने के साथ कृषि-आधारित उद्योगों के माध्यम से अतिरिक्त आय अर्जित करें और आत्मनिर्भर बनें।यशस्वी प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन में हम विरासत के साथ विकास मार्ग पर आगे बढ़ रहे हैं। इसी अनुरूप प्रदेश में ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक स्थलों के संरक्षण और विकास पर कार्य किया जा रहा है। ओंकारेश्वर, उज्जैन, मैहर और अन्य प्रमुख तीर्थस्थल आध्यात्मिक पर्यटन स्वरूप में विकसित हो रहे हैं। मुझे यह बताते हुए प्रसन्नता है कि वर्ष 2028 में उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ पर्व के लिए होने वाली समस्त तैयारियां प्रगति पर हैं। इसके साथ ही श्रीराम वनगमन पथ और श्रीकृष्ण पाथेय जैसी योजनाओं के माध्यम से भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा को नई पीढ़ी से जोड़ा जा रहा है।   भारतीय नववर्ष का आयोजन हमें प्रकृति संरक्षण की प्रेरणा देता है। हमारी परंपरा में गुड़ी पड़वा के दिन सूर्योदय से पहले स्वच्छ जल में स्नान करने और सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा है। अर्घ्य देने की परंपरा में जल स्रोतों की पवित्रता और संरक्षण का संदेश है। जल संरक्षण के इसी भाव के साथ मध्यप्रदेश में आज से “जल गंगा संवर्धन अभियान” प्रारंभ किया जा रहा है। नववर्ष प्रतिपदा पर क्षिप्रा तट उज्जैन से प्रारंभ होने वाले इस तीसरे राज्य स्तरीय अभियान में जल संरक्षण की पारंपरिक पद्धतियों और नवीन तकनीकी, नवाचारों के साथ प्रदेश के जल स्रोतों को सुरक्षित किया जायेगा।   मेरा प्रदेशवासियों से आग्रह है कि जल गंगा संवर्धन अभियान को जन आंदोलन बनाएं। प्रकृति के नवसृजन, अवसर पर आज हम विकसित मध्यप्रदेश निर्माण का संकल्प लें। नवचेतना, नवजागृति के साथ आइये हम सब मिलकर प्रदेश के नवकल्याण की ओर बढ़ें और विकसित भारत निर्माण में सहभागी बनें।मुझे विश्वास है कि नव संवत्सर मध्यप्रदेश की प्रगति, समृद्धि और नई उपलब्धियों का वर्ष सिद्ध होगा। आपके सुखी, समृद्ध और आनंदमय जीवन के लिए आप सभी को नव संवत्सर की पुनः हार्दिक मंगलकामनाएं। *(विभूति फीचर्स)* *(लेखक मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री हैं)* 



  • शहर : मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव का विशेष लेख

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    *नव संवत्सर पर एमपी का नया संकल्प...किसान, पानी और प्रगति*
    (डॉ. मोहन यादव-विभूति फीचर्स)
                चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से प्रारंभ होने वाला नवसंवत्सर हमारी सांस्कृतिक चेतना, वैज्ञानिक दृष्टि और प्राकृतिक जीवन पद्धति का प्रतीक है। इस वर्ष विक्रम संवत् 2083 का शुभारंभ हुआ है। यह मध्यप्रदेश के लिए गर्व और गौरव का विषय है कि भारतीय कालगणना की गौरवशाली परंपरा उज्जयिनी से प्रारंभ हुई है     सम्राट विक्रमादित्य के राज्याभिषेक से आरंभ हुआ विक्रम संवत् भारतीय संस्कृति की चेतना और राष्ट्र की अस्मिता का प्रतीक है। सम्राट विक्रमादित्य न्यायप्रियता, पराक्रम, धैर्य, ज्ञानशीलता और सुशासन के आदर्श हैं। विदेशी आक्रांताओं को पराजित कर उन्होंने राष्ट्र की रक्षा और भारतीय संस्कृति के गौरव को प्रतिष्ठित किया। उनके शासनकाल में सुशासन की आदर्श परंपराएं स्थापित हुईं। उन्होंने न्याय और नीति के जो आदर्श स्थापित किए, वे आज भी शासन और प्रशासन के लिए प्रेरणास्रोत हैं।विक्रमादित्य के सुशासन की परंपरा का उल्लेख ‘सिंहासन बत्तीसी’ की कथाओं में मिलता है। यह उस आदर्श शासन-व्यवस्था का प्रमाण है जिसमें योग्य मंत्रियों, विद्वानों और नीति-निपुण व्यक्तियों के सहयोग से राज्य संचालित किया जाता था। सम्राट विक्रमादित्य ने जिस तरह ज्ञान, संस्कृति और प्रशासनिक व्यवस्था को विकसित किया, वह भारतीय राज्य परंपरा की श्रेष्ठता का प्रतीक है।  ट विक्रमादित्य के व्यक्तित्व और भारतीय ज्ञान परंपरा के विभिन्न आयामों को जन-जन तक पहुँचाने के उद्देश्य से प्रदेश में ‘विक्रमोत्सव-2026’ का आयोजन किया जा रहा है। 12 फरवरी 2026 से 30 जून 2026 तक चलने वाला यह 139 दिवसीय उत्सव दीर्घ आयोजन का कीर्तिमान स्थापित करेगा। इसमें विभिन्न सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और बौद्धिक कार्यक्रमों के माध्यम से सम्राट विक्रमादित्य के जीवन, उनके आदर्श और उपलब्धियों को समाज तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है     उज्जयिनी प्राचीन काल से ही भारत की सांस्कृतिक और वैज्ञानिक चेतना का केन्द्र रही है। बाबा महाकाल की पावन नगरी का संबंध कालगणना, खगोल विज्ञान और आध्यात्मिक साधना से रहा है। हमारे पूर्वजों ने हजारों वर्ष पहले ग्रहों की गति और नक्षत्रों की स्थिति का गहन अध्ययन कर जो कालगणना पद्धति विकसित की, वह आज भी विश्व के लिए आश्चर्य का विषय है। उज्जैन की वेधशाला और वैदिक कालगणना हमारी ज्ञान परंपरा का प्रमाण है     हमारे लिए यह प्रसन्नता का विषय है कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में विश्व की पहली विक्रमादित्य वैदिक घड़ी का पुनर्स्थापन किया गया। यह घड़ी भारतीय समय गणना की परंपरा को आधुनिक युग में पुनर्जीवित करने का महत्वपूर्ण प्रयास है। भारतीय नववर्ष प्रकृति के नवोदय का पर्व है। इस समय प्रकृति नवजीवन से समृद्ध होती है,पृथ्वी पर नवचेतना और नवसृजन का संचार होता है। देश भर में मनाए जाने वाले नवसंवत्सर के विभिन्न नाम हैं। कहीं इसे गुड़ी पड़वा, कहीं उगादि, कहीं चैती चांद और कहीं नवरोज के रूप में मनाया जाता है। इसी दिन से चैत्र नवरात्र का भी शुभारंभ होता है। नवरात्र के नौ दिन साधना, आत्मशुद्धि और शक्ति उपासना का अवसर है। भारतीय जीवन पद्धति में पर्व और परंपराएं व्यक्ति और समाज के समग्र विकास का मार्ग प्रशस्त करती हैं।मध्यप्रदेश में नवसंवत्सर का आयोजन विकास और जनकल्याण के नए संकल्पों के साथ किया जा रहा है। नवसृजन के प्राकृतिक उत्सव अवसर पर मुझे यह बताते हुए प्रसन्नता है कि मध्यप्रदेश में यह वर्ष कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। कृषि हमारे प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और किसान अर्थव्यवस्था की आधारशिला है, इसलिए किसानों की आय बढ़ाने, कृषि को लाभकारी बनाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती के लिए अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिये गये हैं। इस वर्ष हमने पहली कृषि कैबिनेट बैठक बड़वानी जिले के भीलट बाबा देवस्थल नागलवाड़ी में की है। इसमें कृषि विकास और कल्याण के लिए 27 हजार 500 करोड़ रुपये की योजनाओं को स्वीकृत किया गया।     कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों को प्रोत्साहित करने, सिंचाई सुविधाओं के विस्तार, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने और कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन के लिए प्रदेश में योजनाएं लागू की गई हैं। हमारा लक्ष्य है कि किसान उत्पादन बढ़ाने के साथ कृषि-आधारित उद्योगों के माध्यम से अतिरिक्त आय अर्जित करें और आत्मनिर्भर बनें।यशस्वी प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन में हम विरासत के साथ विकास मार्ग पर आगे बढ़ रहे हैं। इसी अनुरूप प्रदेश में ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक स्थलों के संरक्षण और विकास पर कार्य किया जा रहा है। ओंकारेश्वर, उज्जैन, मैहर और अन्य प्रमुख तीर्थस्थल आध्यात्मिक पर्यटन स्वरूप में विकसित हो रहे हैं। मुझे यह बताते हुए प्रसन्नता है कि वर्ष 2028 में उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ पर्व के लिए होने वाली समस्त तैयारियां प्रगति पर हैं। इसके साथ ही श्रीराम वनगमन पथ और श्रीकृष्ण पाथेय जैसी योजनाओं के माध्यम से भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा को नई पीढ़ी से जोड़ा जा रहा है।   भारतीय नववर्ष का आयोजन हमें प्रकृति संरक्षण की प्रेरणा देता है। हमारी परंपरा में गुड़ी पड़वा के दिन सूर्योदय से पहले स्वच्छ जल में स्नान करने और सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा है। अर्घ्य देने की परंपरा में जल स्रोतों की पवित्रता और संरक्षण का संदेश है। जल संरक्षण के इसी भाव के साथ मध्यप्रदेश में आज से “जल गंगा संवर्धन अभियान” प्रारंभ किया जा रहा है। नववर्ष प्रतिपदा पर क्षिप्रा तट उज्जैन से प्रारंभ होने वाले इस तीसरे राज्य स्तरीय अभियान में जल संरक्षण की पारंपरिक पद्धतियों और नवीन तकनीकी, नवाचारों के साथ प्रदेश के जल स्रोतों को सुरक्षित किया जायेगा।   मेरा प्रदेशवासियों से आग्रह है कि जल गंगा संवर्धन अभियान को जन आंदोलन बनाएं। प्रकृति के नवसृजन, अवसर पर आज हम विकसित मध्यप्रदेश निर्माण का संकल्प लें। नवचेतना, नवजागृति के साथ आइये हम सब मिलकर प्रदेश के नवकल्याण की ओर बढ़ें और विकसित 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  • शहर: मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव का विशेष लेख

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  • शहर: मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव का विशेष लेख

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  • शहर: मंडी व्यापारी संघ का होली मिलन समारोह भजन कीर्तन गीत संगीत और सादगी एवं विभिन्न कार्यक्रमों के साथ संपन्न,

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  • शहर: मंडी व्यापारी संघ का होली मिलन समारोह भजन कीर्तन गीत संगीत और सादगी एवं विभिन्न कार्यक्रमों के साथ संपन्न,

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  • शहर: मध्य प्रदेश शिक्षक संघ द्वारा नीमच जिले में मनाया जाएगा आज भारतीय नव वर्ष*

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  • शहर: मध्य प्रदेश शिक्षक संघ द्वारा नीमच जिले में मनाया जाएगा आज भारतीय नव वर्ष*

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  • शहर: शीतला माता मंदिर स्थापना के 10 वर्ष पूर्ण, 22 मार्च को गणपति नगर व इंदिरा नगर क्षेत्र से निकलेगी 125 मीटर लंबी भव्य चुनरी यात्रा

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  • शहर: शीतला माता मंदिर स्थापना के 10 वर्ष पूर्ण, 22 मार्च को गणपति नगर व इंदिरा नगर क्षेत्र से निकलेगी 125 मीटर लंबी भव्य चुनरी यात्रा

    शीतला माता मंदिर स्थापना के 10 वर्ष पूर्ण, 22 मार्च को गणपति नगर व इंदिरा नगर क्षेत्र से निकलेगी 125 मीटर लंबी भव्य चुनरी यात्रा
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  • शहर: करंट से बकरियों की मौत के बाद विधायक कृपलानी की अनुशंसा पर पीड़ितों को मिला मुआवजा

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  • शहर: श्री ओसवाल लोढ़े साथ जैन समाज की सामूहिक गोठ सम्पन्न समाज के वरिष्ठजनों, मेधावी विद्यार्थियों का हुआ सम्मान

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  • शहर: राजस्थान सरकार के निर्देशानुसार राजस्थान दिवस समारोह के अंतर्गत आयोजित स्वच्छता सप्ताह के तहत नगर परिषद निंबाहेड़ा द्वारा बुधवार को जल स्रोतों की विशेष सफाई अभियान चलाया गया।

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  • शहर: राजस्थान सरकार के निर्देशानुसार राजस्थान दिवस समारोह के अंतर्गत आयोजित स्वच्छता सप्ताह के तहत नगर परिषद निंबाहेड़ा द्वारा बुधवार को जल स्रोतों की विशेष सफाई अभियान चलाया गया।

    राजस्थान सरकार के निर्देशानुसार राजस्थान दिवस समारोह के अंतर्गत आयोजित स्वच्छता सप्ताह के तहत नगर परिषद निंबाहेड़ा द्वारा बुधवार को जल स्रोतों की विशेष सफाई अभियान चलाया गया।
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  • शहर: वैष्णव बैरागी समाज की प्रदेश स्तरीय बैठक सम्पन्न, छात्रावास मुक्त कराने व प्रतिमा स्थापना की मांग

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  • शहर: वैष्णव बैरागी समाज की प्रदेश स्तरीय बैठक सम्पन्न, छात्रावास मुक्त कराने व प्रतिमा स्थापना की मांग

    वैष्णव बैरागी समाज की प्रदेश स्तरीय बैठक सम्पन्न, छात्रावास मुक्त कराने व प्रतिमा स्थापना की मांग
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  • शहर: आटा ग्राम में हिंसक वन्य प्राणी तेंदुए ने गाय बछड़े का शिकार किया नागरिकों में दहशत अठाना।

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  • शहर: भूनिया खेड़ी के एनएसएस शिविर में विधिक साक्षरता एवं योग दिवस आयोजित, न्यायाधीश श्री निगवाल ने दी कानूनी जानकारी

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  • शहर: श्री वैष्णव बैरागी समाज चतुः संप्रदाय की प्रदेश स्तरीय बैठक संपन्न, छात्रावास को कब्जा मुक्त कराने और प्रतिमा स्थापना की उठी मांग

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  • शहर: मध्यप्रदेश शिक्षक संघ द्वारा नीमच जिले मे मनाया जाएगा भारतीय नववर्ष-

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  • शहर: मंदसौर फोटोग्राफर एसोसिएशन ने उत्साहपूर्वक मनाया होली मिलन समारोह

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  • शहर: प्राइवेट स्कूलों की तुलना में सरकारी स्कूल के बच्चे ज्यादा संघर्षशील एवं जीवटता वाले होते हैं? रमेशचन्द्र चन्द्रे

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  • शहर: प्राइवेट स्कूलों की तुलना में सरकारी स्कूल के बच्चे ज्यादा संघर्षशील एवं जीवटता वाले होते हैं? रमेशचन्द्र चन्द्रे

    प्राइवेट स्कूलों की तुलना में सरकारी स्कूल के बच्चे ज्यादा संघर्षशील एवं जीवटता वाले होते हैं? रमेशचन्द्र चन्द्रे
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  • शहर: लदूसा नरेश श्री सांवरिया सेठ के भंडार से निकली 8 लाख से अधिक की दान राशि, विदेशी मुद्रा और चांदी के आभूषण भी हुए प्राप्त

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  • शहर: लदूसा नरेश श्री सांवरिया सेठ के भंडार से निकली 8 लाख से अधिक की दान राशि, विदेशी मुद्रा और चांदी के आभूषण भी हुए प्राप्त

    लदूसा नरेश श्री सांवरिया सेठ के भंडार से निकली 8 लाख से अधिक की दान राशि, विदेशी मुद्रा और चांदी के आभूषण भी हुए प्राप्त
    शहर   - मंदसौर[18-03-2026]
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