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राज्यसभा सांसद व कांग्रेस के नेता विवेक तंखा ने कहा है कि देश में करोड़ों मुकदमे लंबित है और हमारे यहां ब्रिटिश काल से ही स्कूलों की तरह अदालतों में सर्दी और गर्मियों की छुट्टियां होती हैं, यह ठीक नहीं है। उन्होंने देश के कानून मंत्री को सलाह दी है कि अदालतों में छुट्टियों के इस प्रावधान को खत्म किया जाए। वर्तमान में साल भर में सिर्फ 200 दिन ही हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट चलती है जबकि यह भी पुलिस और स्वास्थ्य जैसी निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। इस सेवा में कमी का मतलब मामलों की पेंडेंसी का बढ़ना है ।सांसद विवेक तंखा ने कहा कि कम से कम साल में 300 दिन कोर्ट को चलना चाहिए। जजेस को नियमानुसार जो भी सरकार साल भर में छुट्टियां देती है वह दी जाएं। उसका कोई विरोध नहीं है। लेकिन कोर्ट में समर और विंटर वेकेशन खत्म होने चाहिए। देशभर में 5 करोड़ केस पेंडिंग है छुट्टियों के कारण जहां एक और पेंडेंसी बढ़ रही है वहीं दूसरी और पक्षकारों को भी समय पर न्याय नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने अपनी सलाह प्रधानमंत्री और कानून मंत्री के समक्ष रखी है अब इस पर उन्हें विचार करना चाहिए। ग्वालियर आए राज्यसभा सांसद विवेक तंखा ने कहा की पठान फिल्म का कुछ कतिपय संगठनों द्वारा विरोध किया जा रहा है और फिल्म का बायकाट करने की बात कही जा रही है वह इसका समर्थन नहीं करते हैं यह तरीका एंटीसोशल होता है ।यदि आपको फिल्म कोई सीन पसंद नहीं है तो इसके लिए अपनी आपत्ति सेंसर बोर्ड के समक्ष रखी जा सकती है सेंसर बोर्ड आपत्तिजनक सीन होने पर उसे हटा भी सकता है। लेकिन हम कलाकारों पर कमेंट करेंगे तो फिर यह तय कर पाना मुश्किल होगा कि हम कौन सी फिल्म चलने देंगे और कौन सी फिल्म नहीं चलने देंगे। क्योंकि इसका कोई अंत नहीं है। इससे देश की भी छवि पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि धार्मिक स्वतंत्रता कानून ना तो पहले कोई बड़ी समस्या थी और ना ही अब है इसे सिर्फ पब्लिसिटी के लिए प्रचारित कराया जा रहा है। उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा कि इस तरह के मामले उसे शूट करते हैं इसका चुनाव में भी वह फायदा उठाती है। |
राज्यसभा सांसद व कांग्रेस के नेता विवेक तंखा ने कहा है कि देश में करोड़ों मुकदमे लंबित है और हमारे यहां ब्रिटिश काल से ही स्कूलों की तरह अदालतों में सर्दी और गर्मियों की छुट्टियां होती हैं, यह ठीक नहीं है। उन्होंने देश के कानून मंत्री को सलाह दी है कि अदालतों में छुट्टियों के इस प्रावधान को खत्म किया जाए। वर्तमान में साल भर में सिर्फ 200 दिन ही हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट चलती है जबकि यह भी पुलिस और स्वास्थ्य जैसी निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। इस सेवा में कमी का मतलब मामलों की पेंडेंसी का बढ़ना है ।सांसद विवेक तंखा ने कहा कि कम से कम साल में 300 दिन कोर्ट को चलना चाहिए। जजेस को नियमानुसार जो भी सरकार साल भर में छुट्टियां देती है वह दी जाएं। उसका कोई विरोध नहीं है। लेकिन कोर्ट में समर और विंटर वेकेशन खत्म होने चाहिए। देशभर में 5 करोड़ केस पेंडिंग है छुट्टियों के कारण जहां एक और पेंडेंसी बढ़ रही है वहीं दूसरी और पक्षकारों को भी समय पर न्याय नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने अपनी सलाह प्रधानमंत्री और कानून मंत्री के समक्ष रखी है अब इस पर उन्हें विचार करना चाहिए। ग्वालियर आए राज्यसभा सांसद विवेक तंखा ने कहा की पठान फिल्म का कुछ कतिपय संगठनों द्वारा विरोध किया जा रहा है और फिल्म का बायकाट करने की बात कही जा रही है वह इसका समर्थन नहीं करते हैं यह तरीका एंटीसोशल होता है ।यदि आपको फिल्म कोई सीन पसंद नहीं है तो इसके लिए अपनी आपत्ति सेंसर बोर्ड के समक्ष रखी जा सकती है सेंसर बोर्ड आपत्तिजनक सीन होने पर उसे हटा भी सकता है। लेकिन हम कलाकारों पर कमेंट करेंगे तो फिर यह तय कर पाना मुश्किल होगा कि हम कौन सी फिल्म चलने देंगे और कौन सी फिल्म नहीं चलने देंगे। क्योंकि इसका कोई अंत नहीं है। इससे देश की भी छवि पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि धार्मिक स्वतंत्रता कानून ना तो पहले कोई बड़ी समस्या थी और ना ही अब है इसे सिर्फ पब्लिसिटी के लिए प्रचारित कराया जा रहा है। उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा कि इस तरह के मामले उसे शूट करते हैं इसका चुनाव में भी वह फायदा उठाती है।