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नीमच में आज जैन समाज के लिए एक उत्साहपूर्ण अवसर बना, जब गुमाश्ता नगर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान आगामी चातुर्मास को लेकर महत्वपूर्ण घोषणा की गई। समाजजनों के बीच यह जानकारी साझा की गई कि परम पूज्य साध्वीजी ठाणा-दस का आगामी चातुर्मास इस बार नीमच में होगा।यह निर्णय श्री जैन श्वेताम्बर भीड़भंजन पार्श्वनाथ ट्रस्ट श्रीसंघ के अध्यक्ष अनिल नागोरी के विशेष अनुरोध पर जय बुलाई गई। नीमच जैन समाज के लिए यह गर्व की बात है कि इस ठाणा में नीमच की दो सुपुत्रियां, साध्वी श्री मृदुपूर्णा श्रीजी (पगारिया परिवार) और साध्वी श्री जिन्नांगपूर्णा श्रीजी (छाजेड़ परिवार) भी सम्मिलित हैं।इस ठाणा का नेतृत्व मातृह्दया तपस्वीरत्न श्री अमितगुणा श्रीजी कर रही हैं, जिनकी 96 से अधिक शिष्याएं पूरे जिनशासन की गरिमा बढ़ा रही हैं। उनके आदेश तथा आचार्यदेव श्री नवरत्नसागर सूरीश्वरजी महाराजा के परमप्रिय शिष्यरत्न युवाचार्य श्री विश्वरत्नसागर सूरीश्वरजी महाराज साहेब एवं आचार्य भगवंत श्री मृदुरत्नसागर सूरीश्वरजी महाराज साहेब की आज्ञा से यह निर्णय संभव हुआ।समाज के सूत्रों के अनुसार पौष बदी दशमी के आसपास नीमच श्रीसंघ की एक प्रतिनिधि मंडल भवानीमंडी पहुंचकर साध्वीजी से औपचारिक विनंति करेगा।घोषणा के साथ ही नीमच जैन समाज में हर्ष और आध्यात्मिक उमंग की लहर दौड़ गई। |
नीमच में आज जैन समाज के लिए एक उत्साहपूर्ण अवसर बना, जब गुमाश्ता नगर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान आगामी चातुर्मास को लेकर महत्वपूर्ण घोषणा की गई। समाजजनों के बीच यह जानकारी साझा की गई कि परम पूज्य साध्वीजी ठाणा-दस का आगामी चातुर्मास इस बार नीमच में होगा।यह निर्णय श्री जैन श्वेताम्बर भीड़भंजन पार्श्वनाथ ट्रस्ट श्रीसंघ के अध्यक्ष अनिल नागोरी के विशेष अनुरोध पर जय बुलाई गई। नीमच जैन समाज के लिए यह गर्व की बात है कि इस ठाणा में नीमच की दो सुपुत्रियां, साध्वी श्री मृदुपूर्णा श्रीजी (पगारिया परिवार) और साध्वी श्री जिन्नांगपूर्णा श्रीजी (छाजेड़ परिवार) भी सम्मिलित हैं।इस ठाणा का नेतृत्व मातृह्दया तपस्वीरत्न श्री अमितगुणा श्रीजी कर रही हैं, जिनकी 96 से अधिक शिष्याएं पूरे जिनशासन की गरिमा बढ़ा रही हैं। उनके आदेश तथा आचार्यदेव श्री नवरत्नसागर सूरीश्वरजी महाराजा के परमप्रिय शिष्यरत्न युवाचार्य श्री विश्वरत्नसागर सूरीश्वरजी महाराज साहेब एवं आचार्य भगवंत श्री मृदुरत्नसागर सूरीश्वरजी महाराज साहेब की आज्ञा से यह निर्णय संभव हुआ।समाज के सूत्रों के अनुसार पौष बदी दशमी के आसपास नीमच श्रीसंघ की एक प्रतिनिधि मंडल भवानीमंडी पहुंचकर साध्वीजी से औपचारिक विनंति करेगा।घोषणा के साथ ही नीमच जैन समाज में हर्ष और आध्यात्मिक उमंग की लहर दौड़ गई।