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जावद क्षेत्र में कार्तिक माह में बेमौसम बारिश का दौर लगातार जारी है। इस वर्ष अब तक 49.9 इंच से अधिक वर्षा दर्ज की गई है, जो पिछले साल की 45 इंच से लगभग 4 इंच अधिक है। इस बारिश ने रबी की फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। फसलें जलमग्न, अंकुरण खतरे में- जावद और सिंगोली सहित आसपास के इलाकों में रविवार से शुरू हुई बारिश बुधवार सुबह थमी। हालांकि, कुछ इलाकों में धूप निकलने से किसानों को थोड़ी राहत मिली, लेकिन खेतों में भरा पानी अंकुरित फसलों को गलने और बीज सड़ने के जोखिम में डाल रहा है।किसानों ने अक्टूबर के मध्य तक अफीम, गेहूं, चना और लहसुन की बुवाई पूरी कर ली थी। अफीम काश्तकारों ने बड़ी मेहनत और खर्च से बुवाई की थी, लेकिन अचानक हुई बारिश के कारण खेत जलमग्न हो गए और कई जगह अफीम के पौधे भी गलने लगे। किसानों की चिंता बढ़ी- पिछले खरीफ सीजन में अतिवृष्टि और सोयाबीन फसल की बर्बादी के कारण किसान पहले ही नुकसान झेल चुके थे। अब रबी सीजन की शुरुआत में हुई इस बारिश ने किसानों पर दोहरी मार डाल दी है। खेतों में पानी भरने के कारण ट्रैक्टर और हल चलाना भी मुश्किल हो गया हैकृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अगले 24 घंटों में खेतों से पानी नहीं निकला, तो अंकुरण पूरी तरह नष्ट हो सकता है। उन्होंने किसानों को तत्काल जल निकासी की व्यवस्था करने और दोबारा जुताई से पहले खेत की नमी जांच करने की सलाह दी है। |
जावद क्षेत्र में कार्तिक माह में बेमौसम बारिश का दौर लगातार जारी है। इस वर्ष अब तक 49.9 इंच से अधिक वर्षा दर्ज की गई है, जो पिछले साल की 45 इंच से लगभग 4 इंच अधिक है। इस बारिश ने रबी की फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है।
फसलें जलमग्न, अंकुरण खतरे में-
जावद और सिंगोली सहित आसपास के इलाकों में रविवार से शुरू हुई बारिश बुधवार सुबह थमी। हालांकि, कुछ इलाकों में धूप निकलने से किसानों को थोड़ी राहत मिली, लेकिन खेतों में भरा पानी अंकुरित फसलों को गलने और बीज सड़ने के जोखिम में डाल रहा है।किसानों ने अक्टूबर के मध्य तक अफीम, गेहूं, चना और लहसुन की बुवाई पूरी कर ली थी। अफीम काश्तकारों ने बड़ी मेहनत और खर्च से बुवाई की थी, लेकिन अचानक हुई बारिश के कारण खेत जलमग्न हो गए और कई जगह अफीम के पौधे भी गलने लगे।
किसानों की चिंता बढ़ी-
पिछले खरीफ सीजन में अतिवृष्टि और सोयाबीन फसल की बर्बादी के कारण किसान पहले ही नुकसान झेल चुके थे। अब रबी सीजन की शुरुआत में हुई इस बारिश ने किसानों पर दोहरी मार डाल दी है। खेतों में पानी भरने के कारण ट्रैक्टर और हल चलाना भी मुश्किल हो गया हैकृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अगले 24 घंटों में खेतों से पानी नहीं निकला, तो अंकुरण पूरी तरह नष्ट हो सकता है। उन्होंने किसानों को तत्काल जल निकासी की व्यवस्था करने और दोबारा जुताई से पहले खेत की नमी जांच करने की सलाह दी है।