नीमच में बढ़ रहा हृदय रोगों का खतरा, पांच साल में 1,850 से अधिक मौतों का दावा

2021 से 2026 के बीच 8,200 से अधिक लोग गंभीर हृदय संबंधी बीमारियों की चपेट में आने का दावा, युवाओं में भी बढ़ रही चिंता उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2021 से 2026 के बीच नीमच जिले में हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट के कारण 1,850 से अधिक लोगों की मौत होने का दावा है। वहीं, 8,200 से अधिक मरीज गंभीर हृदय संबंधी बीमारियों के उपचार के लिए अस्पतालों तक पहुंचे।
युवाओं में भी सामने आ रहे मामले
हृदय रोग को लंबे समय तक बढ़ती उम्र से जोड़कर देखा जाता रहा है, लेकिन अब कम उम्र के लोगों में भी अचानक हृदय संबंधी घटनाओं के मामले सामने आ रहे हैं। 25 से 45 वर्ष आयु वर्ग के लोगों में भी हार्ट अटैक की घटनाओं को लेकर चिंता बढ़ी है। शादी समारोह, जिम या सामान्य दिनचर्या के दौरान अचानक तबीयत बिगड़ने की घटनाएं लोगों का ध्यान इस ओर खींच रही हैं।
आंकड़ों में हृदय संबंधी बीमारी
दिए गए अनुमानित आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2021 में करीब 1,250 मरीज हृदय संबंधी बीमारियों के उपचार के लिए पहुंचे और 280 मौतें दर्ज होने का दावा है। वर्ष 2022 में 1,400 मरीज और 310 मौतें, 2023 में 1,650 मरीज और 360 मौतें, 2024 में 1,800 मरीज और 410 मौतें तथा 2025-26 में 2,100 मरीज और 490 मौतों का आंकड़ा बताया गया है।
इस तरह कुल 8,200 मरीजों और 1,850 मौतों का आंकड़ा सामने रखा गया है। ये आंकड़े उपलब्ध कराए गए विवरण के अनुसार अनुमानित हैं और जिला चिकित्सालय, निजी कार्डियोलॉजी सेंटरों तथा दर्ज प्रकरणों पर आधारित बताए गए हैं।
बदलती जीवनशैली को प्रमुख कारण बताया
हृदय संबंधी समस्याओं के बढ़ते जोखिम के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। इनमें लंबे समय तक मानसिक तनाव, अनियमित दिनचर्या, देर रात तक जागना, अत्यधिक स्क्रीन टाइम, फास्ट फूड और ज्यादा तेल-मसाले वाला भोजन, शारीरिक गतिविधियों की कमी तथा धूम्रपान, तंबाकू और शराब का सेवन शामिल हैं।
इसके अलावा सीने में दर्द या भारीपन को गैस की समस्या मानकर उपचार में देरी करना भी गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है।
विशेषज्ञों ने सावधानी बरतने की दी सलाह
चिकित्सकीय सलाह के अनुसार सीने में भारीपन या दर्द, सांस फूलना, असामान्य पसीना आना अथवा बाएं हाथ या शरीर के अन्य हिस्सों में असामान्य दर्द जैसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए। ऐसे लक्षणों को नजरअंदाज करने के बजाय चिकित्सकीय जांच कराना जरूरी है।
30 वर्ष की उम्र के बाद नियमित स्वास्थ्य जांच, जिसमें डॉक्टर की सलाह के अनुसार ब्लड शुगर और लिपिड प्रोफाइल जैसी जांच शामिल हो सकती हैं, जोखिमों की पहचान में मदद कर सकती है।
दिल को स्वस्थ रखने के लिए जीवनशैली में बदलाव जरूरी
विशेषज्ञ सामान्य रूप से नियमित शारीरिक गतिविधि, संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और तनाव प्रबंधन पर जोर देते हैं। धूम्रपान एवं तंबाकू से दूरी बनाना भी हृदय स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है।
29 सितंबर को विश्व हृदय दिवस के अवसर पर हृदय स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने और लक्षणों को नजरअंदाज न करने का संदेश दिया जा रहा है।