अफीम नीति 2026-27 पर तरुण बाहेती ने उठाए सवाल, बोले—किसानों को राहत के बजाय बढ़ रहीं मुश्किलें

सीपीएस डोडा-चूरा के भंडार पर उठाए सवाल
तरुण बाहेती ने दावा किया कि देश में करीब 12,000 मीट्रिक टन सीपीएस डोडा-चूरा गोदामों में रखा है और इसके निस्तारण तथा प्रसंस्करण को लेकर चुनौतियां हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसी स्थिति में सीपीएस पद्धति का विस्तार करने के बजाय पारंपरिक लूणी-चीरणी पद्धति के किसानों को अधिक अवसर क्यों नहीं दिए गए।
यह आंकड़ा और भंडारण की स्थिति संबंधित सरकारी रिकॉर्ड से सत्यापित किया जाना चाहिए।
पारंपरिक पद्धति के नए पट्टे जारी नहीं होने पर नाराजगी
बाहेती ने आरोप लगाया कि पिछले वर्ष सीपीएस पद्धति में बेहतर उत्पादन देने वाले कुछ किसानों को भविष्य में पारंपरिक चीरा पद्धति के पट्टे मिलने की उम्मीद थी, लेकिन इस बार नए पट्टे जारी नहीं किए गए। उनके अनुसार, इससे उन किसानों में निराशा है जो पारंपरिक पद्धति में खेती करने के इच्छुक हैं।
उन्होंने सरकार से मांग की कि पात्रता के नियमों की समीक्षा कर किसानों को पारंपरिक खेती के अधिक अवसर दिए जाएं।
मार्फिन मानक बढ़ने पर जताई चिंता
बाहेती ने कहा कि गोंद वाली अफीम के लिए मार्फिन उपज का मानक 2026-27 में 4.4 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर रखा गया है, जबकि 2027-28 के लिए 5.9 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि मौसम, सिंचाई, फसल रोग और अन्य परिस्थितियों को ध्यान में रखे बिना किसानों से अधिक उपज की अपेक्षा करना कितना व्यावहारिक है।
उन्होंने मांग की कि किसानों को उन्नत तकनीक, वैज्ञानिक मार्गदर्शन और प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाए, ताकि निर्धारित मानकों को हासिल करने में मदद मिल सके।
अफीम के सरकारी भाव बढ़ाने की मांग
कांग्रेस नेता ने कहा कि बीज, खाद, दवाइयों, सिंचाई और मजदूरी की लागत बढ़ने के बावजूद अफीम के सरकारी भाव में पर्याप्त वृद्धि नहीं की गई है। उन्होंने किसानों को उनकी मेहनत के अनुरूप उचित मूल्य देने की मांग की।
उन्होंने यह भी कहा कि विभिन्न राज्यों और जिलों में वितरित होने वाले नए पट्टों की कुल संख्या से नीमच जिले के किसानों को मिलने वाले वास्तविक लाभ का आकलन अलग से किया जाना चाहिए।
प्राकृतिक आपदा से प्रभावित किसानों को राहत देने की मांग
बाहेती ने आरोप लगाया कि ओलावृष्टि, बेमौसम बारिश और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से फसल खराब होने पर किसानों को पट्टों तथा पात्रता के मामलों में पर्याप्त राहत नहीं मिलती। उन्होंने 1997-98 में प्राकृतिक आपदा से प्रभावित कुछ किसानों के पुराने पट्टों के मामलों की समीक्षा करने और पात्र किसानों को राहत देने की मांग की।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि कम उत्पादन के आधार पर पट्टे होल्ड या रद्द करने की कार्रवाई करते समय प्राकृतिक परिस्थितियों और वास्तविक फसल नुकसान को पर्याप्त महत्व दिया जाता है या नहीं।
सरकार से नीति की समीक्षा की मांग
तरुण बाहेती ने केंद्र सरकार से अफीम नीति की समीक्षा कर किसानों के हित में बदलाव करने की मांग की। उनके अनुसार, पात्रता तय करते समय केवल उत्पादन के आंकड़ों के बजाय प्राकृतिक आपदाओं, खेती की लागत और किसानों की वास्तविक परिस्थितियों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
नोट: इस खबर में नीति को लेकर उठाए गए सवाल और आरोप जिला कांग्रेस अध्यक्ष तरुण बाहेती के बयानों पर आधारित हैं। सीपीएस डोडा-चूरा के भंडार, पुराने पट्टों और अन्य आंकड़ों की स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि अलग से की जानी चाहिए।