आधे-अधूरे भरे जलाशयों से रबी सीजन पर संकट के बादल, लहसुन की महंगी बोवनी के बीच सिंचाई की चिंता

प्रमुख जलाशय पूरी तरह नहीं भर पाए
अठाना क्षेत्र के प्रमुख कनपुरिया जलाशय में इस वर्ष क्षमता की तुलना में करीब आधा पानी ही जमा होने की बात सामने आई है। जलाशय के पूरी तरह नहीं भरने से नहरों के माध्यम से मिलने वाली सिंचाई पर सवाल खड़े हो रहे हैं। इसके साथ ही भूजल स्तर पर भी दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
स्थानीय जानकारी के अनुसार इसी जलाशय परिसर के ट्यूबवेल से करीब 7 किलोमीटर दूर अठाना नगर में दो दिन के अंतराल से पेयजल आपूर्ति की जाती है। ऐसे में जलाशय का कम भरना पेयजल व्यवस्था के लिए भी चिंता का विषय बताया जा रहा है।
सरोदा क्षेत्र का निन्नी जलाशय भी खाली
इसी तरह सरोदा नाला क्षेत्र का निन्नी जलाशय भी पर्याप्त रूप से नहीं भर पाया है। क्षेत्र की नदी-नालियों में भी अब पानी सीमित रह गया है।
सरोदा नाला निवासी रामचंद्र धाकड़ के अनुसार निन्नी जलाशय में पर्याप्त पानी नहीं होने से नहरों के जरिए सिंचाई का पानी मिलने की उम्मीद कमजोर हो गई है।
महंगे लहसुन की बोवनी के बीच पानी की चिंता
जल संकट के बावजूद किसान रबी सीजन में लहसुन की बोवनी की तैयारी में जुटे हैं। बीज, खाद, जुताई और मजदूरी पर किसानों को बड़ी राशि खर्च करनी पड़ रही है।
किसान नंदकिशोर पटेल (हनुमंत्या) और राजेश बंबोरिया (धाकड़ तुंबा) ने बताया कि खेती की लागत पहले ही काफी बढ़ चुकी है। ऐसे में यदि समय पर सिंचाई का पानी नहीं मिला तो किसानों के सामने आर्थिक नुकसान का खतरा रहेगा।
ट्यूबवेल खुदाई पर भी बढ़ सकती है निर्भरता
सिंचाई व्यवस्था के लिए किसान ट्यूबवेल खुदवाने पर भी खर्च कर रहे हैं। हालांकि भूजल स्तर नीचे जाने के कारण नए बोरवेल से पर्याप्त पानी मिलने को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है।
किसानों को यह चिंता भी है कि यदि कम बारिश की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने ट्यूबवेल खनन पर प्रतिबंध लगाया तो सिंचाई के वैकल्पिक साधन सीमित हो सकते हैं।
अच्छी बारिश नहीं हुई तो पेयजल पर भी असर की आशंका
क्षेत्र में यदि आगे पर्याप्त बारिश नहीं होती है तो इसका असर रबी फसलों के साथ-साथ पेयजल व्यवस्था पर भी पड़ सकता है। ऐसे में किसान और ग्रामीण जलाशयों की स्थिति को देखते हुए सिंचाई एवं पेयजल की आगामी कार्ययोजना को लेकर प्रशासन से स्पष्ट व्यवस्था की अपेक्षा कर रहे हैं।
नोट: उपलब्ध स्थानीय रिपोर्ट में जलाशयों की क्षमता और वर्तमान जलभराव के आधिकारिक आंकड़े नहीं दिए गए हैं, इसलिए ऊपर के जलस्तर संबंधी आंकड़े स्थानीय जानकारी के आधार पर ही रखे गए हैं।