|
|
रामकथा संदर्भ में.. इस बार रामनवमी पर वही तिथि, वार,नक्षत्र, करण वही रहेगा जो राम जन्म के समय था, यह एक सुखद सूयोग है: आचार्य श्री रामानुज जोधपुर (निप्र) चेती नवरात्रि के पहले आयोजित राम कथा के आरंभ में मानस मर्मज्ञ आचार्य श्री रामानुज जी ने अपने कथा के आरंभ में कहा कि इस वर्ष रामनवमी का दिन हम सबके लिए बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि राम जन्म के समय जो तिथि, वार, नक्षत्र, कारण था वही सभी सुखद योग रामनवमी के अवसर पर मिल रहे हैं यही सब योग भगवान श्री राम के जन्म के उत्सव पर भी थे। इसलिए यह रामनवमी राम भक्तों के लिए एक विशेष सहयोग लेकर आ रही है इसीलिए चेती नवरात्रि हम सबके लिए महत्वपूर्ण है। यह सुयोग राम जी से जोड़ने का और उनसे मिलने का पवित्र समय है जिसे राम भक्त अपना लाभ उठाएं उक्त विचार अपने उक्त विचार अपने जोधपुर में चल रही राम कथा के प्रथम दिन व्यक्त किया जैसा कि विद्युत है हर राम कथा में आचार्य रामानुज जी किसी एक सूत्रों को लेकर राम कथा को आगे बढ़ते हैं इस कथा में भी आपने कथा जो सकल लोक हितकारी । सोई पूछन चह सैलकुमारी ।। अति आरती पुछहुँ सुरराया । रघुपति कथा कहहुँ करी दाया ।।
प्रस्तुत पंक्तियों को आधार बनाकर प्रारम्भ हुई रामकथा में जोधपुर की व्यासपीठ से आचार्य रामानुज जी ने कहा कि यह कथा लोकहित के लिए है। इसके प्रसंग गूढ़ रहस्यों से भरे हुए हैं, और इन्हें बार-बार सुनने का कारण यही है कि ये जन-जन के लिए आदर्श बनते हैं। आपने कथा प्रसंगों को आस्था का केंद्र बताते हुए कहा कि यह प्रसंग श्रद्धा, आस्था और पूजाभाव का केंद्र है। यही कारण है कि यह कथा जनमानस को जोड़ती है और लोकहितकारी बनती है। प्रायः गुरुदेव का मानस को लेकर यह वक्तव्य होता ही कि गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित यह कथा एक दर्पण भी है। इसमें हम अपने जीवन का मूल्यांकन कर सकते हैं। कथा के प्रसंग हमें आत्मचिंतन का अवसर देते हैं। कथा को गाने और सुनने का तरीका बताया गया है आर्त भाव के साथ। जब कथा को आर्त भाव से सुना या गाया जाता है, तो यह प्रभु श्रीराम के हृदय को द्रवित कर देती है। यही मार्ग राम को पाने का सुगम साधन बन जाता है। वन्दना प्रकरण की कथा को सूक्ष्म में सुनते हुए आचार्य जी ने कहा कि इस मार्ग में गोस्वामी तुलसीदास जी का चरित्र, गुरु वन्दना, संत-असज्जन वन्दना, रामधाम की वन्दना और समस्त देवताओं की वन्दना करते हुए, अंत में हनुमान वन्दना की जाती है , अतः हनुमानजी की वंदना करके आज की कथा को विराम दियागया जोधपुर में चल रही इस कथा का आयोजन समन्वय परिवार एवं जोशी परिवार के सहयोग से किया जा रहा है इस अवसर पर आचार्य श्री रामानुज जी का स्वागत एवं पोथी पूजन नरेंद्र सिंह कच्छावा संजीव माथुर नारायण सिंह चारण रेनू जोशी उमेश पुरोहित महेंद्र भीटी हनुमान जांगिड़ विनोद श्री चांडक जी आदि ने किया कथा के अंत में पोती पूजन पर महा आरती का लाभ नंदलाल व्यास सुरेश व्यास परिवार संजीव माथुर नरेंद्र सिंह कच्छावा गीता के आचार्य नारायण सिंह चंद साहब ने आरती कर पूजा अर्चना की यह कथा 9 दिवस तक जोधपुर में चल रही है!
अशोक झलौया |
रामकथा संदर्भ में..
इस बार रामनवमी पर वही तिथि, वार,नक्षत्र, करण वही रहेगा जो राम जन्म के समय था, यह एक सुखद सूयोग है: आचार्य श्री रामानुज
जोधपुर (निप्र) चेती नवरात्रि के पहले आयोजित राम कथा के आरंभ में मानस मर्मज्ञ आचार्य श्री रामानुज जी ने अपने कथा के आरंभ में कहा कि इस वर्ष रामनवमी का दिन हम सबके लिए बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि राम जन्म के समय जो तिथि, वार, नक्षत्र, कारण था वही सभी सुखद योग रामनवमी के अवसर पर मिल रहे हैं यही सब योग भगवान श्री राम के जन्म के उत्सव पर भी थे। इसलिए यह रामनवमी राम भक्तों के लिए एक विशेष सहयोग लेकर आ रही है इसीलिए चेती नवरात्रि हम सबके लिए महत्वपूर्ण है। यह सुयोग राम जी से जोड़ने का और उनसे मिलने का पवित्र समय है जिसे राम भक्त अपना लाभ उठाएं उक्त विचार अपने उक्त विचार अपने जोधपुर में चल रही राम कथा के प्रथम दिन व्यक्त किया
जैसा कि विद्युत है हर राम कथा में आचार्य रामानुज जी किसी एक सूत्रों को लेकर राम कथा को आगे बढ़ते हैं इस कथा में भी आपने कथा जो सकल लोक हितकारी ।
सोई पूछन चह सैलकुमारी ।।
अति आरती पुछहुँ सुरराया ।
रघुपति कथा कहहुँ करी दाया ।।
प्रस्तुत पंक्तियों को आधार बनाकर प्रारम्भ हुई रामकथा में जोधपुर की व्यासपीठ से आचार्य रामानुज जी ने कहा कि यह कथा लोकहित के लिए है। इसके प्रसंग गूढ़ रहस्यों से भरे हुए हैं, और इन्हें बार-बार सुनने का कारण यही है कि ये जन-जन के लिए आदर्श बनते हैं।
आपने कथा प्रसंगों को आस्था का केंद्र बताते हुए कहा कि यह प्रसंग श्रद्धा, आस्था और पूजाभाव का केंद्र है। यही कारण है कि यह कथा जनमानस को जोड़ती है और लोकहितकारी बनती है। प्रायः गुरुदेव का मानस को लेकर यह वक्तव्य होता ही कि गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित यह कथा एक दर्पण भी है। इसमें हम अपने जीवन का मूल्यांकन कर सकते हैं। कथा के प्रसंग हमें आत्मचिंतन का अवसर देते हैं। कथा को गाने और सुनने का तरीका बताया गया है आर्त भाव के साथ। जब कथा को आर्त भाव से सुना या गाया जाता है, तो यह प्रभु श्रीराम के हृदय को द्रवित कर देती है। यही मार्ग राम को पाने का सुगम साधन बन जाता है। वन्दना प्रकरण की कथा को सूक्ष्म में सुनते हुए आचार्य जी ने कहा कि इस मार्ग में गोस्वामी तुलसीदास जी का चरित्र, गुरु वन्दना, संत-असज्जन वन्दना, रामधाम की वन्दना और समस्त देवताओं की वन्दना करते हुए, अंत में हनुमान वन्दना की जाती है , अतः हनुमानजी की वंदना करके आज की कथा को विराम दियागया
जोधपुर में चल रही इस कथा का आयोजन समन्वय परिवार एवं जोशी परिवार के सहयोग से किया जा रहा है इस अवसर पर आचार्य श्री रामानुज जी का स्वागत एवं पोथी पूजन नरेंद्र सिंह कच्छावा संजीव माथुर नारायण सिंह चारण रेनू जोशी उमेश पुरोहित महेंद्र भीटी हनुमान जांगिड़ विनोद श्री चांडक जी आदि ने किया कथा के अंत में पोती पूजन पर महा आरती का लाभ नंदलाल व्यास सुरेश व्यास परिवार संजीव माथुर नरेंद्र सिंह कच्छावा गीता के आचार्य नारायण सिंह चंद साहब ने आरती कर पूजा अर्चना की यह कथा 9 दिवस तक जोधपुर में चल रही है!
अशोक झलौया