नीमच में आवारा कुत्तों का बढ़ता आतंक, 5 साल में 18,500 से ज्यादा डॉग-बाइट के मामले; रेबीज को लेकर बढ़ी चिंता

📍 नीमच, मध्य प्रदेश
सड़कों पर बढ़ती समस्या
आज 28 सितंबर को विश्व रेबीज दिवस मनाया जा रहा है। इस वर्ष इसकी थीम ‘Stronger Together’ है, जिसमें रेबीज की रोकथाम के लिए समुदाय, स्वास्थ्यकर्मियों, पशु चिकित्सा विशेषज्ञों और प्रशासन के बीच समन्वय पर जोर दिया गया है।
इसी बीच नीमच शहर और आसपास के क्षेत्रों में आवारा कुत्तों के बढ़ते हमलों को लेकर चिंता सामने आई है। शहर के कई इलाकों में राहगीरों, बच्चों और बुजुर्गों पर कुत्तों के हमलों की घटनाएं सामने आने की बात कही गई है।
पांच साल में 18,500 से ज्यादा मामले
स्थानीय स्वास्थ्य विभाग और जिला अस्पताल से उपलब्ध बताए गए आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2021 से 2025 के बीच नीमच जिले में आवारा कुत्तों, सियारों और अन्य जानवरों के हमलों से जुड़े 18,500 से अधिक मामले दर्ज किए गए।
इन मामलों में बड़ी संख्या में लोगों को एंटी-रेबीज उपचार के लिए स्वास्थ्य केंद्रों और अस्पतालों तक पहुंचना पड़ा। रिपोर्ट के अनुसार, औसतन प्रतिदिन कई लोग एंटी-रेबीज इंजेक्शन के लिए स्वास्थ्य संस्थानों में पहुंचते हैं।
बच्चों और बुजुर्गों को लेकर चिंता
शहर के कैंट क्षेत्र, विकास नगर, स्कीम नंबर 9, बघाना और नया बाजार सहित विभिन्न इलाकों में आवारा कुत्तों की मौजूदगी की शिकायतें सामने आती रही हैं। बच्चों के अकेले बाहर खेलने और बुजुर्गों के सुबह की सैर पर निकलने को लेकर परिवारों में चिंता बनी रहती है।
स्थानीय स्तर पर सामने आए कुछ मामलों में बच्चों और बुजुर्गों पर कुत्तों के झुंड द्वारा हमला किए जाने की घटनाएं भी बताई गई हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में सियारों के हमलों की घटनाओं को लेकर भी लोगों ने चिंता जताई है।
रेबीज से बचाव में समय पर उपचार जरूरी
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार संदिग्ध रेबीज संक्रमित जानवर के काटने या खरोंचने के बाद घाव को तुरंत साबुन और पानी से कम से कम 15 मिनट तक अच्छी तरह धोना चाहिए। इसके बाद जल्द से जल्द स्वास्थ्य केंद्र पहुंचकर चिकित्सकीय मूल्यांकन और जरूरत के अनुसार पोस्ट-एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस (PEP) उपचार लेना चाहिए।
WHO के अनुसार रेबीज के लक्षण शुरू होने के बाद बीमारी लगभग हमेशा घातक होती है, लेकिन समय पर उचित PEP उपचार से रेबीज से होने वाली मौत को रोका जा सकता है।
घाव पर घरेलू नुस्खे न आजमाएं
कुत्ते या अन्य संदिग्ध जानवर के काटने अथवा खरोंचने पर घाव पर मिर्च, हल्दी, चूना या अन्य जलन पैदा करने वाले पदार्थ नहीं लगाने चाहिए। WHO घाव को तुरंत साफ करने और चिकित्सकीय सहायता लेने की सलाह देता है।
बच्चों को आवारा जानवरों से दूर रखने, उन्हें जानवरों को छेड़ने या परेशान करने से रोकने और किसी भी काटने या खरोंच की घटना को छिपाने के बजाय तुरंत परिवार के सदस्यों को बताने के लिए जागरूक करना जरूरी है।
आवारा कुत्तों की रोकथाम पर भी जोर
WHO के अनुसार कुत्तों का बड़े स्तर पर टीकाकरण रेबीज की रोकथाम का सबसे प्रभावी तरीका है। इसके साथ निगरानी, जागरूकता और स्थानीय स्तर पर पशु नियंत्रण व्यवस्था को मजबूत करना भी जरूरी है।
महत्वपूर्ण: डॉग-बाइट या किसी संदिग्ध जानवर के काटने/खरोंचने की स्थिति में घाव को तुरंत 15 मिनट तक साबुन और पानी से धोकर बिना देरी चिकित्सकीय सहायता लें। स्थानीय डॉक्टर द्वारा बताए गए वैक्सीन/PEP शेड्यूल को पूरा करना जरूरी है।