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अब जमीन की भी बनेगी डिजिटल पहचान, 14 अंकों के यूनिक नंबर से जुड़ेगा भूमि रिकॉर्ड

विकास · नई दिल्ली · · अपडेट: · नई विधा डेस्क

अब जमीन की भी बनेगी डिजिटल पहचान, 14 अंकों के यूनिक नंबर से जुड़ेगा भूमि रिकॉर्ड

योजना के लिए वर्ष 2026-31 के दौरान 565.5 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किए जाने की जानकारी दी गई है।

जमीन को मिलेगी यूनिक डिजिटल पहचान

योजना के तहत यूनिवर्सल भू-आधार की व्यवस्था विकसित करने की तैयारी है। इसके अंतर्गत भूमि की स्पष्ट पहचान के लिए 14 अंकों का यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर देने की योजना बताई गई है।

इससे जमीन की पहचान, रिकॉर्ड के मिलान और संपत्ति से संबंधित जानकारी को एक ही डिजिटल व्यवस्था में जोड़ने में मदद मिलने की उम्मीद है।

GIS आधारित Land Stack होगा तैयार

DILRMP 3.0 के तहत GIS-enabled Land Stack विकसित किया जाएगा। इसमें जियो-रेफरेंस्ड कैडस्ट्रल मैप, भूमि अधिकारों के रिकॉर्ड, संपत्ति पंजीकरण और भूमि से जुड़े न्यायिक मामलों जैसी जानकारियों को एक डिजिटल इंटरफेस के माध्यम से जोड़ा जाएगा।

राज्यों को API के माध्यम से अपने भूमि संबंधी डेटासेट और सिस्टम को एक-दूसरे से जोड़कर राज्य स्तर का Land Stack विकसित करने की सुविधा दी जाएगी। ये राज्य स्तरीय सिस्टम आगे राष्ट्रीय Land Stack के आधार के रूप में काम करेंगे।

किसानों को लोन और सरकारी सेवाओं में सुविधा

केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने योजना की शुरुआत के दौरान कहा कि यह पहल केवल व्यक्तिगत रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि एकीकृत भूमि प्रबंधन व्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ेगी।

योजना से किसानों को संस्थागत ऋण लेने में सुविधा मिलने और भूमि संबंधी काम के लिए सरकारी कार्यालयों के बार-बार चक्कर लगाने की जरूरत कम होने की उम्मीद है।

75 सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों को बनाया जाएगा आधुनिक

अधिक भीड़ वाले 75 सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों को डिजिटल सुविधाओं से युक्त आधुनिक सर्विस सेंटर के रूप में विकसित करने की योजना है। इसका उद्देश्य रजिस्ट्रेशन सेवाओं को अधिक सुविधाजनक और व्यवस्थित बनाना है।

पुराने भूमि रिकॉर्ड भी होंगे डिजिटल

पुश्तैनी जमीन और पुराने संपत्ति विवादों को कम करने के उद्देश्य से पुराने रजिस्ट्रेशन रिकॉर्ड को व्यवस्थित तरीके से स्कैन कर डिजिटल रूप में सुरक्षित रखने की योजना है।

इसके साथ ही Registration Repository विकसित की जाएगी, जिसमें रजिस्टर्ड दस्तावेजों के साथ संपत्ति से जुड़े लेनदेन और ऋण संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने की व्यवस्था होगी। इससे पुराने खरीद-बिक्री रिकॉर्ड और संपत्ति के स्वामित्व की जांच आसान हो सकती है।

राजस्व अदालतों को भूमि रिकॉर्ड से जोड़ा जाएगा

योजना के तहत राजस्व न्यायालयों की केस मैनेजमेंट प्रणाली को आधुनिक बनाकर भूमि रिकॉर्ड से जोड़ने की भी तैयारी है। इससे लंबित मामलों को कम करने और नामांतरण से जुड़े मामलों के निपटारे में तेजी लाने का लक्ष्य है।

शहरी जमीन के लिए भी डिजिटल रिकॉर्ड

Urban Land Mapping के तहत शहरी क्षेत्रों के सटीक और GIS-enabled भूमि रिकॉर्ड तैयार किए जाएंगे। पायलट प्रोजेक्ट के माध्यम से Urban Property Cards जारी करने की दिशा में भी काम किया जाएगा।

कुल मिलाकर DILRMP 3.0 का उद्देश्य भूमि से जुड़े अलग-अलग रिकॉर्ड और सेवाओं को एकीकृत डिजिटल व्यवस्था में लाना है, ताकि रिकॉर्ड की पहचान और सत्यापन आसान हो तथा भूमि संबंधी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ाई जा सके।

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