टीबी उन्मूलन: कागजों में मिशन मोड, धरातल पर 40% जांचें लंबित; 8 माह में 27% मरीज हुए स्वस्थ

नीमच, 10 सितम्बर। जिले को दिसंबर 2026 तक टीबी मुक्त घोषित करने के प्रशासनिक लक्ष्य के बीच स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े अभियान की जमीनी स्थिति को लेकर सवाल खड़े कर रहे हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार जांच प्रक्रिया में बड़ी संख्या में सैंपल लंबित हैं, जबकि लक्षित मरीजों की पहचान भी अभी पूरी नहीं हो सकी है।
14,291 जांचें लंबित
वार्षिक लक्ष्य के तहत जिले में 35,727 बलगम (स्पुटम) जांच किए जाने थे। अगस्त तक इनमें से 21,436 सैंपल की जांच हो सकी है। इस हिसाब से 14,291 जांचें लंबित हैं। यानी लक्ष्य की करीब 60 प्रतिशत जांच ही पूरी हो पाई है।
लंबित जांचों के कारण टीबी के संदिग्ध मरीजों की समय पर पुष्टि और उपचार शुरू करने की प्रक्रिया प्रभावित होने की चिंता सामने आ रही है।
लक्षित मरीजों में से 1,337 उपचाराधीन
राज्य स्तर से जिले को 2,460 मरीजों की पहचान का लक्ष्य दिया गया था। आठ महीने बीतने के बाद विभाग के आंकड़ों के अनुसार 1,337 मरीज उपचाराधीन हैं, जो लक्ष्य का करीब 54.5 प्रतिशत है। इसके आधार पर करीब 1,123 मरीजों की पहचान अभी बाकी बताई जा रही है।
उपचार शुरू करने वाले मरीजों में 367 स्वस्थ
जनवरी से अब तक 1,332 मरीजों का उपचार शुरू किया गया। इनमें से 367 मरीजों के स्वस्थ होने की जानकारी दी गई है, जो करीब 27.5 प्रतिशत है। वहीं शेष मरीजों का उपचार अभी जारी है, इसलिए इसे उपचार असफल होने का आंकड़ा नहीं माना जा सकता।
58,500 लोगों की स्क्रीनिंग, 33,040 एक्स-रे
अभियान के तहत जिले में करीब 58,500 लोगों की स्क्रीनिंग की गई और 33,040 एक्स-रे कराए गए। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार स्क्रीनिंग में टीबी मरीज मिलने की दर करीब 2.3 प्रतिशत रही। ऐसे में स्वास्थ्य विशेषज्ञों के स्तर पर लक्षित समूहों तक स्क्रीनिंग को अधिक प्रभावी तरीके से पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है।
जागरूकता और इलाज पूरा करना जरूरी
ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय तक खांसी, हल्का बुखार और वजन कम होने जैसे लक्षणों को कई बार सामान्य मौसमी बीमारी मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। सामाजिक झिझक भी समय पर जांच कराने में बाधा बन सकती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ लगातार दो सप्ताह या उससे अधिक समय तक खांसी रहने पर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराने और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार उपचार का पूरा कोर्स करने की सलाह देते हैं। बीच में दवा छोड़ना उपचार को प्रभावित कर सकता है और दवा-प्रतिरोधी टीबी जैसी गंभीर समस्या का जोखिम बढ़ा सकता है।
1,337 मरीजों को निक्षय पोषण योजना का लाभ
निक्षय पोषण योजना के तहत उपचाराधीन सभी 1,337 मरीजों को वित्तीय सहायता दिए जाने की जानकारी दी गई है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से ब्लॉक स्तर पर घर-घर स्क्रीनिंग जारी रखने और लंबित जांचों को जल्द पूरा करने के निर्देश दिए जाने की बात कही गई है।
अब चुनौती यह है कि दिसंबर 2026 के लक्ष्य तक पहुंचने के लिए अगले कुछ महीनों में लंबित जांचों, मरीजों की पहचान और उपचार की प्रक्रिया में कितनी तेजी लाई जाती है।