पिपलिया स्टेशन (निप्र)। ज्ञानार्जन चार्तुमास के लिए विराजित डॉ. श्रुतपूर्णा मसा की निश्रा में नगर में तपस्या का एक और कीर्तिमान रच गया। चार्तुमास में 19 तपस्वियों ने क्रमिक अठाई कर 152 दिन लगातार उपवास कर इतिहास रच दिया। मसा ने कहा तप, तन से नही मन से होता है, शरीर को निरोगी बनाता है। गांधीजी भी उपवास का सहारा लेते थे। तनाव, बीपी, शुगर, हृदयरोग से छुटकारे में तप एक महती भूमिका निभाता है, माह में एक उपवास जरुर करना चाहिए। प्रभु की कृपा से श्रीसंघ में आठ उपवास की रिले रेस निरंतर चली, जिसका समापन हुआ। संघ अध्यक्ष अशोक कुमठ ने बताया संघ में पहली बार पालकी में भगवान को विराजमान करते रथयात्रा प्रातः 9 बजे मंदिर से प्रारंभ हुई। आठ उपवास के तपस्वियों ने बग्गी में सवार होकर सभी अभिवादन स्वीकारा। जगह-जगह अक्षत श्रीफल की गहुलियां बनाकर वंदन किया। नगर भ्रमण के बाद रथयात्रा मंदिर पहंुची, कुमठ आराधना भवन में धर्मसभा व बहुमान समारोह सम्पन्न हुआ। साध्वी इष्टप्रिया के संयम जीवन के 23 वर्ष में प्रवेश पर प्रथम अक्षत से वधाना व काम्बली वोराने का चढ़ावा बोला। जिसका लाभ सुरेशकुमार दख परिवार ने लिया। चार्तुमास में विशेष लाभ लेने वाले परिवारों का ट्रस्ट मंडल ने शॉल, श्रीफल, मोमेंटो से बहुमान किया। इस अवसर पर मुम्बई व हुबली से भी गुरुभक्त शामिल हुए। संचालन अशोक कुमठ ने किया। आभार अमृतलाल चोधरी ने माना।
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