खेती की बढ़ती लागत के बीच उपज के भाव को लेकर किसानों की चिंता, मंडी कीमतों पर उठे सवाल

📍 नीमच, मध्यप्रदेश
नीमच। बीते वर्षों में कृषि लागत में हुई बढ़ोतरी के बीच नीमच क्षेत्र के किसान खरीफ फसलों के बाजार भाव को लेकर चिंता जता रहे हैं। किसानों के अनुसार डीजल, खाद, बीज, कीटनाशक, मजदूरी, जुताई और अन्य कृषि कार्यों की लागत बढ़ी है, जबकि कई प्रमुख फसलों के बाजार भाव उस अनुपात में नहीं बढ़े हैं।
क्षेत्र में सोयाबीन, मूंगफली, उड़द, गेहूं, मक्का, मूंग और चना जैसी फसलों की खेती प्रमुख रूप से होती है। किसानों का कहना है कि महंगे बीज और कृषि सामग्री खरीदकर फसल तैयार करने के बाद मंडी में मिलने वाला भाव कई बार उनकी अपेक्षित लागत और लाभ के अनुरूप नहीं रहता।
किसानों द्वारा बताए गए आंकड़ों के अनुसार सोयाबीन बीज की कीमत करीब ₹10,000 प्रति क्विंटल तक पहुंची है। मूंगफली और उड़द के बीज की कीमतों में भी बढ़ोतरी का दावा किया गया है। इसी तरह कृषि मजदूरी और जुताई सहित अन्य कार्यों का खर्च भी पहले की तुलना में बढ़ा है।
उर्वरक के संबंध में आधिकारिक स्थिति
केंद्र सरकार के उर्वरक विभाग के अनुसार 45 किलोग्राम यूरिया बैग की शुरुआत 50 किलोग्राम बैग के स्थान पर 2017 में की गई थी। विभाग के अनुसार 45 किलो यूरिया बैग का निर्धारित MRP ₹242 है, जबकि नीम-कोटेड यूरिया पर अतिरिक्त MRP लागू होता है।
MSP और मंडी भाव में अंतर
केंद्र सरकार ने 2026-27 विपणन सत्र के लिए सोयाबीन का MSP ₹5,708 प्रति क्विंटल निर्धारित किया है। सरकार के अनुसार यह 2025-26 के मुकाबले बढ़ा हुआ है। हालांकि MSP और किसी स्थानीय मंडी में वास्तविक कारोबार भाव एक ही चीज नहीं हैं और वास्तविक बाजार कीमत गुणवत्ता, मांग, आवक तथा अन्य स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार अलग हो सकती है।
केंद्र सरकार के अनुसार 2026-27 में MSP व्यवस्था के तहत फसलों के लिए अखिल भारतीय भारित औसत उत्पादन लागत से कम से कम 50 प्रतिशत मार्जिन रखने का सिद्धांत लागू है। सरकार ने खरीफ फसलों के MSP में भी वृद्धि की है।
वहीं, स्थानीय किसानों का कहना है कि केवल घोषित MSP या मंडी में उपलब्ध भाव देखना पर्याप्त नहीं है। उनके मुताबिक बीज, खाद, मजदूरी, सिंचाई, जुताई, कीटनाशक और परिवहन सहित पूरी उत्पादन लागत को ध्यान में रखकर वास्तविक आय का आकलन किया जाना चाहिए।
किसानों का कहना है कि यदि कृषि लागत लगातार बढ़ती है और बाजार में उपज का भाव अपेक्षित स्तर पर नहीं मिलता, तो खेती की आर्थिक व्यवहार्यता प्रभावित होती है। ऐसे में किसानों की मांग है कि उत्पादन लागत और बाजार भाव के बीच के अंतर पर प्रभावी तरीके से ध्यान दिया जाए।
नोट: किसानों द्वारा बताए गए स्थानीय बीज, लागत और मंडी भाव उनके दावों/स्थानीय आंकड़ों पर आधारित हैं। आधिकारिक MSP आंकड़े केंद्र सरकार के उपलब्ध रिकॉर्ड से लिए गए हैं। स्थानीय मंडी में वास्तविक भाव अलग हो सकते हैं।