नई अफीम नीति का इंतजार, मालवा-मेवाड़ के किसानों की बढ़ी उम्मीदें; कटे लाइसेंस बहाली पर टिकी नजर

📍 नीमच
नई नीति के ऐलान का इंतजार
अफीम काश्तकारी के नए सत्र के करीब आने के साथ ही मालवा और मेवाड़ के किसानों की नजर अब केंद्र सरकार की नई अफीम नीति 2026-27 पर टिकी है। बीते वर्ष 12 सितंबर को नीति जारी हो गई थी, लेकिन इस बार सितंबर का अंतिम सप्ताह आने के बावजूद नीति का आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है।
नीति में देरी के चलते अफीम किसानों और लंबरदारों में उत्सुकता बढ़ गई है। नए सत्र की शुरुआत 1 अक्टूबर से होनी है। ऐसे में नीति जारी होने के बाद नारकोटिक्स विभाग द्वारा लाइसेंस और पट्टों से जुड़ी प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
बैठकों और राय-मशविरे के बाद फैसले का इंतजार
किसानों की मांगों को लेकर जनप्रतिनिधियों की वित्त मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठकें और चर्चा हो चुकी हैं। वहीं नारकोटिक्स विभाग भी नीमच, मंदसौर और चित्तौड़गढ़ क्षेत्र के किसानों एवं लंबरदारों से राय-मशविरा कर चुका है।
सूत्रों और जनप्रतिनिधियों से मिले संकेतों के अनुसार सितंबर के अंत या अक्टूबर के पहले सप्ताह तक नई नीति जारी होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि अंतिम निर्णय केंद्र सरकार की ओर से नीति जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
कटे लाइसेंस बहाली की सबसे बड़ी मांग
किसानों की प्रमुख मांग लंबे समय से कटे या निरस्त लाइसेंसों की बहाली को लेकर है। डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध होने के आधार पर पुराने वंचित किसानों और मामूली मार्जिन के कारण लाइसेंस गंवाने वाले किसानों को पात्रता नियमों में राहत मिलने की उम्मीद है।
इसके अलावा न्यायालय या विभागीय प्रक्रिया में दोषमुक्त हो चुके किसानों को भी दोबारा लाइसेंस दिए जाने की मांग उठ रही है।
CPS के बजाय पारंपरिक चीरा पद्धति की उम्मीद
किसानों की एक अन्य प्रमुख मांग CPS पद्धति के स्थान पर पारंपरिक चीरा पद्धति को प्राथमिकता देने की है। जिन CPS किसानों ने बेहतर उत्पादन दर्ज किया है, उन्हें दोबारा पारंपरिक तरीके से अफीम गोंद उत्पादन की अनुमति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
सरकारी खरीदी मूल्य बढ़ाने की मांग
किसानों की मांगों में अफीम के सरकारी खरीदी मूल्य में बढ़ोतरी भी शामिल है। साथ ही मौसम और प्राकृतिक आपदा से फसल प्रभावित होने की स्थिति में औसत उपज यानी MQY के नियमों में अधिक लचीलापन देने की मांग की जा रही है।
पिछले सत्र में करीब 1.21 लाख किसानों को लाइसेंस
अफीम नीति 2025-26 के तहत केंद्र सरकार ने मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के करीब 1.21 लाख किसानों को लाइसेंस के लिए पात्र घोषित किया था। इस बार किसानों की नजर इस बात पर है कि नई नीति में कितने नए पट्टे जारी होते हैं और पुराने निरस्त लाइसेंसों की बहाली को लेकर क्या निर्णय लिया जाता है।
किसानों की प्रमुख मांगें
कटे और निरस्त लाइसेंसों की बहाली
दोषमुक्त किसानों को दोबारा मौका
CPS के बजाय पारंपरिक चीरा पद्धति को प्राथमिकता
सरकारी खरीदी मूल्य में बढ़ोतरी
प्राकृतिक आपदा की स्थिति में MQY नियमों में राहत
पुराने डिजिटल रिकॉर्ड के आधार पर पात्र किसानों को अवसर
नोट: नई अफीम नीति 2026-27 की अंतिम शर्तें और लाइसेंस संबंधी निर्णय केंद्र सरकार की आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होंगे।