इथेनॉल फैक्ट्री में करंट लगने से युवक की मौत, परिजनों ने 5 किमी लंबा चक्काजाम किया

32 वर्षीय मनीष भाटी की हादसे में मौत; परिजनों ने ₹1 करोड़ मुआवजा, नौकरी और फैक्ट्री प्रबंधन पर कार्रवाई की मांग की काम के दौरान हुआ हादसा
जानकारी के अनुसार ग्राम चंगेरी निवासी मनीष भाटी, पिता गणपत लाल भाटी, रविवार सुबह करीब 9 बजे फैक्ट्री में काम करने गया था। परिजनों के अनुसार वह कंप्यूटर ऑपरेटर के पद पर कार्यरत था।
परिजनों का आरोप है कि मनीष से उसकी जिम्मेदारी से अलग जोखिम भरा काम कराया जा रहा था और पर्याप्त सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं कराए गए थे। इसी दौरान काम करते समय उसे करंट लग गया। हादसे के बाद उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया।
परिजनों ने प्रबंधन पर लगाए गंभीर आरोप
मृतक की बहन रामकन्या बाई ने फैक्ट्री प्रबंधन पर संवेदनहीनता का आरोप लगाया। उनका कहना है कि अस्पताल में मनीष को मृत घोषित किए जाने के बाद फैक्ट्री का कोई जिम्मेदार अधिकारी वहां नहीं रुका और परिवार को अकेला छोड़ दिया गया।
परिजनों के अनुसार मनीष की शादी करीब दो वर्ष पहले हुई थी और उसकी पत्नी सात माह की गर्भवती है। परिवार के मुताबिक वह घर का इकलौता कमाने वाला सदस्य था।
हाईवे पर चक्काजाम, रखीं मांगें
घटना के बाद परिजन और ग्रामीण हाईवे पर पहुंच गए और चक्काजाम कर दिया। प्रदर्शन के कारण नीमच-मंदसौर मार्ग पर करीब 5 किलोमीटर लंबा जाम लग गया और यातायात प्रभावित हुआ।
प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन के सामने प्रमुख रूप से ये मांगें रखीं—
पीड़ित परिवार को ₹1 करोड़ मुआवजा दिया जाए।
परिवार के एक सदस्य को सरकारी या स्थायी नौकरी दी जाए।
फैक्ट्री प्रबंधन के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण और कार्रवाई की जाए।
फैक्ट्री की सुरक्षा व्यवस्था और संचालन की जांच कराई जाए।
परिजनों और ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि फैक्ट्री में सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जा रहा था। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है। मामले में प्रशासन और संबंधित विभाग की जांच के बाद वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।
जांच के बाद सामने आएगी वास्तविक स्थिति
हादसे के बाद फैक्ट्री में सुरक्षा मानकों, कर्मचारी से कराए जा रहे कार्य और दुर्घटना के कारणों की जांच महत्वपूर्ण होगी। वहीं, प्रदर्शनकारियों की मांगों पर प्रशासन की कार्रवाई और फैक्ट्री प्रबंधन का पक्ष भी मामले में आगे महत्वपूर्ण रहेगा।