नीमच में बैठे-बैठे पूरे MP में रजिस्ट्री की सुविधा, क्षेत्रीय सीमा खत्म होने से संपत्ति खरीदारों को राहत

सम्पदा-2.0 से होगी प्रक्रिया
नई व्यवस्था को सम्पदा-2.0 पोर्टल से जोड़ा गया है। खरीदार और विक्रेता अपनी सुविधा के अनुसार नीमच के उप-पंजीयक कार्यालय में ऑनलाइन स्लॉट बुक कर सकेंगे।
स्लॉट बुक होने के बाद जिस जिले में संपत्ति स्थित है, वहां के स्थानीय तंत्र और नीमच के उप-पंजीयक द्वारा दस्तावेजों तथा खसरा-नक्शे सहित संबंधित रिकॉर्ड का सत्यापन किया जाएगा।
6 दिन में दस्तावेजों का सत्यापन
व्यवस्था के अनुसार दस्तावेजों की जांच के लिए 6 दिन की समय-सीमा निर्धारित की गई है। रिकॉर्ड और दस्तावेज सही पाए जाने के बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत नीमच कार्यालय में ही बायोमेट्रिक पहचान और ई-साइन के माध्यम से रजिस्ट्री पूरी की जा सकेगी।
इससे संपत्ति की वास्तविक स्थिति और दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया को डिजिटल तरीके से पूरा करने में मदद मिलेगी।
55 जिलों का डिजिटल नेटवर्क
प्रदेश के सभी 55 जिलों के पंजीयन कार्यालयों को डिजिटल रूप से आपस में जोड़ने की व्यवस्था की गई है। इससे अलग-अलग जिलों में स्थित संपत्तियों के पंजीयन से जुड़ी जानकारी को डिजिटल माध्यम से साझा करना आसान होगा।
नीमच के नागरिकों को क्या फायदा?
इस व्यवस्था से उन लोगों को विशेष राहत मिलने की उम्मीद है जो नौकरी, कारोबार या बच्चों की पढ़ाई के कारण दूसरे शहरों में रहते हैं और वहां मकान, प्लॉट या अन्य अचल संपत्ति खरीदते हैं।
अब उन्हें केवल रजिस्ट्री के लिए संबंधित जिले के उप-पंजीयक कार्यालय में बार-बार जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे समय और यात्रा खर्च की बचत हो सकती है।
डिजिटल सत्यापन और तय समय-सीमा के कारण फर्जीवाड़े, दोहरी रजिस्ट्री और विवादित संपत्तियों से जुड़े मामलों पर भी अंकुश लगाने का उद्देश्य है।
नई व्यवस्था की तारीख को लेकर बदलाव
उपलब्ध जानकारी के अनुसार यह व्यवस्था पहले 17 सितम्बर से लागू होने वाली थी, लेकिन बाद में इसकी तारीख आगे बढ़ाए जाने की बात सामने आई है। इसलिए अंतिम लागू तारीख विभाग की आधिकारिक सूचना के अनुसार ही मानी जाएगी।
नीमच के पंजीयन विभाग के अधिकारी प्रशांत पाराशर के अनुसार पंजीयन अधिकारियों की क्षेत्रीय अधिकारिता अब पूरे मध्यप्रदेश तक बढ़ाई गई है और इसका गजट नोटिफिकेशन जारी हो चुका है। सम्पदा-2.0 के माध्यम से नई व्यवस्था लागू होने के बाद दूसरे जिलों की संपत्ति की रजिस्ट्री के लिए वहां जाना जरूरी नहीं रहेगा।