जेसीबी किराये पर लगाने का झांसा देकर लाखों की डील, GPS हटाकर मशीन गायब करने का आरोप; दो गिरफ्तार

मनासा, 10 सितंबर। जेसीबी मशीन को किराये पर लगाकर नियमित आमदनी कराने का झांसा देकर लाखों रुपए लेने और बाद में मशीन का भुगतान बंद होने के साथ GPS लोकेशन हटाए जाने के मामले में मनासा पुलिस ने कार्रवाई की है। पुलिस ने मामले में रवि कुमार चौधरी और दिलीप पाटीदार को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया।
पुलिस के अनुसार, दोनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) और 316(2) के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। न्यायालय से दोनों आरोपियों का दो दिन का रिमांड मिला है।
छह लाख रुपए लेने का आरोप
मामले में डिकेन निवासी शिकायतकर्ता कैलाश पाटीदार ने आरोप लगाया कि उनकी जेसीबी मशीन को कंपनी में किराये पर लगवाने और नियमित आय दिलाने का भरोसा देकर आरोपियों ने उनसे करीब 6 लाख रुपए नकद लिए।
शिकायत के मुताबिक, मशीन को चार वर्ष के अनुबंध पर किराये पर दिए जाने की बात कही गई थी। शुरुआत में कुछ महीनों तक भुगतान किया गया, लेकिन बाद में करीब तीन-चार महीने से किराये या किस्त का भुगतान बंद हो गया।
शिकायतकर्ता द्वारा लगातार संपर्क किए जाने के बावजूद संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर उन्होंने पुलिस से शिकायत की।
GPS हटाए जाने के बाद बढ़ा संदेह
मामले में मशीन की GPS लोकेशन हटाए जाने का आरोप भी सामने आया है। शिकायतकर्ता के अनुसार, जब उन्होंने मशीन की जानकारी लेने का प्रयास किया तो पता चला कि उसकी GPS ट्रैकिंग उपलब्ध नहीं थी और मशीन को किसी अज्ञात स्थान पर रखा गया है।
इसके बाद मशीन की तलाश शुरू की गई और मामला पुलिस तक पहुंचा। पुलिस अब मशीन की वास्तविक लोकेशन सहित पूरे मामले की जांच कर रही है।
अब तक 9 मशीन मालिकों की शिकायत
मनासा थाना प्रभारी हिमांशु चौहान के अनुसार, अब तक 9 जेसीबी मशीन मालिकों की ओर से शिकायतें दर्ज कराई गई हैं। उन्होंने बताया कि मामले में अन्य मशीन मालिक सामने आते हैं तो जांच का दायरा और बढ़ाया जाएगा।
कुछ सूत्रों के हवाले से 40 से अधिक मशीनों के गायब होने और करोड़ों रुपए की कथित धोखाधड़ी की बात कही जा रही है, लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
जांच में इन बिंदुओं पर रहेगा फोकस
पुलिस जांच में जेसीबी मशीनों की वास्तविक लोकेशन, चार वर्ष के अनुबंध की शर्तें, कथित छह लाख रुपए के लेन-देन, बैंक एवं फाइनेंस रिकॉर्ड, किराये के भुगतान और GPS ट्रैकिंग हटाए जाने से जुड़े तथ्यों की जांच की जा रही है।
पुलिस के अनुसार, मामले में सामने आने वाले अन्य तथ्यों और शिकायतों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।