CCI नयागांव के मजदूरों का ₹17.55 करोड़ बकाया, तरुण बाहेती ने तत्काल भुगतान की मांग की

सुप्रीम कोर्ट में याचिका खारिज होने के बाद भी भुगतान का इंतजार
तरुण बाहेती के अनुसार, सीसीआई प्रबंधन ने हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) दायर की थी। 25 सितंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के निर्णय और आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए याचिका खारिज कर दी।
बाहेती का कहना है कि श्रमिक श्रम न्यायालय से लेकर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक कानूनी लड़ाई लड़ चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें बकाया राशि नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि अब श्रमिकों को आश्वासन के बजाय उनके खातों में भुगतान चाहिए।
तहसीलदार ने 15 अक्टूबर तक जमा करने के दिए थे निर्देश
बाहेती ने बताया कि तहसीलदार जावद ने 30 सितंबर 2026 को मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता, 1959 की धारा 146 के तहत सीसीआई नयागांव के प्रबंधन को मांग सूचना जारी की थी। इसमें 15 अक्टूबर तक बकाया राशि जमा करने के निर्देश दिए गए थे।
उनके अनुसार, भुगतान नहीं होने की स्थिति में धारा 147 के तहत संपत्ति की कुर्की और नीलामी जैसी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई थी। सीसीआई नयागांव के कार्यकारी प्रभारी परशुराम डी. ने 15 अक्टूबर को तहसीलदार जावद को पत्र भेजकर मांग सूचना प्राप्त होने की पुष्टि की थी। पत्र में श्रमिकों के विवरण से संबंधित प्रक्रिया जारी होने की बात कही गई थी।
करीब 100 करोड़ रुपये में फैक्ट्री बिकने का दावा
तरुण बाहेती ने दावा किया कि फैक्ट्री करीब 100 करोड़ रुपये में बेची जा चुकी है। ऐसे में उन्होंने सवाल उठाया कि श्रमिकों की बकाया राशि का भुगतान अब तक क्यों नहीं हुआ। उन्होंने प्रशासन से मामले में उच्च स्तर पर हस्तक्षेप कर भुगतान की स्थिति स्पष्ट करने और आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की।
बाहेती ने कहा कि कांग्रेस, सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन्स (CITU) और अन्य श्रमिक संगठन लंबे समय से मजदूरों की मांग के समर्थन में हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि 17.55 करोड़ रुपये से अधिक की बकाया राशि का भुगतान तत्काल नहीं किया गया, तो कांग्रेस श्रमिक संगठनों के साथ मिलकर आंदोलन करेगी।
नोट: बकाया राशि, न्यायालय के आदेश, फैक्ट्री की बिक्री और प्रशासनिक कार्रवाई से संबंधित विवरण तरुण बाहेती के बयानों पर आधारित हैं।