मध्यप्रदेश में निजी कॉलेजों पर सख्ती: फर्जी दस्तावेज देने पर मान्यता होगी रद्द, 5 लाख रुपये तक जुर्माना

बीएड और एमबीए कॉलेजों में अनियमितताओं के मामले सामने आने के बाद शासन के निर्देश पर नियमों को सख्त किया गया है। नई नियमावली में जमीन, भवन, शिक्षकों के वेतन, प्रवेश प्रक्रिया और शैक्षणिक गुणवत्ता से जुड़ी शर्तें निर्धारित की गई हैं।
फर्जी दस्तावेज देने पर होगी कार्रवाई
नई व्यवस्था के तहत कॉलेजों द्वारा पंजीयन संबंधी दस्तावेजों में गड़बड़ी या गलत जानकारी देने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। महाविद्यालय की मान्यता रद्द करने के साथ प्रबंधन पर 5 लाख रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकेगा।
इस साल भोपाल के बरकतउल्ला विश्वविद्यालय से संबद्ध 30 बीएड कॉलेजों की संबद्धता को लेकर कथित फर्जीवाड़े का मामला सामने आया था। इनमें श्रीराम महाविद्यालय के बारे में बताया गया कि वह 10 वर्षों से केवल कागजों पर संचालित हो रहा था। इसके बाद उसकी मान्यता और संबद्धता रद्द कर दी गई थी।
शहरी क्षेत्र में दो और ग्रामीण क्षेत्र में चार एकड़ जमीन जरूरी
नियमावली के अनुसार, निजी महाविद्यालय खोलने के लिए शहरी क्षेत्र में कम से कम दो एकड़ और ग्रामीण क्षेत्र में चार एकड़ जमीन होना अनिवार्य होगा।
यदि कॉलेज परिसर में खेल मैदान नहीं है, तो भवन से दो किलोमीटर के दायरे में मैदान उपलब्ध कराना होगा। निजी महाविद्यालय अधिकतम पांच वर्ष तक किराये के भवन में संचालित हो सकेंगे। इसके लिए आवेदन की तारीख से एक माह से अधिक पुराना नहीं होने वाला और समिति के नाम पर पंजीकृत किरायानामा प्रस्तुत करना होगा।
किरायानामे की अवधि कम से कम तीन और अधिकतम पांच वर्ष होनी चाहिए। केवल नोटरी से सत्यापित किरायानामा मान्य नहीं होगा। पांच साल के भीतर स्वयं का भवन तैयार नहीं करने पर किराये के भवन में संचालन की अनुमति स्वतः निरस्त मानी जाएगी।
शिक्षकों के वेतन और बैंक रिकॉर्ड की होगी जांच
पहले से संचालित कॉलेजों में नए विषय शुरू करने, शिक्षकों के वेतन भुगतान और विद्यार्थियों के प्रवेश पर निगरानी बढ़ाई जाएगी। प्रबंधन को शिक्षकों के वेतन भुगतान के प्रमाण, प्रमाणपत्रों की सत्यापित प्रतियां और बैंक रिकॉर्ड प्रस्तुत करने होंगे।
कॉलेज परिसर की ऐसी तस्वीरें भी जमा करनी होंगी, जिनमें स्थान की जानकारी दर्ज हो। छह वर्ष से अधिक पुराने निजी महाविद्यालयों को आगामी दो शैक्षणिक सत्रों में नैक (NAAC) ग्रेडिंग करानी होगी।
बिना अनुमति प्रवेश देने पर फीस होगी जब्त
निजी कॉलेजों को सरकारी अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) और विश्वविद्यालय से संबद्धता मिलने के बाद ही ऑनलाइन प्रवेश की अनुमति दी जाएगी। अनुमति मिलने के एक महीने के भीतर पुस्तकों, प्रयोगशाला उपकरणों और स्टाफ से संबंधित जानकारी देनी होगी।
निर्धारित शुल्क जमा होने के बाद ही संबंधित विषयों को पोर्टल पर प्रदर्शित किया जाएगा। बिना अनुमति विद्यार्थियों को प्रवेश देने पर फीस जब्त करने के साथ महाविद्यालय को ब्लैकलिस्ट भी किया जा सकेगा।
विद्यार्थियों से अतिरिक्त फीस वसूलने पर रोक
नई नियमावली के तहत महाविद्यालय निर्धारित शुल्क से अधिक राशि विद्यार्थियों से नहीं वसूल सकेंगे। इन नियमों का उद्देश्य निजी उच्च शिक्षण संस्थानों में पारदर्शिता बढ़ाना, शैक्षणिक गुणवत्ता सुनिश्चित करना और फर्जीवाड़े पर अंकुश लगाना है।