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24 घंटे बाद ऋतुराज का पोस्टमार्टम: मजिस्ट्रियल जांच के आदेश के बाद परिजन हुए सहमत

स्थानीय · पिपलियामंडी · · अपडेट: · नई विधा डेस्क

24 घंटे बाद ऋतुराज का पोस्टमार्टम: मजिस्ट्रियल जांच के आदेश के बाद परिजन हुए सहमत

पिपलियामंडी। जयपुर के मुहाना थाना क्षेत्र में पुलिस कार्रवाई के बाद गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराए गए 16 वर्षीय ऋतुराज लोहार की सोमवार तड़के करीब 3:30 बजे मौत हो गई। मौत के बाद परिजनों ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए करीब 24 घंटे तक पोस्टमार्टम कराने और शव लेने से इनकार कर दिया।

परिजनों की मांग थी कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, नाबालिग के साथ कथित मारपीट के लिए जिम्मेदार पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए और परिवार को आर्थिक सहायता दी जाए।

इस दौरान मंदसौर से पहुंचे किसान नेता श्यामलाल जोकचंद और उनके समर्थकों ने प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बातचीत की। मजिस्ट्रियल जांच के आदेश और सुरक्षा का आश्वासन मिलने के बाद परिजन पोस्टमार्टम के लिए सहमत हुए।

न्यायिक मजिस्ट्रेट सौरभ बंसल की मौजूदगी में परिजनों के बयान दर्ज किए गए। इसके बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के दिशा-निर्देशों के तहत पांच सदस्यीय मेडिकल बोर्ड का गठन किया गया। बोर्ड में डॉ. पृथ्वीराज मीणा, डॉ. प्रेरणा चौधरी, डॉ. प्रियंक शर्मा, डॉ. राकेश अटल और डॉ. श्वेता भगवती शामिल थे। मेडिकल बोर्ड ने मंगलवार शाम शव का पोस्टमार्टम किया।

परिजनों ने लगाए पुलिस पर आरोप

मामले की पृष्ठभूमि के अनुसार, ऋतुराज के पिता प्रकाश लोहार 17 सितंबर को दुबई से जयपुर पहुंचे थे। परिजनों के अनुसार इसके बाद उनसे संपर्क टूट गया। 21 सितंबर को ऋतुराज को पिता के एक होटल में होने की जानकारी देकर जयपुर बुलाया गया, जिसके बाद उसका मोबाइल भी बंद हो गया।

परिजनों का आरोप है कि पुलिस कार्रवाई और पूछताछ के दौरान ऋतुराज के साथ मारपीट की गई, जिससे उसकी हालत बिगड़ गई। उसे 22 सितंबर को एसएमएस अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया, जहां करीब दो सप्ताह इलाज के बाद उसकी मौत हो गई।

ऋतुराज की मां हेमा लोहार ने 29 सितंबर को अदालत में परिवाद दायर कर पुलिसकर्मियों पर अवैध हिरासत और प्रताड़ना के आरोप लगाए थे।

पुलिस ने आरोपों से किया इनकार

दूसरी ओर पुलिस ने परिजनों के आरोपों को खारिज किया है। पुलिस के अनुसार प्रकाश लोहार के खिलाफ सस्ते सोने का झांसा देकर ₹22 लाख की कथित ठगी का मामला दर्ज था। पुलिस का दावा है कि परिजन स्वयं नाबालिग को थाने लेकर आए थे और वहां तबीयत बिगड़ने पर उसे तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया।

पोस्टमार्टम पूरा होने के बाद परिजन शव को अपने गृह ग्राम मनासा खुर्द ले गए।

अब मामले की वास्तविक स्थिति पोस्टमार्टम रिपोर्ट, CCTV फुटेज, मोबाइल लोकेशन और मजिस्ट्रियल जांच के निष्कर्षों से स्पष्ट होगी। फिलहाल पुलिस पर लगाए गए आरोप जांच का विषय हैं और उनकी स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।

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