अफीम नीति 2026-27: को लेकर बढ़ी उम्मीदेंइसी पखवाड़े जारी होने की संभावना, किसानों को राहत की आस

सांसद सुधीर गुप्ता
ने कहा कि नई नीति आने से पहले उसके संबंध में कोई घोषणा नहीं की जा सकती। नीति को जल्द लाने के प्रयास जारी हैं और यह यथाशीघ्र जारी होगी। पिछली बार 11 तारीख तक नीति आ गई थी, इस बार देरी के सवाल पर उन्होंने कहा कि ऐसी कोई विशेष वजह नहीं है। नीतिगत प्रक्रिया चलती रहती है।

सांसद सीपी जोशी
ने किसानों को आश्वस्त करते हुए कहा, "इस बार भी, हम केंद्र सरकार और वित्त मंत्रालय के साथ मिलकर प्रयास कर रहे हैं कि नई अफीम नीति में किसानों को अधिकतम राहत मिले। हमें उम्मीद है कि बहुत जल्द जारी होने वाली नई नीति में अफीम उत्पादक किसानों की उम्मीदें पूरी होंगी।"

किसानों की मुख्य मांगें और अधिकारियों का आश्वासन:
👉🏽 पट्टों की बहाली: किसानों ने 1990 से कटे हुए पट्टों को बहाल करने की मांग की। विशेष रूप से, 1998 में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार द्वारा दिए गए 50,000 नए लाइसेंसों के बाद भी, कई किसान ओलावृष्टि के कारण निरस्त हुए अपने पट्टों की बहाली का इंतजार कर रहे हैं।
👉🏽 न्यूनतम मूल्य में वृद्धि: अफीम का न्यूनतम सरकारी मूल्य 10,000 रुपये प्रति किलो करने की मांग की गई।
👉🏽 मार्फिन मापदंड में राहत: मार्फिन की अनिवार्यता को समाप्त करने और दो प्लॉट में अफीम बोने की अनुमति देने की मांग प्रमुखता से उठाई गई।
👉🏽 सीपीएस पद्धति के स्थान पर पारंपरिक खेती: सीपीएस (CPS) पद्धति के बजाय, किसानों ने पारंपरिक 'चिराई-लुवाई' पद्धति के लाइसेंसों को बढ़ावा देने की मांग की।
👉🏽 प्रक्रिया में सरलीकरण: 'कच्चा तौल' पूर्णतया बंद करने और लाइसेंस का 'जीवित नामांतरण' (नामांतरण की प्रक्रिया) चालू करने की मांग भी की गई।किसानों के मुताबिक, अधिकारियों ने उनकी पीड़ा को ध्यान से सुना और एक 'सकारात्मक समाधान' का आश्वासन दिया है।