समता विद्यापीठ में गांधी जयंती पर जैन महासतियों के प्रवचन, विद्यार्थियों को अहिंसा और सदाचार की प्रेरणा

कार्यक्रम की शुरुआत महासती पूर्णा ने णमोकार महामंत्र के पाठ और भजन से की। उन्होंने कहा कि मनुष्य जीवन श्रेष्ठ है और सत्कर्म के माध्यम से इसे सार्थक बनाया जा सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों को अच्छा इंसान बनने के साथ सच्चा बनने की प्रेरणा दी।
महासती मनन प्रज्ञा ने भजन के माध्यम से विद्यार्थियों को भगवान महावीर के अहिंसा संदेश और महात्मा गांधी के जीवन से जोड़ते हुए विचार रखे। उन्होंने कहा कि जिस तरह का सुख और सम्मान हम दूसरों से चाहते हैं, वैसा ही व्यवहार हमें भी दूसरों के साथ करना चाहिए।
विद्यार्थियों को दिए तीन सूत्र
महासती मनन प्रज्ञा ने विद्यार्थियों को तीन सूत्र अपनाने की प्रेरणा दी। इनमें सभी को सुख देना, माता-पिता और गुरुजनों की आज्ञा का पालन करना तथा हर परिस्थिति को स्वीकार करना शामिल रहा।
उन्होंने कहा कि जीवन में आने वाली कठिन परिस्थितियों से घबराने के बजाय उनका सामना करना चाहिए। विद्यार्थियों को सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने और प्रकृति से सीख लेने की प्रेरणा भी दी गई।
उन्होंने शिक्षक वर्ग से भी विद्यार्थियों के प्रति सहानुभूतिपूर्ण और संवेदनशील व्यवहार रखने का आह्वान किया।
शिक्षा के साथ नैतिक संस्कार पर जोर
समता विद्यापीठ के संस्थापक एवं संचालक अजीत कांठेड़ ने कहा कि विद्यालय में समय-समय पर ऐसे आयोजन किए जाते हैं, ताकि विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ आध्यात्मिकता और नैतिक मूल्यों के संस्कार भी मिल सकें।
उन्होंने कहा कि गांधी जयंती मनाने का उद्देश्य महात्मा गांधी के जीवन और विचारों से प्रेरणा लेना है। कार्यक्रम में साधुमार्गी जैन संघ के श्रावक-श्राविकाओं सहित विद्यालय परिवार के सदस्य मौजूद रहे।