अफीम नीति 2026-27 में देरी से किसानों में असमंजस, पिछले प्रदर्शन से पट्टे बरकरार रहने की उम्मीद

📍 नीमच, मध्यप्रदेश
समाचार विवरण:
मालवा क्षेत्र में अफीम की खेती को लेकर इस वर्ष किसानों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। अफीम नीति 2026-27 जारी होने में देरी के कारण नीमच, मंदसौर और रतलाम जिले के किसान बुआई को लेकर स्पष्टता का इंतजार कर रहे हैं।
किसान संगठनों के अनुसार अफीम की बुआई के लिए 30 सितंबर से 10 अक्टूबर का समय महत्वपूर्ण माना जाता है। नीति में देरी होने से बुआई प्रभावित होने और आगे फसल के उत्पादन पर असर पड़ने की चिंता किसानों ने जताई है।
उपलब्ध पिछले आंकड़ों के अनुसार, पारंपरिक पद्धति में 4.2 किलोग्राम या उससे अधिक मॉर्फिन की न्यूनतम अर्हक उपज से जुड़े मानदंड का इस्तेमाल लाइसेंस पात्रता में किया गया है। केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो के आधिकारिक आंकड़ों में 2024-25 के लिए 4.2 किलोग्राम का मानदंड दर्ज है।
किसानों के बीच यह उम्मीद जताई जा रही है कि पिछले बेहतर प्रदर्शन के आधार पर बड़ी संख्या में पुराने पट्टे बरकरार रह सकते हैं। हालांकि 2026-27 के लिए अंतिम पात्रता और लाइसेंस शर्तें नई आधिकारिक नीति जारी होने के बाद ही स्पष्ट होंगी।
सीपीएस पद्धति से जुड़े किसानों के प्रदर्शन को लेकर भी बेहतर परिणाम सामने आने का दावा किया जा रहा है। ऐसे किसानों को आगे किस व्यवस्था के तहत लाइसेंस मिलेगा, इसकी स्थिति नई नीति में स्पष्ट होगी।
किसानों की प्रमुख मांग है कि अफीम नीति जल्द जारी की जाए, ताकि बुआई का उपयुक्त समय प्रभावित न हो। इसके साथ ही अफीम के सरकारी मूल्य में वृद्धि, पुराने पट्टों की बहाली और चीरा अथवा सीपीएस पद्धति को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग भी की जा रही है।
केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो की वेबसाइट पर फिलहाल 2025-26 की गम-अफीम और सीपीएस आधारित लाइसेंसिंग नीतियां उपलब्ध हैं; 2026-27 की अंतिम नीति के प्रावधान आधिकारिक रूप से सामने आने के बाद ही नए लाइसेंस मानदंडों की पुष्टि होगी।