वृद्ध दिवस पर नीमच की कड़वी हकीकत: अपनों से हक के लिए जूझ रहे बुजुर्ग

नीमच कलेक्टोरेट में होने वाली जनसुनवाई और एसडीएम कोर्ट में पहुंचने वाले आवेदन बताते हैं कि कुछ बुजुर्गों के सामने अपने ही परिवार से जुड़े विवाद बड़ी समस्या बन चुके हैं। कई मामलों में बुजुर्गों का आरोप है कि उनकी संपत्ति, जमीन या मकान पर परिजनों ने कब्जा कर लिया, जबकि उन्हें देखभाल और सम्मान नहीं मिला।
जनसुनवाई तक पहुंच रहे बुजुर्ग
सबसे गंभीर स्थिति तब सामने आती है, जब बुजुर्गों को अपने अधिकारों के लिए सार्वजनिक कार्यालयों तक पहुंचना पड़ता है। जिले में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिनमें बुजुर्गों ने संपत्ति विवाद, प्रताड़ना और बेदखली की शिकायतें प्रशासन के सामने रखी हैं।
जुलाई 2026 में दिव्यांग बुजुर्ग महिला कला बाई गायरी का मामला सामने आया था। वे अपनी शिकायत लेकर कलेक्टोरेट पहुंची थीं। इसी तरह मार्च 2026 में ग्राम दारू के 86 वर्षीय जमनालाल 109वीं बार आवेदन लेकर कलेक्टोरेट पहुंचे थे।
जुलाई 2026 में 80 वर्षीय कमलाबाई सोनी ने अपने पैतृक मकान को लेकर शिकायत की थी। वहीं अगस्त 2026 में 78 वर्षीय प्रेमबाई ने जमीन विवाद और कथित प्रताड़ना को लेकर पुलिस प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई थी।
संपत्ति विवाद सबसे बड़ी वजहों में शामिल
कई मामलों में बुजुर्गों की शिकायत संपत्ति और मकान से जुड़ी होती है। माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण तथा कल्याण से संबंधित कानून के तहत वरिष्ठ नागरिकों को संरक्षण देने के प्रावधान हैं। संपत्ति हस्तांतरण के बाद देखभाल नहीं होने जैसी परिस्थितियों में संबंधित प्राधिकारी के समक्ष राहत के लिए आवेदन किया जा सकता है।
वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों में भरण-पोषण और संपत्ति से संबंधित कानूनी उपाय भी शामिल हैं। हालांकि, इन प्रावधानों की जानकारी और उनका प्रभावी क्रियान्वयन बुजुर्गों के लिए महत्वपूर्ण है।
सम्मान के साथ सुरक्षित बुढ़ापे की जरूरत
अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस केवल सम्मान समारोह तक सीमित नहीं होना चाहिए। बुजुर्गों की शिकायतों का समय पर निराकरण, कानूनी सहायता और उनकी संपत्ति व अधिकारों की सुरक्षा भी जरूरी है।
नीमच में सामने आ रहे मामले यह सवाल जरूर खड़ा करते हैं कि जिन माता-पिता ने जीवनभर परिवार को संभाला, उन्हें उम्र के इस पड़ाव पर अपने ही अधिकारों के लिए दफ्तरों के चक्कर क्यों लगाने पड़ रहे हैं। वृद्धजन दिवस पर यह सवाल केवल एक दिन के कार्यक्रम का नहीं, बल्कि बुजुर्गों के सम्मान और सुरक्षा से जुड़ी व्यवस्था का भी है।