गांधी सागर बांध की होगी ‘हेल्थ रिपोर्ट’, 6 विशेषज्ञों ने की दो दिन तकनीकी जांच

दल की अध्यक्षता एसके खरे ने की। टीम में सीएल गर्ग, एमसी माहेश्वरी, टीआर सुमन, आरसी उपाध्याय और डीके मिश्रा सहित वरिष्ठ तकनीकी विशेषज्ञ शामिल रहे। विशेषज्ञों ने बांध के कंक्रीट स्ट्रक्चर, दीवारों और स्पिलवे गेट की स्थिति का बारीकी से परीक्षण किया।
गेट संचालन और कंक्रीट की मजबूती की जांच
तकनीकी दल ने विशेष रूप से बांध के पानी निकासी वाले गेटों की ऑपरेशनल क्षमता और तकनीकी स्थिति की जांच की। इसके साथ ही वर्षों पुराने कंक्रीट स्ट्रक्चर की आंतरिक मजबूती और उसमें आए संभावित बदलावों का भी परीक्षण किया गया।
बांध के निर्माण के बाद से अब तक इसकी दीवारों और गेट में हुए बदलावों को भी तकनीकी जांच के दायरे में रखा गया। विशेषज्ञों ने बांध की वर्तमान स्थिति का आकलन करते हुए भविष्य में आवश्यक रखरखाव और सुरक्षा उपायों से जुड़े पहलुओं का परीक्षण किया।
जांच के आधार पर तैयार होगी ‘हेल्थ रिपोर्ट’
दो दिवसीय निरीक्षण के बाद विशेषज्ञ दल सभी तकनीकी पहलुओं का समायोजन कर विस्तृत ‘हेल्थ रिपोर्ट’ तैयार करेगा। रिपोर्ट में सामने आने वाली कमियों और सुझावों के आधार पर बांध के सुदृढ़ीकरण, रखरखाव और दीर्घकालिक सुरक्षा के लिए आवश्यक कार्य प्रस्तावित किए जाएंगे।
कार्यपालन यंत्री मुकेश कुमार मीणा ने कहा कि जिस तरह हेल्थ रिपोर्ट के आधार पर मरीज का इलाज किया जाता है, उसी तरह विस्तृत रिपोर्ट के आधार पर बांध के रखरखाव और आवश्यक कार्य प्रस्तावित किए जाएंगे।
मध्यप्रदेश-राजस्थान के लिए महत्वपूर्ण जल संरचना
गांधी सागर बांध मध्यप्रदेश और राजस्थान के लिए सिंचाई और बिजली आपूर्ति की दृष्टि से महत्वपूर्ण जल संरचना है। 7 मार्च 1954 को तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने इसकी नींव रखी थी और वर्ष 1960 में इसे जल संसाधन विभाग को समर्पित किया गया।
बांध की जलभराव क्षमता करीब 7,164 मिलियन क्यूबिक मीटर (MCM) बताई गई है। यहां 23 मेगावाट की 5 चालू इकाइयों से कुल 115 मेगावाट विद्युत उत्पादन क्षमता है। बांध से मध्यप्रदेश और राजस्थान के कृषि एवं आर्थिक विकास को भी लाभ मिलता है।