फसल विविधीकरण से बढ़ेगी किसानों की आय, समन्वित कृषि विकास कार्यशाला में बताए लाभकारी खेती के विकल्प

📍 नीमच, मध्यप्रदेश
समाचार विवरण
सेवा संकल्प अभियान के तहत बुधवार को दशहरा मैदान स्थित टाउन हॉल में समन्वित कृषि विकास कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में नवाचार, कृषि प्रसंस्करण, पशुपालन, मिलेट मिशन और किसानों की आय बढ़ाने के विभिन्न अवसरों की जानकारी दी गई।
कार्यशाला में किसानों के लिए विशेष मार्गदर्शक चार्ट का विमोचन किया गया। इसमें केवल उत्पादन बढ़ाने के बजाय फसल की लागत, संभावित बिक्री मूल्य और अनुमानित शुद्ध लाभ को ध्यान में रखकर फसल का चयन करने पर जोर दिया गया।
लहसुन, चिया और अश्वगंधा के विकल्प
कार्यशाला में प्रस्तुत आर्थिक विश्लेषण के अनुसार, लहसुन की खेती में करीब ₹2.56 लाख प्रति हेक्टेयर लागत के मुकाबले लगभग ₹12 लाख की कुल आय और ₹9.43 लाख के शुद्ध लाभ का उदाहरण दिया गया।
इसी तरह चिया सीड से ₹1.78 लाख, किनोवा से ₹1.17 लाख और अश्वगंधा से ₹1.46 लाख तक शुद्ध लाभ के अनुमान बताए गए। ये आंकड़े कार्यशाला में प्रस्तुत मॉडल के आधार पर हैं; वास्तविक लाभ बाजार भाव, उत्पादन, गुणवत्ता और लागत के अनुसार अलग हो सकता है।
वर्तमान मंडी आंकड़ों में भी नीमच में चिया सीड और अश्वगंधा का कारोबार दर्ज हो रहा है। 23 सितंबर को उपलब्ध मंडी आंकड़ों में चिया सीड के भाव ₹9,500 से ₹20,500 और अश्वगंधा के भाव ₹9,000 से ₹29,200 प्रति क्विंटल तक दर्ज किए गए थे।
पशुपालन से अतिरिक्त आय का मॉडल
कार्यशाला में खेती के साथ पशुपालन को जोड़कर आय बढ़ाने का मॉडल भी प्रस्तुत किया गया। इसमें 10 पशुओं की डेयरी इकाई से सालाना अतिरिक्त शुद्ध आय का अनुमान बताया गया।
मॉडल के अनुसार चारा, दाना, मजदूरी और उपचार सहित वार्षिक खर्च करीब ₹5.61 लाख बताया गया। इसके आधार पर करीब ₹5.64 लाख सालाना शुद्ध आय का उदाहरण किसानों के सामने रखा गया।
पारंपरिक खेती के साथ विविधीकरण पर जोर
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य किसानों को केवल एक या दो पारंपरिक फसलों पर निर्भर रहने के बजाय फसल विविधीकरण, उद्यानिकी और पशुपालन जैसे विकल्पों से जोड़ना रहा। विशेषज्ञों ने खेती की योजना बनाते समय लागत और बाजार की संभावनाओं का आकलन करने पर जोर दिया।
नीमच क्षेत्र में लहसुन के साथ चिया, अश्वगंधा, कलौंजी और अन्य कृषि उपज का भी कारोबार होता है। 23 सितंबर के मंडी आंकड़ों में इन फसलों की आवक और अलग-अलग गुणवत्ता के भाव दर्ज किए गए।