चंबल डूब क्षेत्र से विस्थापित आदिवासियों का प्रदर्शन, ACME सोलर प्लांट के गेट पर लगाया ताला

जमीन को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी
ग्रामीणों का कहना है कि चंबल बांध के डूब क्षेत्र में आने के कारण उनका मूल गांव पहले ही विस्थापित हो चुका है। उनका आरोप है कि अब जिस क्षेत्र में वे खेती कर जीवन-यापन कर रहे हैं, वहां भी सोलर प्रोजेक्ट के कारण उनकी जमीन प्रभावित हो रही है। ग्रामीणों ने दोबारा विस्थापन की आशंका जताते हुए अपनी मांगें प्रशासन और कंपनी प्रबंधन के सामने रखीं।
बारिश के बीच जारी रहा प्रदर्शन
सुबह से शुरू हुआ प्रदर्शन शाम करीब 4 बजे तक चला। तेज बारिश के बावजूद महिलाएं, बुजुर्ग और युवा कंपनी के मुख्य गेट के सामने मौजूद रहे। प्रदर्शन के चलते प्लांट साइट पर करीब सात घंटे तक कामकाज प्रभावित रहने की बात सामने आई है।
लिखित आश्वासन के बाद खोला गया गेट
मामले की सूचना मिलने पर चित्तौड़गढ़ भाजपा जिला मंत्री कालूराम मीणा, नायब तहसीलदार अनिल धाकड़ और पुलिस बल मौके पर पहुंचा। ग्रामीणों की मांगों और विरोध के बाद कंपनी हेड देवेश शर्मा ने मौके पर लिखित आश्वासन दिया। इसके बाद ग्रामीणों ने मुख्य गेट पर लगाया गया ताला खोल दिया।
स्थानीय रिपोर्ट में ग्रामीणों द्वारा निजी जमीन पर सोलर प्लांट लगाए जाने के आरोप बताए गए हैं; कंपनी की ओर से इस आरोप पर स्वतंत्र आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध रिपोर्ट में दर्ज नहीं है।
आगे की स्थिति
ग्रामीणों का कहना है कि लिखित आश्वासन के आधार पर उनकी जमीन और विस्थापन से जुड़े मुद्दों का समाधान होना चाहिए। मामले में प्रशासन और कंपनी प्रबंधन की ओर से आगे की कार्रवाई पर ग्रामीणों की नजर है।