नीमच में जेसीबी से फसल उजाड़ने का आरोप, जमीन विवाद में ग्रामीणों ने एसपी कार्यालय पहुंचकर मांगा न्याय

ट्रैक्टर-जेसीबी से फसल और बाड़ को नुकसान पहुंचाने का आरोप
पीड़ित त्रिलोकलाल माली, बरदीराम माली और गोपाल माली के अनुसार, उन्होंने अलग-अलग वर्षों में रजिस्टर्ड विक्रय पत्रों के माध्यम से कृषि भूमि खरीदी थी। उनका कहना है कि वे लंबे समय से इस जमीन पर खेती कर रहे हैं।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि राजस्व रिकॉर्ड और पुराने-नए सर्वे नंबरों में कथित त्रुटियों का फायदा उठाकर मुकेश नारदा दस्तावेजों के आधार पर नामांतरण कराने और जमीन पर कब्जा करने का प्रयास कर रहे हैं।
पीड़ित पक्ष के अनुसार, 22 मई 2026 को ट्रैक्टर और जेसीबी की मदद से खेत में खड़ी तिल्ली और बाजरे की फसल, पेड़ों तथा खेत की बाड़ को नुकसान पहुंचाया गया। विरोध करने पर जान से मारने की धमकी देने और मोबाइल तोड़ने का प्रयास करने का आरोप भी लगाया गया है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच और संबंधित दस्तावेजों के आधार पर होना बाकी है।
न्यायालय की निषेधाज्ञा के बावजूद हस्तक्षेप का दावा
पीड़ितों के मुताबिक, विवादित संपत्ति को लेकर सिविल न्यायालय ने 18 जून 2026 को एकपक्षीय अस्थायी निषेधाज्ञा जारी की थी। उनका दावा है कि आदेश में संपत्ति में हस्तक्षेप और हस्तांतरण पर रोक लगाई गई थी। इसके बावजूद शनिवार को दोबारा धमकियां देने का आरोप लगाया गया है।
पीड़ित पक्ष ने मांग की है कि न्यायालय के आदेश और भूमि संबंधी दस्तावेजों के आधार पर पूरे मामले की जांच की जाए। साथ ही, यह भी स्पष्ट किया जाए कि कथित घटना के संबंध में पहले पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई थी या नहीं और उस पर क्या कार्रवाई हुई।
एसपी कार्यालय पहुंचे ग्रामीण, आंदोलन की चेतावनी
कार्रवाई की मांग को लेकर पीड़ित पक्ष और सर्व समाज के प्रतिनिधि पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे। उन्होंने आरोपों की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग की।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द उचित कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन किया जाएगा। पीड़ित पक्ष ने कथित रूप से परेशान करने वाले व्यक्ति के खिलाफ जिला बदर की कार्रवाई करने की मांग भी उठाई है। हालांकि, इस मांग पर किसी आधिकारिक निर्णय की पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती।
भूमि विवाद में दस्तावेजों और न्यायालय के आदेश की जांच जरूरी
इस मामले में जमीन के स्वामित्व, राजस्व रिकॉर्ड, विक्रय पत्रों, न्यायालय के आदेश और कथित नुकसान की जांच महत्वपूर्ण होगी। आरोपों की पुष्टि होने पर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही, संबंधित दूसरे पक्ष का बयान और दस्तावेज भी जांच में शामिल किए जाने चाहिए, ताकि विवाद का निष्पक्ष समाधान हो सके।
ग्रामीणों की मांग है कि उन्हें सुरक्षा मिले और भूमि विवाद का निपटारा कानून के अनुसार किया जाए।