नई विधा पड़ताल: गांधी सागर से नीमच तक पानी का इंतजार, ₹3,007 करोड़ की योजनाओं पर उठे सवाल

पेयजल योजना की समय-सीमा बढ़ी
जल जीवन मिशन के तहत गांधी सागर समूह जल प्रदाय योजना-2 में नीमच और मंदसौर जिलों के कुल 915 गांव शामिल हैं। इनमें नीमच जिले के 646 गांव हैं। परियोजना की स्वीकृत लागत 1,798.05 करोड़ रुपये है।
योजना का मूल लक्ष्य 28 दिसंबर 2024 तक काम पूरा करना था। इसके बाद मार्च 2025 से जलापूर्ति शुरू करने का लक्ष्य बताया गया था। हालांकि, मार्च 2026 की प्रगति रिपोर्ट के अनुसार, परियोजना की समय-सीमा बढ़ाकर 31 अक्टूबर 2026 कर दी गई थी।
रिपोर्ट में मार्च 2026 तक भौतिक प्रगति 94.34 प्रतिशत और वित्तीय प्रगति 85.49 प्रतिशत बताई गई थी। लेकिन निर्माण की प्रगति और गांवों में नियमित पेयजल आपूर्ति शुरू होने की स्थिति अलग-अलग विषय हैं। इसलिए यह स्पष्ट होना जरूरी है कि अब तक कितने गांवों में नियमित जलापूर्ति शुरू हो चुकी है और कितने गांव अभी बाकी हैं।
सिंचाई परियोजना से 215 गांवों को उम्मीद
रामपुरा-मनासा सूक्ष्म उद्वहन सिंचाई परियोजना की घोषित लागत 1,208.89 करोड़ रुपये है। इसके तहत रामपुरा, मनासा, नीमच और जावद तहसीलों के 215 गांवों की 65,400 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा देने का लक्ष्य रखा गया है।
परियोजना के विवरण के अनुसार, गांधी सागर जलाशय से पानी उठाकर पाइपलाइन के माध्यम से कृषि क्षेत्रों तक पहुंचाने की व्यवस्था प्रस्तावित है। सेमली आंत्री और ग्राम बंडा के निकट दो पंपिंग स्टेशन बनाए जाने का भी उल्लेख है।
इस परियोजना से किसानों को लाभ तभी माना जाएगा, जब निर्धारित कृषि क्षेत्र तक वास्तव में पानी पहुंचेगा। 65,400 हेक्टेयर सिंचाई का लक्ष्य है, लेकिन वर्तमान में कितने हेक्टेयर जमीन सिंचित हो रही है, इसका अद्यतन और प्रमाणित आंकड़ा सामने आना जरूरी है।
छह बड़े सवाल, जिनके जवाब जरूरी
1. 646 गांवों में कितने घरों तक पहुंचा पानी?
पेयजल योजना में अब तक कितने गांवों में नियमित जलापूर्ति शुरू हुई है और कितने गांव निर्माण या परीक्षण के चरण में हैं?
2. पेयजल योजना की समय-सीमा क्यों बढ़ी?
दिसंबर 2024 में पूरी होने वाली योजना को अक्टूबर 2026 तक बढ़ाने की जरूरत क्यों पड़ी?
3. अब तक कितना खर्च हुआ?
दोनों परियोजनाओं में वास्तविक भुगतान कितना हुआ है और कितने निर्माण कार्य शेष हैं?
4. 65,400 हेक्टेयर में वास्तव में कितनी सिंचाई हो रही है?
लक्षित क्षेत्र के मुकाबले वर्तमान में कितनी कृषि भूमि तक पानी पहुंचने की आधिकारिक पुष्टि हुई है?
5. किसानों को पानी कब मिलेगा?
सिंचाई परियोजना की मूल और संशोधित पूर्णता तिथि क्या है? इसकी वर्तमान स्थिति सार्वजनिक की जानी चाहिए।
6. देरी के लिए जवाबदेही किसकी है?
निर्धारित समय-सीमा में लक्ष्य पूरा नहीं होने के कारण, जिम्मेदार एजेंसी और आगे की कार्ययोजना क्या है?
अधिकारियों के अनुसार, पेयजल योजना में लग सकता है और समय
रिपोर्ट में जल निगम, नीमच के प्रबंधक धीरेंद्र बिजोरिया के हवाले से बताया गया है कि पेयजल योजना का काम अक्टूबर में पूरा होना था, लेकिन अब लक्ष्य समय पर पूरा होना मुश्किल है। उनके अनुसार, परियोजना को पूरा होने में लगभग एक वर्ष और लग सकता है तथा गर्मी के मौसम में ही काम की प्रगति संभव हो पाएगी।
अब प्रगति प्रतिशत नहीं, जमीन पर परिणाम जरूरी
गांधी सागर से पानी लाने वाली दोनों परियोजनाएं नीमच जिले के ग्रामीण परिवारों और किसानों के लिए महत्वपूर्ण हैं। पेयजल योजना की सफलता का आकलन घरों तक नियमित और गुणवत्तापूर्ण पानी पहुंचने से होगा, जबकि सिंचाई परियोजना की सफलता खेतों तक पानी पहुंचने और वास्तविक सिंचित क्षेत्र के आंकड़ों से तय होगी।
अब जरूरत गांववार पेयजल आपूर्ति, परियोजनाओं पर हुए वास्तविक खर्च, शेष निर्माण कार्य और सिंचाई के लाभार्थी क्षेत्रों का स्पष्ट विवरण सार्वजनिक करने की है। जनता को यह जानने का अधिकार है कि करोड़ों रुपये की इन योजनाओं का काम कहां तक पहुंचा, देरी क्यों हुई और उन्हें वास्तविक लाभ कब मिलेगा।