भारत में मजबूत अल नीनो का असर, सर्दियों में सामान्य से अधिक तापमान रहने की आशंका

विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के आकलन के मुताबिक, अल नीनो की स्थिति साल के अंत तक और मजबूत हो सकती है तथा इसका प्रभाव फरवरी 2027 तक बने रहने की संभावना है। हालांकि, इसका असर अलग-अलग क्षेत्रों में अलग हो सकता है। ।
क्या है अल नीनो और क्यों बढ़ रही चिंता?
अल नीनो प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी भूमध्यरेखीय हिस्से में समुद्र की सतह के तापमान के सामान्य से अधिक गर्म होने से जुड़ी जलवायु घटना है। यह दुनिया के कई हिस्सों में तापमान और वर्षा के सामान्य पैटर्न को प्रभावित कर सकती है।
भारतीय मौसम विभाग के अनुसार, 2026 में अल नीनो की स्थिति मजबूत होने की संभावना है। हालांकि, इसका वास्तविक प्रभाव समुद्र और वायुमंडल की परिस्थितियों के साथ-साथ अन्य जलवायु कारकों पर भी निर्भर करेगा। ।
सर्दियों में कम ठंड और बारिश-बर्फबारी में बदलाव की आशंका
मौसम संबंधी अनुमानों के अनुसार, आने वाले महीनों में सामान्य से अधिक तापमान रहने की संभावना है। वर्षा के पैटर्न में बदलाव के कारण कुछ क्षेत्रों में बारिश कम हो सकती है, जबकि अन्य स्थानों पर स्थिति अलग रह सकती है। इसलिए पूरे देश में एक जैसी सर्दी या बर्फबारी में समान कमी होने का दावा करना फिलहाल उचित नहीं होगा।
खेती, पानी और बिजली की मांग पर पड़ सकता है असर
यदि सर्दियों में तापमान सामान्य से अधिक रहता है और कुछ क्षेत्रों में बारिश कम होती है, तो इसका असर रबी फसलों की बुवाई, फसलों की बढ़वार और मिट्टी की नमी पर पड़ सकता है। जलाशयों और भूजल पर दबाव बढ़ने की आशंका भी बनी रह सकती है।
इसके अलावा, सर्दियों के बाद गर्मी जल्दी या अधिक तीव्र होने की स्थिति में बिजली की मांग बढ़ सकती है। हालांकि, इन प्रभावों की गंभीरता क्षेत्रीय मौसम और आगामी पूर्वानुमानों पर निर्भर करेगी।
2015-16 के रिकॉर्ड से तुलना पर नजर
मौसम विशेषज्ञ इस बार विकसित हो रही अल नीनो स्थिति की तीव्रता पर नजर रख रहे हैं। विश्व मौसम विज्ञान संगठन ने इसके बहुत मजबूत होने की आशंका जताई है। फिर भी, इसकी तुलना 2015-16 की घटना से करते समय आधिकारिक समुद्री तापमान के आंकड़ों और नवीनतम वैज्ञानिक आकलनों को आधार बनाना जरूरी है।
फिलहाल विशेषज्ञों की सलाह है कि किसान, जल प्रबंधन से जुड़ी एजेंसियां और प्रशासन आगामी मौसम पूर्वानुमानों पर नजर रखें, ताकि जरूरत के अनुसार समय रहते तैयारी की जा सके।