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नीमच में अमानक खाद और कृषि दवाइयों की बिक्री पर चिंता, जांच में देरी से किसानों को नुकसान का खतरा

स्थानीय · नीमच · · अपडेट: · नई विधा डेस्क

नीमच में अमानक खाद और कृषि दवाइयों की बिक्री पर चिंता, जांच में देरी से किसानों को नुकसान का खतरा

स्थान: नीमच, मध्य प्रदेश

नकली खाद के कारोबार से किसानों की चिंता बढ़ी

नीमच। रबी सीजन की शुरुआत के साथ नकली और अमानक खाद तथा कृषि दवाइयों की बिक्री को लेकर चिंता बढ़ रही है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, भिंड जिले के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि विभाग और किसानों की सतर्कता से 750 से अधिक बोरियां संदिग्ध डीएपी और एपीएस खाद जब्त की गई हैं। जांच में इस कारोबार के अंतरराज्यीय नेटवर्क से जुड़े होने की आशंका भी सामने आई है।

रिपोर्ट में देवास, मंदसौर और इंदौर से लेकर राजस्थान के भीलवाड़ा तक फैले नेटवर्क का उल्लेख किया गया है। नीमच जिले के मनासा, जावद और नीमच क्षेत्र में भी अमानक खाद तथा कृषि दवाइयों की बिक्री को लेकर किसानों ने चिंता जताई है।

जांच रिपोर्ट आने में देरी बड़ी समस्या

किसानों के सामने सबसे बड़ी समस्या खाद के नमूनों की जांच में लगने वाला समय है। रिपोर्ट के मुताबिक, बोवनी के समय खाद के नमूने लिए जाते हैं, लेकिन प्रयोगशाला से जांच रिपोर्ट आने में लगभग तीन महीने तक लग सकते हैं।

ऐसे में जब तक खाद के अमानक होने की पुष्टि होती है, तब तक किसान उसका इस्तेमाल खेतों में कर चुके होते हैं। इससे फसल की बढ़वार और उत्पादन प्रभावित होने का खतरा रहता है। किसानों का कहना है कि जांच प्रक्रिया तेज होनी चाहिए, ताकि समय रहते संदिग्ध उत्पादों की बिक्री रोकी जा सके।

भिंड में जब्ती, कार्रवाई को लेकर सवाल

रिपोर्ट के अनुसार, भिंड जिले के अमायन कृषि उपज मंडी परिसर में ट्रैक्टर से कथित तौर पर नकली डीएपी बेची जा रही थी। सकराया क्षेत्र में एपीएस खाद की 600 बोरियां पकड़े जाने का भी उल्लेख है।

रिपोर्ट में कुछ लोगों के नाम सामने आने और पुलिस थानों तथा कृषि विभाग के बीच कार्रवाई को लेकर परेशानी होने की बात कही गई है। हालांकि, आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी और अन्य कानूनी कार्रवाई की वर्तमान स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। आरोपों को जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही अंतिम रूप से तय किया जा सकता है।

नकली खाद से अंकुरण और मिट्टी की उर्वरता प्रभावित होने का खतरा

नीमच जिला अफीम, लहसुन और ईसबगोल जैसी महत्वपूर्ण फसलों के उत्पादन के लिए जाना जाता है। ऐसे में नकली खाद और अमानक कृषि उत्पादों का इस्तेमाल किसानों के लिए गंभीर आर्थिक जोखिम बन सकता है।

रिपोर्ट में वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. राजपाल तोमर के हवाले से बताया गया है कि जब्त खाद के नमूनों में उर्वरक के बजाय राख और बुरादे से बनी गोलियां मिलने की बात सामने आई। उनके अनुसार, आवश्यक पोषक तत्वों की कमी से बीज का अंकुरण प्रभावित हो सकता है, फसल की बढ़वार घट सकती है और मिट्टी की उर्वरता पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है।

फास्ट-ट्रैक जांच और सख्त कार्रवाई की मांग

भारतीय किसान संघ ने खाद और कृषि दवाइयों के नमूनों की जांच के लिए फास्ट-ट्रैक प्रयोगशाला व्यवस्था बनाने की मांग की है। संगठन चाहता है कि जांच रिपोर्ट सात से दस दिनों के भीतर उपलब्ध हो, ताकि संदिग्ध उत्पादों के इस्तेमाल से पहले कार्रवाई की जा सके।

संगठन ने कथित नेटवर्क की जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग भी उठाई है। किसान नेता रणवीर सिंह चंद्रावत ने सवाल उठाया कि यदि जांच रिपोर्ट आने तक किसान खाद का इस्तेमाल कर चुके हों और फसल को नुकसान हो जाए, तो उसकी भरपाई कौन करेगा।

किसानों को समय पर मिले प्रमाणित खाद

नकली और अमानक खाद की समस्या से निपटने के लिए समय पर नमूना जांच, प्रभावी निगरानी और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जरूरी है। किसानों के हित में यह भी महत्वपूर्ण है कि उन्हें प्रमाणित गुणवत्ता वाले कृषि उत्पाद उपलब्ध हों और नुकसान की स्थिति में शिकायत तथा मुआवजे की प्रक्रिया स्पष्ट रहे।

नोट: इस खबर में शामिल आरोप और जांच संबंधी विवरण उपलब्ध रिपोर्ट पर आधारित हैं। संबंधित विभागों की आधिकारिक पुष्टि और कार्रवाई की अद्यतन स्थिति सामने आने पर तथ्यों की अधिक स्पष्ट तस्वीर मिलेगी।

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