अफीम नीति में देरी से किसान असमंजस में, तरुण बाहेती ने केंद्र सरकार पर उठाए सवाल

नीमच। अफीम नीति 2026-27 जारी होने में देरी के चलते मालवा और मेवाड़ क्षेत्र के अफीम उत्पादक किसानों के सामने असमंजस की स्थिति बनी हुई है। खेत तैयार होने के बावजूद किसान यह तय नहीं कर पा रहे हैं कि उन्हें अफीम की खेती के लिए कितने रकबे में तैयारी करनी है। जिला कांग्रेस अध्यक्ष तरुण बाहेती ने केंद्र सरकार और केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए नीति जल्द जारी करने की मांग की है।
बुवाई में देरी से फसल प्रभावित होने की आशंका
बाहेती के अनुसार, अफीम की खेती में समय पर बुवाई महत्वपूर्ण होती है। नीति जारी होने में देरी से किसान अपनी फसल की योजना नहीं बना पा रहे हैं। उनका कहना है कि कम बारिश के कारण खेतों में नमी भी घट रही है और मिट्टी कठोर हो रही है।
किसानों के सामने दुविधा यह है कि यदि वे वैकल्पिक फसल की बुवाई कर देते हैं और बाद में अफीम का पट्टा जारी होता है, तो वे अफीम की खेती से वंचित रह सकते हैं। वहीं, खेत खाली रखने पर मिट्टी की नमी और बुवाई के अनुकूल समय निकलने की चिंता बनी हुई है।
पट्टा वितरण में पारदर्शिता की मांग
जिला कांग्रेस अध्यक्ष ने मांग की है कि नीति जारी होने के साथ ही पात्र अफीम उत्पादक किसानों की सूची केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो की आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक की जाए। उनका कहना है कि सूची सार्वजनिक होने से पट्टा वितरण प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी और किसानों की आशंकाएं दूर होंगी।
उन्होंने तकनीकी विसंगतियों के कारण वर्षों पहले निरस्त किए गए पुराने पट्टों की समीक्षा कर उन्हें बहाल करने की मांग भी उठाई।
मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी
बाहेती ने केंद्र सरकार और नारकोटिक्स विभाग से अफीम नीति 2026-27 जल्द घोषित करने, पट्टा वितरण प्रक्रिया सरल बनाने और किसानों की लंबित समस्याओं का समाधान करने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि शीघ्र राहत नहीं मिलने पर नारकोटिक्स कार्यालय का घेराव कर आंदोलन किया जाएगा।
फिलहाल नीति जारी होने और किसानों की मांगों पर संबंधित विभाग की ओर से निर्णय का इंतजार है।