फरार डॉक्टर की हाईकोर्ट से भी अग्रिम जमानत खारिज: ब्लैंक चेक और 73 बार बातचीत का हवाला

मंदसौर। ग्राम धोत्रा निवासी संदीप पाटीदार की आत्महत्या के मामले में आरोपी बनाए गए पिपलियामंडी निवासी शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रदीप कुमार पाटीदार को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ से भी अग्रिम जमानत नहीं मिली।
मंदसौर जिला एवं सत्र न्यायालय से अग्रिम जमानत आवेदन खारिज होने के बाद डॉक्टर की ओर से हाईकोर्ट में आवेदन प्रस्तुत किया गया था। मंगलवार को न्यायमूर्ति राजेंद्र कुमार वाणी की अदालत ने आवेदन निरस्त कर दिया।
सुनवाई के दौरान अभियोजन और शिकायतकर्ता पक्ष की ओर से मामले से जुड़े विभिन्न तथ्यों का उल्लेख किया गया। कोर्ट के आदेश में बताया गया कि मृतक के पास आरोपी द्वारा दिए गए ब्लैंक चेक होने और दोनों के बीच कथित तौर पर 73 बार बातचीत होने की जानकारी जांच के दौरान सामने आई है। मामले से संबंधित CCTV फुटेज भी पुलिस को उपलब्ध कराए जाने की बात कही गई।
हाईकोर्ट ने प्रथम दृष्टया माना कि जांच के दौरान आरोपी की आवश्यकता हो सकती है और उसके कब्जे से ब्लैंक चेक की जब्ती भी जरूरी हो सकती है। मामले की गंभीरता और उपलब्ध सामग्री को देखते हुए इस स्तर पर अग्रिम जमानत देना उचित नहीं माना गया।
बचाव पक्ष ने क्या तर्क दिए
बचाव पक्ष की ओर से तर्क दिया गया कि मामले में कोई आत्महत्या नोट बरामद नहीं हुआ है और आरोपी को गलत तरीके से फंसाया गया है। दोनों के बीच पैसों के लेन-देन को लेकर विवाद होने तथा घटना से कुछ दिन पहले हुई बातचीत में आत्महत्या के लिए उकसाने जैसी कोई बात नहीं होने का तर्क भी रखा गया। बचाव पक्ष ने आरोपी का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं होने की बात भी कही।
पुलिस ने जांच के बाद डॉ. प्रदीप पाटीदार के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने सहित संबंधित धाराओं में प्रकरण दर्ज किया है।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब ब्लैंक चेक, बातचीत, CCTV फुटेज और अन्य उपलब्ध साक्ष्य जांच में महत्वपूर्ण रहेंगे। मामले में आरोपी पर लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही होगी।