नीमच/मंदसौर में ‘मिशन जीवन रक्षक’ पर जोर: हादसा पीड़ितों को मिलेगा त्वरित मुआवजा

नीमच। नीमच-उज्जैन संभागीय सड़क सुरक्षा समिति की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में ‘मिशन जीवन रक्षक’ अभियान के तहत सड़क हादसों में कमी लाने और दुर्घटना के बाद पीड़ितों को जल्द सहायता उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया गया। बैठक में नीमच और मंदसौर कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षकों ने अपने-अपने जिलों में अभियान के तहत की जा रही कार्रवाई की जानकारी प्रस्तुत की।
बैठक में निजी वाहनों से हुई दुर्घटनाओं में मृत लोगों के परिजनों को मिलने वाले मुआवजा प्रकरणों के लंबे समय तक लंबित रहने का मुद्दा सामने आया। अधिकारियों को ऐसे मामलों का शीघ्र निराकरण करने के निर्देश दिए गए, ताकि पीड़ित परिवारों को अनावश्यक रूप से परेशान न होना पड़े।
एडीजी राकेश गुप्ता ने सड़क सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए कई निर्देश दिए। टोल प्लाजा के आसपास चार पहिया वाहनों में सीट बेल्ट और दोपहिया वाहन चालकों के लिए हेलमेट की जांच करने को कहा गया। साथ ही यह भी निर्देश दिया गया कि जांच के दौरान सामान्य यातायात प्रभावित नहीं होना चाहिए।
शहरों में सब्जी मंडियों के कारण प्रभावित होने वाली यातायात व्यवस्था को सुधारने और सड़कों पर घूमने वाले बेसहारा गौवंश को सुरक्षित गौशालाओं तक पहुंचाने के निर्देश भी दिए गए।
हादसे की स्थिति में पुलिस, एंबुलेंस, एनएचएआई और एमपीआरडीसी की आपातकालीन टीमों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया गया। तीनों विभागों को अपने फोर्स और एंबुलेंस के संपर्क नंबर आपस में साझा करने के निर्देश दिए गए, ताकि दुर्घटना के बाद रिस्पॉन्स टाइम कम किया जा सके।
नीमच-मंदसौर हाईवे सहित अन्य मार्गों पर चिन्हित ब्लैक स्पॉट्स की तकनीकी कमियों को दूर करने की कार्रवाई भी जारी रखने को कहा गया। इसके साथ ही हाईवे किनारे स्थित ढाबों और रेस्टोरेंट के कर्मचारियों को डॉक्टरों एवं पैरामेडिकल स्टाफ के माध्यम से फर्स्ट रिस्पॉन्डर, प्राथमिक उपचार और CPR का प्रशिक्षण देने की योजना पर जोर दिया गया।
ढाबों और रेस्टोरेंटों पर एंबुलेंस, नजदीकी अस्पताल और संबंधित थानों के संपर्क नंबर प्रदर्शित करने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि हादसे के समय आसपास मौजूद लोग तुरंत सहायता प्राप्त कर सकें।
मुख्य निर्देश
- लंबित मुआवजा प्रकरणों का शीघ्र निराकरण।
- ब्लैक स्पॉट्स की तकनीकी कमियां दूर करना।
- टोल प्लाजा पर हेलमेट और सीट बेल्ट की जांच।
- हादसों में पुलिस-एंबुलेंस का रिस्पॉन्स टाइम कम करना।
- ढाबा कर्मचारियों को फर्स्ट रिस्पॉन्डर और CPR प्रशिक्षण।
- ढाबों पर एंबुलेंस, अस्पताल और थाना नंबर प्रदर्शित करना।
- NHAI, MPRDC और पुलिस के बीच बेहतर समन्वय।