लोकार्पण के इंतजार में अटका 13 करोड़ का क्रिटिकल केयर सेंटर: 10 माह से तैयार भवन

नीमच। जिले के गंभीर मरीजों को स्थानीय स्तर पर बेहतर और उच्चस्तरीय उपचार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से करीब 13 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया 50 बेड का क्रिटिकल केयर सेंटर अब तक शुरू नहीं हो पाया है। भवन करीब 10 माह से तैयार है, लेकिन लोकार्पण और संसाधनों की उपलब्धता के कारण इसका संचालन अटका हुआ है।
यह प्रोजेक्ट वर्ष 2023 में शुरू हुआ था और इसे नवंबर 2024 तक पूरा किया जाना था। निर्माण में देरी के बाद भवन तैयार हुआ। इसके बाद दिसंबर 2025 में लोकार्पण की उम्मीद जताई गई थी, लेकिन निर्धारित समय पर केंद्र शुरू नहीं हो सका।
अस्पताल प्रबंधन के अनुसार केंद्र का लोकार्पण केंद्रीय स्तर पर किए जाने का प्रस्ताव है। हालांकि, केंद्रीय मंत्री की भौतिक उपस्थिति होगी या वर्चुअल माध्यम से लोकार्पण किया जाएगा, इसे लेकर अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।
350 KW जनरेटर की अड़चन दूर
केंद्र के संचालन में तकनीकी बाधा बने 350 किलोवाट के जनरेटर को अब स्थापित कर दिया गया है। जनरेटर रनिंग कंडीशन में है, जिससे बिजली बैकअप की प्रमुख समस्या दूर हो गई है।
हालांकि, इसके बावजूद केंद्र में सभी आवश्यक चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता और विशेषज्ञ डॉक्टरों सहित प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ की व्यवस्था अभी पूरी नहीं हुई है। ऐसे में भवन तैयार होने के बावजूद मरीजों को क्रिटिकल केयर सुविधा का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
ICU और ऑपरेशन थिएटर जैसी सुविधाएं प्रस्तावित
क्रिटिकल केयर सेंटर में ICU, HDU, आइसोलेशन वार्ड, ऑपरेशन थिएटर और लेबर-डिलीवरी-रिकवरी (LDR) रूम जैसी सुविधाएं प्रस्तावित हैं। केंद्र के शुरू होने से गंभीर मरीजों को नीमच में ही उपचार मिलने की उम्मीद है।
वर्तमान में गंभीर मरीजों को बेहतर उपचार के लिए उदयपुर, इंदौर या अहमदाबाद जैसे शहरों में रेफर करना पड़ता है। स्थानीय स्तर पर क्रिटिकल केयर सुविधा उपलब्ध होने से मरीजों और उनके परिजनों को समय, खर्च और लंबी दूरी की परेशानी से राहत मिल सकती है।
कुछ उपकरण आना बाकी
सिविल सर्जन डॉ. महेंद्र पाटिल के अनुसार, क्रिटिकल केयर यूनिट का हैंडओवर हो चुका है और जनरेटर भी स्थापित कर दिया गया है। अब मुख्य रूप से लोकार्पण का इंतजार है, जो केंद्र स्तर से प्रस्तावित है। उन्होंने बताया कि यूनिट में इस्तेमाल होने वाले कुछ उपकरण अभी आना बाकी हैं।
फिलहाल केंद्र के संचालन की अंतिम तारीख स्पष्ट नहीं है। शेष उपकरण, विशेषज्ञ स्टाफ और लोकार्पण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही 50 बेड की इस सुविधा का वास्तविक लाभ मरीजों को मिल सकेगा।