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आप तो किताबें बांटेंगे और हम स्कूल बंद कर बैठे रहेंगे की नीति के विरोध मे लामबंद हुवे।



विद्यालय संचालको ने रखी अपनी बात कहा सभी को समानांतर दर्जा दो ।

नीमच। अशासकीय शिक्षण संघ जिला नीमच के आह्वान पर जिले के अंतर्गत समस्त अशासकीय विद्यालयों के संचालकों द्वारा शासकीय अशासकीय विद्यालयों में शासन द्वारा भेदभाव किया जा रहा जिसके विषय में जिलाध्यक्ष अजय भटनागर के नेतृत्व में प्रदेश शिक्षा आयुक्त के नाम कलेक्टर जिला नीमच को ज्ञापन सोपा । ज्ञापन का वाचन पंकज दुबे ने किया।
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    ऐसे हो रहा है भेदभाव
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शासकीय विद्यालयों में बच्चों को पुस्तके वितरण की जा रही है घर घर मोहल्ला मोहल्ला जाकर पढ़ाया जा रहा है किंतु अशासकीय विद्यालय शासन के नियमों के अनुसार कुछ नहीं कर पा रहे । जिससे अशासकीय विद्यालय संचालकों मे रोष व्याप्त है। इन स्कूलों में अध्ययन करने वाले बच्चों के पालक सरकारी और अशासकीय स्कूलों के बिच उपजी इस स्तथी को लेकर स्कूल संचालकों से सवाल खड़े करते हैं लेकिन हमारे पास कोई जवाब नहीं है।
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  कोरोना के चलते बंद है स्कूल
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अशासकीय विद्यालय 15 मार्च से बंद है और विद्यालय की फीस भी बाकी चल रही है ऐसे में शासन द्वारा आर्थिक पैकेज भी इन विद्यालयों को दिया जाए आरटीई की निशुल्क प्रवेशित छात्रों की फीस प्रतिपूर्ति भी अविलंब कीजाए ताकि विद्यालयों को जो आर्थिक समस्या से गुजरना पड़ रहा है उस से निजात मिले। संचालक के सामने आ रही विकट समस्या जैसे विद्यालय भवन किराया टीचर्स सैलेरी वाहन किस्त आदि का भुगतान किया जा सके । वर्तमान में विद्यालय संचालक मानसिक रूप से परेशान है शासकीय अशासकीय दोनों में भेदभाव ना हो एवं शासन शासकीय विद्यालयों के भाती अशासकीय विद्यालयों में भी घर घर जाकर या विद्यालय में सीमित संख्या में छात्र छात्रा को पढ़ाने की स्वीकृति हेतु आदेश पारित किया जाए ताकि बच्चों का भविष्य भी ना बिगड़े और पालक भी संतुष्ट रहे।

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