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कुल्फी वाले ने कहा क्या खाऊँ ? दो महिने से है लॉकडाउन। कैसे निकालूँगा साल ?

सिंगोली। भीषण गर्मी में चिल्ला चिल्लाकर कुल्फी बेचते लोंगों का मनोरंजन करने वाले चांदमल शर्मा के सामने भूखे मरने की नोबत आ गयी है? सड़क पर उसकी गुहार कुछ ऐसा ही बयां कर रही है।
सोमवार सुबह जब बाजार खुले तो उक्त व्यक्ति अपनी पीड़ा व्यक्त करते नजर आया।
सिंगोली स्थित पेंट्रोल पम्प के सामने वह गुहार लगाते चिल्ला रहा था, क्या खाऊं दो महीने से लॉक डाउन है। धंधे चौपट हो गये है। साल में केवल दो तीन महीने ही ऐसे होते है जिनमे वह कुल्फी बेचकर परिवार के लिए पूरे साल की रोटी का प्रबंध करते है लेकिन इस वर्ष कुल्फी बिकने वाले पूरे सीजन में ही लॉक डाउन रहा। पिछले सीजन में जो कुछ इक्कट्ठा किया था वह ख़त्म हो गया है। अब उसके परिवार के सामने खाने के लाले पड़ने वाले है।
चांदमल शर्मा ने पीड़ा व्यक्त की कि सरकार दिहाड़ी मजदूरों और गरीबो की चिंता कर रही है। बाल काटने वालों की रोजी रोटी की चिंता कर रही है। लेकिन मध्यमवर्गीय लोग जिनके धंधे बंद है उनका क्या होगा। हम लोग कहाँ जाएंगे? उसने बताया की उसके घर में खाने को कुछ नहीं बचा है। वह नेताओं को अपनी पीड़ा सुनाना चाहते है लेकिन नेताओं ने उनको मोबाईल में ब्लैक लिस्टेड कर दिया है। अब में अपनी पीड़ा किसे सुनाऊँ।
बतादे कि चांदमल शर्मा एक ऐसा व्यक्ति है जिसे चुनाव के दौर में हर एक नेता और राजनैतिक दल अपनी डम डमी बजाने के लिए इस्तेमाल करता है, और वह पूरी वफादारी के साथ कभी भगवा धारण कर तो कभी तिरंगा लहराकर लोगों में उनके गुणगान करता है। हाल ही में उसने केजरीवाल की टोपी भी धारण की लेकिन आज जब वह परेशानी के दौर से गुजर रहा है तो कोई उसकी सुध नहीं ले रहा है।
सोमवार सुबह उसने पत्रकारों के सामने गिड़गिड़ाते हुए उसके परिवार के वास्ते चन्दा करने की गुहार लगाई। वह बोल रहा था अब अगर दो चार दिन निकले तो उसका परवार भूखे मर जायेगा।

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