logo
add image

भूटान भी हो सकता है भारत से दूर

नेपाल की चीन से नजदीकियों के बाद भूटान में पीपल्स डेमोक्रैटिक पार्टी के चुनाव में पिछड़ना भारत के लिए अच्छा संकेत नहीं है। पार्टी के मौजूदा प्रधानमंत्री शेरिंग तोबगे को भारत के प्रति उदार और सहयोगी विदेश नीति के लिए जाना जाता है। हालांकि, भूटान चुनाव में पहले राउंड के बाद उनकी पार्टी पिछड़कर तीसरे नंबर पर आ गई है और नए न्यामरूप शोगपा की पार्टी डीएनटी पहले नंबर पर है। मुख्य विपक्षी दल फेंसुम शोगपा की डीपीटी दूसरे नंबर पर है और 18 अक्टूबर तक फाइनल रिजल्ट आने से पहले तक मजबूत दावेदार के तौर पर देखी जा रही है।

सेना प्रमुख रावत-रावत ने कहा कि भारत का नेतृत्व पड़ोसी देशों के साथ संबंध विकसित करने में विश्वास करता है। उन्होंने कहा, हमारा देश बड़ा है और अगर हम अगुवाई करते हैं, तो सब अनुसरण करेंगे। इसलिए हम इस ओर बढ़े हैं। उन्होंने दावा किया कि भारत अर्थव्यवस्था के चलते चीन को प्रतिस्पर्धी मानता है। रावत ने कहा, वे बाजार की ओर देख रहे हैं और हम दोनों में प्रतिस्पर्धा है, जो भी बेहतर करेगा, जीतेगा। भविष्य में बिम्सटेक वार्ता में अवैध आव्रजन का मुद्दा जोड़े जाने की संभावना के सवाल पर उन्होंने कहा कि यह नयी बात नहीं है। रावत ने कहा, हमेशा से आर्थिक रूप से कमजोर देश से मजबूत देश की ओर विस्थापन होता है। इसलिए समान प्रगति महत्वपूर्ण है। जब तक विकास का समान और सही वितरण नहीं होता, यह बात खत्म नहीं होनेवाली।

नेपाल और भूटान जैसे देशों को भूगोल की वजह से भारत की ओर झुकाव रखना होगा। भूगोल भारत की ओर झुकाव की वकालत करता है और जहां तक गठजोड़ (चीन के साथ) की बात है तो यह अस्थायी चीज है। पाकिस्तान और अमेरिका के उदाहरण देते हुए जनरल ने दावा किया कि इस तरह के संबंध अस्थायी हैं और वैश्विक स्तर पर बदलते परिदृश्य के साथ बदलनेवाले हैं। उन्होंने कहा, इस बात का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण अमेरिका और पाकिस्तान के संबंध हैं। ये अब 70 साल पहले की तरह नहीं हैं। इसलिए हमें इन सभी मुद्दों को लेकर परेशान होने की जरूरत नहीं है। हमें अपने देश को मजबूत रखने पर ध्यान देना होगा।

पहले नेपाल से हुए थे संबंध ख़राब-नेपाल के साथ संपर्क खराब होने की शुरुआत 2015 में हुई थी। भारत ने मधेसी लोगों के हितों के लिए नेपाल के साथ जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति 2 महीने के लिए बंद कर दी थी और उस वक्त नेपाल में नए संविधान के लिए काम हो रहा था। भारत लगातार मधेसियों के समान हित का मुद्दा उठा रहा था। हालांकि, दबाव बनाने के लिए भारत का दांव उल्टा पड़ गया और नेपाल ने भारत के साथ दूरी बरतनी शुरू कर दी। 2013 में भूटान के साथ संबंधों में तल्खी उस वक्त आई थी, जब भारत ने भूटान को केरॉसिन और कुकिंग गैस पर दी जा रही सब्सिडी बंद कर दी। उस वक्त भूटान में चुनाव थे और वहां पेट्रोल-डीजल की कीमतें काफी बढ़ गई थीं।


Top