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मौका मिलते ही लॉकडाउन को तोड़ लापरवाह बने लोग

कोरोना की भयावहता से अनजान लोग...सावधानी से कर रहे परहेज

भारत ही नहीं अपितु पूरा विश्व इस समय एक भयंकर त्रासदी का सामना कर रहा है। कोरोना एक ऐसी बीमारी जिसने चिकित्सा क्षेत्र में अपने आप को सर्वश्रेष्ठ साबित कर चुके देशों को भी पस्त कर रोने पर मजबूर कर दिया है। वहीं इस खतरनाक बीमारी से लड़ने में भारत की भूमिका एक मजबूत योद्धा के रूप में रही है। और यह सबकुछ इसलिए हो पाया है क्योंकि देश का प्रशासनिक तंत्र, चिकित्सक एवं सरकार मजबूती कोरोना को हराने में दिन रात डटी हूई है। फिर भी अनजाना सा डर हमारे आसपास मंडरा रहा है उसका मूल कारण देश के वे लोग जो अब तक इस खतरनाक बीमारी को बहुत ही हल्के में ले रहे है। सरकार, प्रशासन और जागरूकता फैला रहे लोग लगातार यह अपील कर रहे है की कोरोना से डरने की नही बल्कि सावधान रहने की जरूरत है। शायद यही कारण है कि कुछ लोग कोरोना की भयावहता से अनजान होकर सरकार और प्रशासन द्वारा लागू किए जा रहे नियम और निर्देशो को पालन करने के बजाय उनका मख़ौल उड़ाने में लगे हुए है। अगर समय रहते लोगो ने कोरोना की भयावहता का डर पैदा नही किया तो शायद हम यह इतनी आसानी से जीत नही पाएंगे।



नीमच। कोरोना की जंग में नीमच जिले का प्रशासन, चिकित्सक और पुलिस मुस्तेदी से लड़ाई लड़ रहे है। प्रधानमंत्री के जनता कर्फ्यू के आव्हान के बाद जिला प्रशासन ने जिले में कोरोना के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए रविवार शाम को ही जिले को लॉक डाउन करने के आदेश जारी कर दिए, मानव स्वास्थ्य के लिहाज से यह एक बेहतर निर्णय था। इस आदेश के बाद लोगो को घर मे ही रहने की सलाह दी गई। जिसका जिले 80 प्रतिशत लोगो ने समर्थन करते हुए पालन भी किया। कुछ 20 प्रतिशत लोग ऐसे है जो इसकी भयावहता को बहुत ही हल्के में ले रहे है। कोरोना के संक्रमण चक्र को तोड़ने के लिए यह जरूरी है कि हम अपने आप को अपने घरों में कैद करके रखे और किसी के भी सम्पर्क में न आए। लेकिन आमजन के स्वास्थ्य की चिंता को लेकर सरकार और प्रशासन के इस अति महत्त्वपूर्ण निर्णय को कुछ मनचले या समाज के दुश्मन कहे जाने वाले लोग मानने के बजाय बेवजह विपरीत कार्य कर रहे है। जिसके कारण दिन रात सेवा में जुटे अधिकारियों, कर्मचारियों के मन पर आघात हो रहा होगा यह भलिभाँति समझा जा सकता है।

लॉक डाउन में छूट का नाजायज फायदा उठा रहे लोग

जिलें में लागू लॉकडाउन को लेकर प्रशासन ने सोमवार को कलेक्टर ने किराना बाजार, पेट्रोल पम्प और दूध पार्लर को छूट देते हुए संशोधित आदेश क्या जारी किया लोगो को घर से बाहर निकलने का मौका मिल गया। कई लोग किराना सामान खरीदने का बहाना बनाकर बाजार में घूमने निकल गए। वहीं कुछ लोग गाडियों में पेट्रोल-डीजल भरवाने का बहाना बनाकर सड़को पर वाहन दौड़ाने लगे। जब सबको पता है कि घर पर ही रहना है कहीं लम्बी दूरी पर जाना नही है तो क्यो लोग गाड़ियों में फूल टैंक ईंधन भरवाने निकल गए। कुछ लोगो ने तो पेट्रोल पम्प पर इस तरह भीड़ लगा दी मानो वहा पेट्रोल डीजल नहीं बल्कि कोरोना की दवाई निःशुल्क बंट रही हो।

इंडस्ट्रियल एरिया में फेक्ट्रियो में कामकाज जारी

जिले भर में कलेक्टर कार्यालय से लॉक डाउन के आदेश जारी हो रहे है। जहां एक ओर प्रशासन लोगो को घर पर रहने के निर्देश दे रहे है वहीं आदेश जारी होने वाले कलेक्टर भवन के सामने ही बने इंडस्ट्रियल एरिये में स्तिथि फैक्ट्रीयों में से अधिकांश फेक्ट्रियो में कामकाज जारी रहा। कई फेक्ट्री संचालको ने मजदूरों को बुलवाकर कामकाज करवाया। लॉक डाउन कानून की धज्जियां उड़ाकर ये लोग कानून से तो खेल ही रही है साथ ही लोगो की जिंदगी से भी खिलवाड़ करने से परहेज नही कर रहे है। प्रशासन को चहिये की ऐसे लोगो पर सख्त कार्यवाही कर उन्हें कानून का मतलब समझाए।

प्रशासन सख्त, मगर ये सख्ती अच्छी है, ओर कसावट की दरकार

कोरोना से बचाव के लिए मैदान में उतरा प्रशासनिक अमला सख्त तो है लेकिन यह सख्ती अच्छी है। मौजूदा समय मे जिस तरह के हालात है उसके बाद तो लगता है इस सख्ती को ओर बढ़ाया जाना चाहिए, वो भी उन लोगो के लिए जो इस कोरोना वायरस की भयावहता को हल्के में लेकर बहाने बनाकर बाजार में घूम रहे है।

लॉकडाउन को समझे वरना कर्फ्यू आर्डर हुए तो मुसीबत होगी

देशभर में लागू लॉक डाउन को अगर समझा जाये तो यह अब तक आमजन के लिए बन्धनकारी होकर भी राहत भरा है। प्रशासन लॉक डाउन के तहत मददगार बन सहयोग भी कर रहा है। अगर लोगो ने लॉक डाउन को ठीक से समझा नही तो हो सकता है प्रशासन को लॉक डाउन के बजाय कर्फ्यू आर्डर देना पड़ जाए उसके बाद प्रशासन कड़ाई से लोगो को घरों में मजबूर कर देगा। ऐसे में जब प्रशासन राहत दे रहा है तो उसे प्रसाद समझ कर लेना चाहिये भण्डारा समझ कर समेटने की कोशिश नही करे। इन सब बातों का सार यह है कि कोरोना को लेकर भले ही सरकार और प्रशासन कोरोना से डर कर नही सावधानी और बचकर रहने की सलाह दे रहा है। ओर यह डर न होने के कारण ही लोग इसकी भयावहता को बहुत हल्के में ले रहे है।

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